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14 साल के ज्योतिरादित्य खन्‍ना ने जाते-जाते बचाई सेना के एक जवान समेत छह लोगों की जिंदगी

14 साल के ज्योतिरादित्य खन्‍ना ने जाते-जाते बचाई सेना के एक जवान समेत छह लोगों की जिंदगी

Haridwar 14 year old jyotiraditya khanna saved 6 lives: शरीर का एक-एक अंग इंसान के लिए बेहद अहम हैं, अगर एक में भी खराबी आ जाए तो जिंदगी मुश्किल में पड़ जाती है। ऐसे मरीजों के लिए अंग डोनेट करने वाला किसी भगवान से कम नहीं है। उत्‍तराखंड का 14 साल का ज्‍योतिरादित्‍य खन्‍ना सेना के एक जवान समेत छह लोगों के लिए वो ही अंग दान कर उनकी जिंदगी बचाने वाला भगवान दुनिया से जाते ही बन गया।

ज्योतिरादित्य खन्ना घर की तीसरी मंजिल से गिर कर आई थी चोट

ज्योतिरादित्य खन्ना घर की तीसरी मंजिल से गिर कर आई थी चोट

ये ज्योतिरादित्य खन्ना हरि की नगरी हरिद्दार में रहता था, जिसकी अपने घर की तीसरी मंजिल से गिर गया जिसके कारण उसके दिमाग और सीने में गंभीर चोटें आईं। घायल अस्‍पताल में उसे अस्‍पताल में भर्ती किया गया जिसके बाद डॉक्‍टरों की टीम ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

सेना के जवान समेत छह लोगों को दान किए ज्‍योतिरादित्‍य के अंग

सेना के जवान समेत छह लोगों को दान किए ज्‍योतिरादित्‍य के अंग

ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद ज्‍यातिरादित्य के पिता ने उसके अंग डोनेट करने का उसका फैसला डॉक्‍टर को सुनाया जिसके बाद सेना का एक जवान एक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसके कारण उसका दिल रक्त को ठीक से पंप करने में सक्षम नहीं था जो उसके दिल दिना किया गया। अब बच्‍चे का दिल इस जवान के शरीर में धड़केगा। वहीं अन्‍य 5 बीमार लोगों की जिंदगी बचाने के लिए उसके किडनी, आंख समेत अन्‍य अंग दान किए गए।

 अपने अंग दान करना चाहता था ज्योतिरादित्य

अपने अंग दान करना चाहता था ज्योतिरादित्य

ज्योतिरादित्य खन्ना के पिता विवेक खन्‍ना जो किए निजी कंपनी में काम करते हैं उन्‍होंने बताया कि उनका बेटा हमेशा से अंग दान करना चा‍हता था , चूंकि वह अभी नाबालिग था, इसलिए वह दान की अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए 18 साल का होने का इंतजार कर रहा था। हमें कभी नहीं लगा कि उसकी इच्छा हमारे द्वारा उसके इतनी कम उम्र में उसके छोड़कर जाने पर पूरी की जाएगी।

ज्योतिरादित्य भर गया लोगों की जिंदगी में उजाला

ज्योतिरादित्य भर गया लोगों की जिंदगी में उजाला

ज्योतिरादित्य 15 नवंबर को छत से नीचे गिर कर घायल हो गया था। उन्हें हरिद्वार के मेट्रो अस्पताल ले जाया गया था। बाद में बुधवार सुबह दिल्ली ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की और उन्‍हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने लड़के के माता-पिता को उसके अंग दान करने की सलाह दी और वे आखिरकार मान गए। तीन अस्पतालों में अंगों को पहुंचाने के लिए तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए थे। लड़के की आंखें दिल्‍ली के श्रॉफ आई हॉस्पिटल भेजी गई जहां वो आंखे एक दृष्टिहीन शख्‍स को लगाई जाएगी जिसके बाद इस बच्‍चे के कारण उसकी जिंदगी में उजाला आ जाएगा।

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