यूपी चुनाव में इस बार भी बुंदेलखंड में क्लीन स्वीप कर पाएगी बीजेपी ?
लखनऊ, 29 नवम्बर: बुंदेलखंड के महोबा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास रिश्ते हैं। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले, उन्होंने अक्टूबर 2016 में एक 'परिवर्तन रैली' की थी। यहां से भाजपा के 'मिशन बुंदेलखंड' की शुरुआत की। यह पहली बार था जब कोई प्रधानमंत्री इस क्षेत्र के बेहद पिछड़े जिले महोबा का दौरा कर रहा था। रणनीति ने जाहिर तौर पर काम किया और 2017 में भाजपा ने बुंदेलखंड की सभी 19 सीटों पर जीत हासिल की। राज्य में चुनाव को लेकर खासा उत्साह है। कांग्रेस जहां प्रियंका गांधी की मदद से खुद को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी फिर से सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है। वहीं बीजेपी सत्ता बचाने के लिए मैदान में है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने वेस्ट यूपी और बुंदेलखंड में सभी पार्टियों का सफाया कर दिया है।

यूपी में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने के बाद समाजवादी पार्टी और बसपा (बहुजन समाज पार्टी) जैसे क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने बुंदेलखंड में बीजेपी को करारी शिकस्त दी थी। लेकिन पार्टी ने 2014 में जोरदार वापसी की। तब से, उसने दो लोकसभा चुनाव (2014 और 2019) और एक विधानसभा चुनाव (2017) में जीत हासिल की है। बुंदेलखंड में गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों की एक बड़ी आबादी है, जिन्होंने इन चुनावों में भाजपा को वोट दिया था। बुंदेलखंड में दलितों की आबादी लगभग 30% और मुसलमानों की 7% आबादी है।
योगी सरकार चला रही कई परियोजनाएं
बुंदेलखंड में योगी सरकार की तरफ से कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इसको लेकर सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बुंदेलखंड में पिछले चार सालों में एक्सप्रेस वे, हर घर नल योजना, डिफेंस कॉरिडोर जैसे कई कार्यक्रम सरकार की तरफ से चलाए गए। इस दौरान बुंदेलखंड में योगी सरकार की कई योजनाएं चलाई गईं। इसके अलावा सरकार ने ललितपुर में मेडिकल कॉलेज का शुभारंभ किया है। पिछले पांच सालों में बीजेपी की कोशिश यही रही है कि बुंदेलखंड के लोगों में इस बात का विश्वास जगाया जाए कि डबल इंजन की सरकार ने लोगों के हितों के लिए बहुत काम किया है।

30 सालों में कांग्रेस कभी नहीं जीत पाई
लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लगातार बुंदेलखंड का दौरा कर रही हैं. हाल ही में प्रियंका ने इस क्षेत्र के कई किसान परिवारों से मुलाकात की थी। पार्टी इस क्षेत्र में प्रियंका गांधी के समर्थन से अपनी वापसी का इंतजार कर रही है. चित्रकूट बुंदेलखंड का सबसे महत्वपूर्ण जिला है। चित्रकूट जिले की बात करें तो यहां की दोनों विधानसभा सीटों पर 1989 के बाद से कांग्रेस पार्टी का खाता भी नहीं खुला है। पश्चिम, जहां किसानों के आंदोलन से भाजपा की समस्याएं खड़ी हो गई हैं। इसलिए पार्टी ने अब अपना ध्यान बुंदेलखंड की ओर लगाया है। बीजेपी का गढ़ बन चुके बुंदेलखंड में किसी भी पार्टी का खड़ा होना असंभव सा लग रहा है।
पिछले दो चुनावों से बीजेपी का अभेद्य किला बना बुंदेलखंड
स्थानीय नेताओं का मानना है कि बोफोर्स कांड, मंडल आयोग और राम मंदिर आंदोलन केंद्र जैसे मुद्दों के कारण कांग्रेस पार्टी के जिले से बाहर हो गई। कभी कांग्रेस पार्टी का गढ़ रहा बुंदेलखंड आज बीजेपी का अभेद्य गढ़ बन गया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भगवा ने बुंदेलखंड की सभी 19 सीटों पर परचम लहराया था। 2017 में बीजेपी ने बुंदेलखंड में अपनी राजनीतिक जड़ें इस कदर मजबूत कीं कि 2019 में सपा और बसपा गठबंधन भी इसे हिला नहीं पाए। राज्य में बीजेपी की सत्ता में वापसी में बुंदेलखंड की भूमिका बेहद अहम थी।

बुंदेलखंड पर है विपक्षी दलों की नजर
विपक्षी दलों की नजर बीजेपी के इस गढ़ पर है। इसे देखते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पिछले सप्ताह महिला मतदाताओं की मदद के लिए बुंदेलखंड के चित्रकूट में उतरी थीं। इस दौरान प्रियंका महिलाओं से बातचीत करने के साथ ही मंदिर में माथा टेककर कांग्रेस को बुंदेलखंड में वापस लाने की कोशिश करती नजर आईं. वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मिशन-2022 के लिए पहले चरण की रथ यात्रा में बुंदेलखंड क्षेत्र का दौरा कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की थी।












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