2024 चुनाव से पहले खास होगा योगी सरकार का 2023-24 का बजट, सभी विभागों को क्यों मिली ये हिदायत
लखनऊ, 03 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश सरकार ने 2023-2024 के वार्षिक बजट की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने सभी विभागों को 30 नवंबर तक अपने प्रस्ताव राज्य वित्त विभाग को सौंपने को कहा है, जिसे अगले बजट में शामिल किया जाएगा। साथ ही सरकार ने सभी विभागों को यह भी हिदायत दी है कि वो अपने खर्चों में कटौती करने का उपाय खोजने की कोशिश करें जिससे सराकर को सभी को पर्याप्त बजट देने में मदद मिले। दरअसल बजट के जानकारों की माने तो अगले बजट में आम चुनाव की छाया दिखेगी क्योंकि सरकार कई लोक लुभावन योजनाओं की घेाषणाएं कर सकती है।

सभी विभागों को पत्र भेजकर मांगा गया प्रस्ताव
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, "बेकार व्यय की जाँच की जानी चाहिए और अनुत्पादक व्यय को कम से कम किया जाना चाहिए। इस संबंध में मितव्ययिता उपायों के लिए राज्य सरकार के आदेशों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त की तरफ से 30 सितंबर को एक सर्कुलर सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों को भेजा गया है।''
2024 के लिहाज से अहम होगा अगले साल का बजट
चूंकि सभी की निगाहें 2023-2024 के वार्षिक बजट पर टिकी होंगी क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को चुनाव से पहले खर्च में कटौती और लोकलुभावन योजनाओं को शामिल करने के बीच संतुलन बनाना होगा। वार्षिक बजट में राज्य को ट्रिलियन-डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के उद्देश्य को प्राप्त करने में मदद करने के उपायों को शामिल करने की संभावना है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर यशवीर त्यागी ने कहा कि,
"2024 में होने वाले आम चुनाव के लिहाज से राज्य सरकार के वर्ष 2023-24 के आगामी बजट पर सबकी निगाहें होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी को भारत के मॉडल राज्य के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहे हैं, खासकर विकास के क्षेत्र में। उम्मीद है कि बजट के समय तक राज्य सरकार को भी वर्ष 2027 तक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए रोड मैप तैयार करने का लाभ होगा। बजट इस उद्देश्य को प्रमुख स्थान देने की संभावना है। यह कल्याण के साथ विकास पर और जोर देगा।"
विभागों को अपने खर्चें में कटौती का निर्देश
वित्त विभाग की ओर से जारी सर्कुलर में वितरण प्रणाली और पर्यवेक्षण पर होने वाले खर्च की समीक्षा का भी सुझाव दिया गया है। विभागों को संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति के बजाय संविदा के आधार पर काम कराने को कहा गया है। विभागों को नई निर्माण परियोजनाओं का प्रस्ताव तभी देने को कहा गया है जब मौजूदा परियोजनाओं के लिए उचित आवंटन किया गया हो।
नए तरह के व्यय से बचने की हिदायत
नए वाहन खरीदने को लेकर हिदायत दी गई है कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव को सीधे शामिल न करें और जहां भी आवश्यक हो राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के साथ अनुबंध के आधार पर वाहनों की व्यवस्था करने की कोशिश करें। यदि बजट में नए वाहन खरीदने के लिए कोई प्रस्ताव शामिल किया जाता है, तो इसे पूंजीगत व्यय शीर्ष के तहत शामिल किया जाएगा।












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