राहुल गांधी के बयान के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने कह दी बड़ी बात, बताया- भाजपाई हिंदू क्यों नहीं हो सकते?
संसद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी के भाषण को भाजपा और कांग्रेस आमने सामने आ चुके हैं। भाजपा जहां राहुल गांधी के हिंदू धर्म को लेकर कही गई बात पर माफी मांगने की बात कह रही है, तो वहीं कांग्रेस राहुल गांधी का बयान करने में जुटी है।
इस बीच पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी है। हरीश रावत ने कहा कि राहुल गांधी ने विपक्ष के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगियों को ढोंगी कहकर चारों खाने चित कर दिया।

कहा कि विवेकानंद जी द्वारा शिकागो में उद्घोषित सिद्धांत के सनातन या हिंदू वही है जो उदार है, जो सहिष्णु है, जो अहिंसा में विश्वास करता है, जो वसुधैव कुटुंबकम की भावना से सोचता है और काम करता है। हरीश रावत का कहना है कि सत्यता यह है कि भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार पिछले 10 सालों में विवेकानंद जी द्वारा उद्घोषित हिंदू की व्याख्या के विरूद्ध आचरण करते रहे हैं और काम करते रहे हैं। ऐसी सोच वाले भाजपाई हिंदू हो ही नहीं सकते हैं, यह सत्य है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने बयान जारी करते हुए कहा कि संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए लोकसभा में इंडिया गठबंधन के नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की कलई खोलने का काम किया वो काबिले तारीफ है।
राहुल ने भाजपा को हिंदुत्व का मतलब समझाने का काम, उसको सामने लाने का काम किया, राहुल जी के सम्बोधन में पूरे देश तथा पूरी दुनिया के अंदर प्रशंसा की गई, माहरा ने बताया कि हिंदू होने का मतलब निर्भीक निडर होना है, साहसी होना है, अहिंसक होना है, प्रेमपूर्ण होना है, सत्य पर विश्वास करना है, अच्छाई के साथ और अन्याय के खिलाफ खड़ा होना है। लेकिन भाजपा केवल नफरत और हिंसा फैलाती है। भाजपा लोगों को डराती है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी जनविरोधी हैं।
माहरा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अब घबरा गई है क्योंकि राहुल गांधी ने संसद में उन्हें बेनकाब कर दिया है। फर्जी खबरों और ऐडिट किए गए वीडियो का सहारा लेने से अब मदद नहीं मिलेगी, भाजपा और उसके नेता सोचते हैं कि वे हिंदू धर्म के ठेकेदार हैं, लेकिन उन्होंने हमारे धर्म का दुरुपयोग किया है और इसके नाम पर हिंसा और नफरत भड़काने की कोशिश की है। हिंदू धर्म ने कभी भी किसी भी प्रकार की आक्रामकता का सहारा नहीं लिया है, यह नफरत और हिंसा का उपदेश नहीं देता है, यह समावेशी है, यह प्रेमपूर्ण है, यह साहस का प्रतीक है।












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