Acharya Satyendra Das कौन थे? टेंट में करते थे रामलला की पूजा, क्यों लेकर भागे थे भगवान की मूर्ती?
Who Was Acharya Satyendra Das: आचार्य सत्येंद्र दास जो कि अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी थे। बुधवार को संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) लखनऊ में उन्होंने अंतिम सांस ली। बहुत कम लोग जानते होंगे कि उनका राम मंदिर से पुराना नाता रहा है।
85 वर्षीय आचार्य सत्येंद्र दास लगभग 20 साल की उम्र से ही राम मंदिर की पूजा अर्चना कर रहे हैं। जब साल 1992 में बाबरी मस्जिद विवाद हुआ था तो उन्होंने भगवान रामलला की छोटी सी मुर्ती की सेवा की थी। पिछले महीने 11 जनवरी को आचार्य सत्येंद्र दास को अयोध्या मंदिर में प्रण प्रतिष्ठा समारोह की पहली वर्षगांठ मनाते हुए देखा गया था।

कौन थे आचार्य सत्येंद्र दास?
कहा जाता है कि आचार्य सत्येंद्र दास का बचपन से भगवान की तरफ मोह बहुत ज्यादा था। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही ये फैसला कर लिया कि संन्यास लेकर भगवान के चरणों में खुद को समर्पित करना है। उनके इस फैसले से माता-पिता भी बहुत खुश थे।
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राम मंदिर को लेकर हुए विवाद में उनका गहरा नाता रहा है। जब बड़े संगठनों ने बाबरी मस्जिद मामले हुए विवाद को लेकर मोर्चा खोला था तो आचार्य सत्येंद्र दास ही थे जिन्होंने रामलाल मुर्ती की रक्षा की थी। कहा जाता है कि बाबरी विध्वंस के दिन वह राम लला को गोद में लेकर भागे थे तब से वह उनकी पूरे मन से सेवा कर रहे हैं।
पढ़े-लिखे थे आचार्य सत्येंद्र दास
आचार्य सत्येंद्र दास का जन्म 1945 उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर में हुआ था। भले ही उनका भगवान की तरफ ज्यादा रहा हो लेकिन वह पढ़ाई में भी काफी आगे थे। उन्होंने संस्कृत विद्यालय से 1975 में आचार्य की डिग्री ली थी। इसके बाद उन्होंने अयोध्या में संस्कृत महाविद्यालय की नौकरी की। इसके बाद वह पुजारी बन गए और फिर हमेशा के लिए खुद को रामलला की सेवा के समर्पित कर दिया। लेकिन वह इस दुनिया में नहीं रहे और ब्रेन हैमरेज की वजह से निधन हो गया।
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