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कन्फ्यूजन होगा दूर, आदि कैलाश और कैलाश मानसरोवर यात्रा, क्या ​है दोनों यात्राओं में अंतर, कब और कैसे करें

Adi Kailash, Kailash Mansarovar Yatra उत्तराखंड से होने वाली दो यात्राओं छोटा कैलाश (आदि कैलाश) और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पंजीकरण शुरू हो गए हैं। पहले आपको बता दें कि दोनों यात्राएं अलग हैं। आदि कैलाश को छोटा कैलाश भी कहा जाता है। आदि कैलाश पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील में स्थित हैं।

कैलाश मानसरोवर तिब्बत में पड़ता है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को वीजा की आवश्यकता पड़ती है। यात्रा के लिए भारत से दो रूट हैं। जिसमें से एक रूट उत्तराखंड के लिपुलेख के रास्ते, जबकि दूसरा रूट सिक्किम के नाथुला पास से होकर गुजरता है।

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छोटा कैलाश धाम-मान्यता है कि भगवान शिव व माता पार्वती इस स्थान में निवास करते हैं और उन्हें ये स्थान काफी प्रिय है। छोटा कैलाश कैलाश पर्वत की प्रतिकृति भी है। दोनों पर्वत देखने में एक जैसे लगते हैं। कैलाश और आदि कैलाश पंच कैलाश का हिस्सा हैं। जो भगवान आशुतोष को समर्पित हैं। छोटा कैलाश जाने के लिए श्रद्धालुओं को किसी वीजा की जरूरत नहीं पड़ती है और श्रद्धालु आसानी से यहां पहुंच सकते हैं।

आदि कैलाश यात्रा के लिए जिला प्रशासन पिथौरागढ़ द्वारा इनरलाइन पास जारी किया जा रहा है, जो आसानी से मिल जाता है। इनरलाइन पास के लिए श्रद्धालुओं को पहले आवेदन करना होता है। मई से आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा शुरू होने वाली है। पार्वती सरोवर स्थित शिव मंदिर में कपाट दो मई को खुलेंगे।

28 अप्रैल से श्रद्धालु इनर लाइन परमिट के लिए वेबसाइट पर अप्लाई कर सकेंगे और 30 अप्रैल से इनर लाइन पास जारी हो जाएंगे। यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट 30 अप्रैल से धारचूला में मिलेगा। यात्रा दो चरणों में होगी। श्रद्धालु गुंजी, नपालचू और कुटी गांवों में रुकेंगे। यात्रा दो बार में होगी। पहली बार 30 अप्रैल से 30 जून तक और फिर मानसून के बाद 15 सितंबर से 15 नवंबर तक यात्रा चलेगी।

12 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदि कैलाश के दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। पौराणिक मान्यता के अनुसार आदि कैलाश में भगवान शिव का निवास है। आदि कैलाश के समीप पार्वती सरोवर को माता पार्वती का स्नान स्थल माना जाता है। जो श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए नहीं जा पाते वो आदि कैलाश का दर्शन कर भगवान आशुतोष का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा -मान्यता है कि कैलाश मानसरोवर में भगवान शिव स्वयंभू रूप में हैं, जो तमाम रहस्यों से भरा माना जाता है। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। भगवान शिव के कैलाश धाम को मोक्ष का द्वार भी कहा जाता है. इसलिए हिंदू व जैन धर्म के लोगों के लिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा अहम महत्व रखती है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को वीजा की आवश्यकता पड़ती है। कैलाश मानसरोवर तिब्बत में पड़ता है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत से दो रूट हैं। जिसमें से एक रूट उत्तराखंड के लिपुलेख के रास्ते, जबकि दूसरा रूट सिक्किम के नाथुला पास से होकर गुजरता है।

इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा 30 जून से शुरू होने जा रही है। करीब 5 साल बाद कैलाश मानसरोवर की यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख पास मार्ग से आयोजित होगी। कोरोना के कारण साल 2020 से कैलाश मानसरोवर यात्रा बंद थी। इस बार करीब 250 श्रद्धालुओं को ही यात्रा पर जाने की अनुमति मिली है। विदेश मंत्रालय कैलाश यात्रा का आयोजन प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के दौरान दो अलग-अलग मार्गों - लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड), और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) के माध्यम से करता है।

  • कुल बैचों की संख्या: 5
  • अवधि: लगभग 22 दिन
  • अनुमानित लागत प्रति व्यक्ति: रु .1.74 लाख
  • https://kmy.gov.in/ पर पूरी जानकारी ले सकते हैं
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