Nuria Ansari कौन है? जो जहूराबाद सीट से OP राजभर को देंगी चुनावी टक्कर! किस पार्टी से मिलेगा टिकट?
Who Is Nuria Ansari: पूर्वांचल की सियासत में एक नया नाम उभर रहा है-नूरिया अंसारी। गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट पर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के दिग्गज नेता और वर्तमान विधायक ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ समाजवादी पार्टी (SP) से नूरिया अंसारी के उतरने की अटकलें तेज हैं।
गाजीपुर के सांसद और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अफजाल अंसारी की बेटी नूरिया का एक पुराना वीडियो वायरल होने के बाद ये चर्चा जोर पकड़ रही है। लेकिन क्या वाकई नूरिया अंसारी जहूराबाद से राजभर के खिलाफ मैदान में उतरेंगी? क्या है उनका मुख्तार अंसारी से कनेक्शन, और क्या कहते हैं सियासी समीकरण? आइए, इसे विस्तार से समझते हैं..

Who Is Nuria Ansari: कौन हैं नूरिया अंसारी?
नूरिया अंसारी गाजीपुर के मशहूर और प्रभावशाली अंसारी परिवार की बेटी हैं। उनके पिता अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) समाजवादी पार्टी के सांसद हैं और पूर्वांचल की सियासत में बड़ा नाम रखते हैं। उनके चाचा मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari), जो एक गैंगस्टर से राजनेता बने और मऊ से पांच बार विधायक रहे, हाल ही में 28 मार्च 2024 को जेल में उनकी मृत्यु के बाद चर्चा में रहे। नूरिया की मां का नाम साफिया अंसारी है, और उनके बड़े भाई अब्बास अंसारी मऊ सदर से समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक हैं।
नूरिया पेशे से चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट हैं और उन्होंने दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया से अपनी पढ़ाई पूरी की। जनवरी 2024 में उनकी शादी हुई, जिसमें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई बड़े सियासी चेहरों ने शिरकत की। इस शादी ने नूरिया को सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में नूरिया ने अपने पिता अफजाल अंसारी के लिए गाजीपुर में प्रचार किया, जहां उन्होंने बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दों को उठाकर लोगों का ध्यान खींचा। उनकी बहन नुसरत अंसारी ने भी 2024 में लोकसभा चुनाव में नामांकन दाखिल किया था, जिससे अंसारी परिवार की महिलाओं की सियासी सक्रियता का संकेत मिला।
जहूराबाद सीट: राजभर बनाम अंसारी?
गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट (Zahoorabad Assembly Seat) पूर्वांचल की सियासत का अहम केंद्र है। ये सीट बलिया लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और यहां राजभर, मुस्लिम, यादव, क्षत्रिय और चौहान समुदाय के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2017 और 2022 में इस सीट पर ओम प्रकाश राजभर (SBSP) ने जीत हासिल की। 2017 में वो BJP के सहयोगी थे, लेकिन 2022 में SP के साथ गठबंधन में जीते। 2023 में राजभर ने SP का साथ छोड़कर फिर से NDA (BJP) का दामन थाम लिया और वर्तमान में योगी सरकार में उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री हैं।
मुख्तार अंसारी से कनेक्शन
मुख्तार अंसारी, जो कभी पूर्वांचल के 'बाहुबली' कहे जाते थे, नूरिया के चाचा थे। उनका परिवार स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा रहा है-उनके दादा मुख्तार अहमद अंसारी 1927 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष और मुस्लिम लीग के नेता थे। मुख्तार ने 1996 से 2017 तक मऊ सदर से पांच बार विधायक का चुनाव जीता, दो बार BSP के टिकट पर। हालांकि, उनके आपराधिक रिकॉर्ड (65 से ज्यादा केस) ने उन्हें विवादास्पद बना दिया। उनकी मृत्यु के बाद अखिलेश यादव ने उनके परिवार से मुलाकात की और उनकी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए।
नूरिया और उनकी बहन नुसरत को अफजाल ने 2024 में अपनी सियासी वारिस घोषित किया था। अब्बास अंसारी पहले से ही मऊ से विधायक हैं, और अब नूरिया के सियासत में कदम रखने की अटकलों ने अंसारी परिवार की सियासी ताकत को और बढ़ा दिया है।
क्या SP देगी नूरिया को टिकट?
सोशल मीडिया पर दावों के बावजूद, समाजवादी पार्टी या अंसारी परिवार की ओर से नूरिया के जहूराबाद से चुनाव लड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संभावना कम लगती है, क्योंकि अफजाल अंसारी ने कभी खुलकर ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) का विरोध नहीं किया। 2022 में SP-SBSP गठबंधन के तहत ही अब्बास अंसारी को मऊ से टिकट मिला था।
हालांकि, राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर SP नेतृत्व चाहेगा, तो अफजाल अपनी बेटी नूरिया को राजभर के खिलाफ खड़ा कर सकते हैं। ये खासकर इसलिए संभव है, क्योंकि राजभर का NDA में लौटना SP के लिए 'विश्वासघात' माना गया। SP प्रवक्ता सुनील सिंह यादव ने कहा, 'राजभर पहले OBC और दलितों के हक की बात करते थे, लेकिन अब BJP के साथ हैं, जो आरक्षण विरोधी है। जनता इस विश्वासघात को देख रही है।'
जातीय समीकरण: जहूराबाद का सियासी रण
जहूराबाद में राजभर समुदाय (लगभग 4% वोटर) का दबदबा है, लेकिन मुस्लिम (20%), यादव, क्षत्रिय, और चौहान मतदाता भी अहम हैं। 2022 में ओम प्रकाश राजभर ने 44,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी, जब SP-SBSP गठबंधन था। उनके खिलाफ BSP की शादाब फातिमा और BJP के कालीचरण राजभर थे। अगर नूरिया SP के टिकट पर उतरती हैं, तो मुस्लिम और यादव वोट SP को मजबूती दे सकते हैं, जबकि राजभर वोट BJP-SBSP गठबंधन के साथ जा सकते हैं।
मुख्तार अंसारी की मृत्यु के बाद गाजीपुर और मऊ में उनके परिवार के प्रति सहानुभूति भी एक फैक्टर हो सकता है। नूरिया की युवा छवि और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर उनकी अपील उन्हें मजबूत दावेदार बना सकती है।
नूरिया अंसारी का नाम अभी सिर्फ चर्चाओं में है, लेकिन अगर ये अटकलें सच हुईं, तो गाजीपुर की जहूराबाद सीट पर 2027 में एक जबरदस्त सियासी जंग देखने को मिल सकती है। अंसारी परिवार की नई पीढ़ी और राजभर की सियासी चतुराई के बीच ये मुकाबला पूर्वांचल की सियासत को नया रंग दे सकता है। गाजीपुर की जनता इंतजार में है-क्या नूरिया सियासत का नया सितारा बनेंगी, या ये सिर्फ एक अफवाह है? वक्त बताएगा!
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