'जाति, पंथ से परे है योगी सरकार का एक्शन', 'माफिया राज' पर कार्रवाई को लेकर यूपी पुलिस

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार पर हाल में माफियाओं पर एक्शन और मुठभेड़ पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे यूपी पुलिन एक बयान के जरिए यूपी सरकार और प्रशासन के एक्शन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

Yogi government action over Mafia

गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या और इससे पहले अतीक के बेटे के एनकाउंटर के बदा यूपी पुलिस की माफिया राज पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा पिछले पांच वर्षों के भीतर किए गए एनकाउंटर की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। ऐसे में यूपी पुलिस ने एक बयान जारी किया है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यूपी में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले अपराधियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाती है और इस कार्रवाई में किसी भी तरह से जाति, पंथ या फिर धार्मिक भेदभाव का स्थान नहीं दिया जाता है।

उत्तर प्रदेश में विभिन्न जातियों और समुदायों से संबंधित कई माफिया और गैंगस्टर हैं जो अभी भी उत्तर प्रदेश पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल हैं और योगी आदित्यनाथ सरकार कोई भी नहीं छोड़ रही है। पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में यूपी पुलिस के अनुसार, हत्या, बलात्कार, जबरन वसूली और लोगों की जमीनों पर कब्जा करने जैसे गंभीर अपराधों में शामिल माफियाओं और अपराधियों के नाम शामिल हैं।

यूपी पुलिस ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार हर खूंखार अपराधी और गैंगस्टर को निशाना बना रही है, जो खुद को अंडरवर्ल्ड का बेताज बादशाह मानता है, न कि एक विशेष समुदाय से संबंधित कुछ चुनिंदा लोगों को, जैसा कि कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था। 2017 में पहली बार और राज्य में कानून के शासन को बहाल करने के लिए इसे अभियान के तौर पर शुरू किया गया। जिसके तहत योगी सरकार ने राज्य में सभी प्रकार के माफियाओं और गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जो जबरन वसूली, हत्या, बलात्कार, डकैती और अवैध कब्जा जैसे जघन्य अपराध मे संलिप्त हैं।

आज ऐसे सभी अपराधी, चाहे वे किसी भी जाति और समुदाय से आते हों, राज्य सरकार और अपराध के प्रति इसकी शून्य-सहिष्णुता की नीति से डरे हुए हैं। संपत्ति कुर्क करने के मकसद से प्रशासन ने ऐसे माफियाओं की सूची पहले ही तैयार कर ली है। हालांकि अभी सूची को सीएम योगी आदित्यनाथ से मंजूरी मिलनी बाकी है।

जोनवार माफियाओं की सूची
मेरठ जोन : ऊधम सिंह, योगेश भदौरा, बदन सिंह उर्फ ​​बद्दो, हाजी याकूब कुरैशी, शारिक, सुनील राठी, धर्मेंद्र, यशपाल तोमर, अमर पाल उर्फ ​​कालू, अनुज बरखा, विक्रांत उर्फ ​​विक्की, हाजी इकबाल उर्फ ​​बाला, विनोद शर्मा, सुनील उर्फ मूंछें, संजीव माहेश्वरी उर्फ ​​जीवा और विनय त्यागी उर्फ ​​टिंकू के अलावा अनिल चौधरी व ऋषि कुमार शर्मा (आगरा अंचल), एजाज (बरेली अंचल), अनुपम दुबे (कानपुर अंचल)।

लखनऊ जोन : खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ ​​अजय सिपाही, संजय सिंह सिंघला, अतुल वर्मा, मु. सहीम उर्फ ​​कासिम, प्रयागराज जोन के डब्बू सिंह उर्फ ​​प्रदीप सिंह, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह और अनूप सिंह।

वाराणसी जोन : मुख्तार अंसारी, त्रिभुवन सिंह उर्फ ​​पवन सिंह, विजय मिश्रा, ध्रुव सिंह उर्फ ​​कुंटू सिंह, अखंड प्रताप सिंह व रमेश सिंह उर्फ ​​काका।

गोरखपुर जोन : संजीव द्विवेदी उर्फ ​​रामू द्विवेदी, राकेश यादव, सुधीर कुमार सिंह, विनोद कुमार उपाध्याय, राजन तिवारी, रिजवान जहीर और देवेंद्र सिंह।

गौतम बुद्ध नगर आयुक्तालय: सुंदर भाटी, सिंहराज भाटी, अमित कसाना, अनिल भाटी, रणदीप भाटी, मनोज उर्फ ​​आस और अनिल दुजाना।

कानपुर आयुक्तालय: सऊद अख्तर।

लखनऊ कमिश्नरेट: लल्लू यादव, बच्चू यादव और जुगनू वालिया उर्फ ​​हरिवंदर सिंह।

प्रयागराज कमिश्नरेट: बच्चा पासी उर्फ ​​निहाल पासी, दिलीप मिश्रा, जावेद उर्फ ​​पप्पू, राजेश यादव, गणेश यादव, कमरुल हसन, जाविर हुसैन और मुजफ्फर।

वाराणसी आयुक्तालय: अभिषेक सिंह हनी उर्फ ​​जहर, बृजेश कुमार सिंह और सुभाष सिंह ठाकुर।

माफियाओं पर STF का एक्शन
सूचीबद्ध माफियाओं की गतिविधियों पर एसटीएफ और जिला पुलिस की पैनी नजर है। सरकार द्वारा पूर्व में स्वीकृत 25 सूचीबद्ध माफियाओं में मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह उर्फ ​​पवन सिंह, संजीव माहेश्वरी उर्फ ​​जीवा, ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ ​​बबलू, सुशील उर्फ ​​मूच, सीरियल किलर सलीम, रुस्तम और सोहराब शामिल हैं।

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