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Ankita Bhandari case नहीं थम रहा VIP विवाद, पुलिस भी हुई एक्टिव, जानिए एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने क्या कहा

Ankita Bhandari case उत्तराखंड में इन दिनों करीब तीन साल ​बाद फिर से अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा छाया हुआ है। पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर के सोशल मीडिया में जारी वीडियो के बाद से सियासत गरमाई हुई है। उर्मिला सनावर ने वीआईपी प्रकरण को लेकर बड़े दावे किए हैं।

इस प्रकरण से प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। आए दिन सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर अंकिता भंडारी केस को लेकर घमासान मचा हुआ है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ने शासन को पत्र भेजकर कुछ सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई की मांग की है।

Ankita Bhandari case continues controversy VIP police become more active what ADG Law and Order say

इस बीच उत्तराखंड पुलिस ने भी पूरे प्रकरण को लेकर अपनी बात रखी है। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. वी मुरुगेशन ने बयान जारी कर अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे भ्रामक और तथ्यहीन विवादों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व संवेदनशील घटना थी, जिसकी जानकारी सरकार को प्राप्त होते ही तत्काल प्रभावी कार्रवाई की गई थी।

बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा तत्काल एक वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। घटना में संलिप्त सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि प्रभावी पैरवी के माध्यम से अभियुक्तों को किसी भी स्तर पर जमानत न मिल सके। विवेचना एवं ट्रायल की प्रक्रिया के दौरान यह प्रकरण उत्तराखंड हाईकोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत हुआ था, जहां सीबीआई जांच कराए जाने संबंधी याचिका दायर की गई थी।

हाईकोर्ट ने एसआईटी जांच को निष्पक्ष, पारदर्शी व विधिसम्मत मानते हुए सीबीआई जांच की आवश्यकता से इनकार किया गया। साथ ही याचिका को खारिज कर दिया गया था। इसके पश्चात यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी प्रस्तुत किया गया, जहां सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी विवेचना की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त करते हुए सीबीआई जांच की याचिका को निरस्त कर दिया गया। एसआईटी द्वारा की गई विस्तृत विवेचना के उपरांत निचली अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. वर्तमान में यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में इस प्रकरण से संबंधित कुछ ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं। इस संबंध में पुलिस द्वारा दो प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई हैं, जिनकी विवेचना प्रचलित है। विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधि सम्मत व प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी व्यक्ति के पास इस प्रकरण से संबंधित कोई तथ्य, साक्ष्य या महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध थी, तो उसे विवेचना के दौरान एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता था।

यही एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य भी है। उस समय भी पुलिस द्वारा सार्वजनिक रूप से अपील की गई थी कि यदि किसी के पास इस प्रकरण से संबंधित कोई भी जानकारी, तथ्य अथवा साक्ष्य उपलब्ध हों, तो वे जांच एजेंसियों के साथ साझा करें।

उन्होंने अपील करते हुए कहा कि वर्तमान में दर्ज प्रकरणों की विवेचना जारी है और यदि किसी भी व्यक्ति के पास इस संबंध में कोई प्रामाणिक जानकारी या साक्ष्य उपलब्ध हों, तो वे जांच एजेंसियों को उपलब्ध करा सकते हैं। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर मुरुगेशन ने कहा कि यह प्रकरण अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा है कि इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी व पूर्ण जांच सुनिश्चित की जाए। सरकार और पुलिस प्रशासन इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतेंगे और कानून के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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