एंटी इनकंबेंसी को काउंटर करने का BJP का प्लान, " परफॉर्म न करने वाले" विधायकों-मंत्रियों को नहीं मिलेगा टिकट ?
लखनऊ 23 सितंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एंटी इकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को काउंटर करने का प्लान तैयार कर लिया है। बीजेपी के सूत्रों की माने तो एंटी इंकबेंसी से निपटने के लिए संगठन 70 साल के उपर उन विधायकों का टिकट काटने की तैयारी में है जो एक तरह से 'यूजलेस' हो गए हैं। विधायकों के साथ उन मंत्रियों के टिकट पर भी तलवार लटक रही है जो संगठन और सरकार के पैरामीटर पर खरे नहीं उतरेंगे। दूसरी ओर योगी सरकार ने एंटीकंबेंसी से निपटने का अपना अलग फार्मूला तैयार किया है जिसके तहत वह उन सीटों पर पूरा जोर लगाएगी जहां अब तक वह कभी जीतने में सफल नहीं हुई है।

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने दावा करते हुए कहा कि बीजेपी पूरे यूपी में ऐसे विधायकों की लिस्ट बना रही है जो 70 साल के उपर हो चुके हैं और उनकी कोई प्रासंगिता अब पार्टी और सरकार के लिए नहीं रह गई है। वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, '' पूरे राज्य में 75 जिले हैं और हर जिले में एक या दो विधायक ऐसे हैं जिनकी उम्र ज्यादा हो गई है या ऐसे हैं जो अपने काम को सही तरीके से अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। साथ ही कई ऐसे विधायक भी हैं जिनके खिलाफ शिकायतें आ रही हैं और जनता में उनके खिलाफ आक्रोश भी है। इस तरह के विधायकों पर नजर तो पार्टी की हमेशा रहती ही है। ऐसे लोगों को दोबारा टिकट मिलने की संभावना न के बराबर है।''
भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी की माने तो यूपी में विधायकों के अलावा उन मंत्रियों के कामकाज पर भी नजर हैं जिनपर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी और संघ के स्तर पर कराए गए सर्वे रिपोर्ट में भी उनका कामकाज सही नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि,
'' यूपी में करीब एक दर्जन से ज्यादा मंत्री ऐसे हैं जिनके टिकट पर तलवार लटक रही है। उनका कामकाज सही नहीं है। सरकार बनते समय जातीय समीकरण के हिसाब से उनको सरकार में शामिल कर लिया गया लेकिन वो उस तरह परफार्म नहीं कर पाए जिस तरह से संगठन ने अपेक्षा की थी। भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं की लगातार शिकायतें उनके खिलाफ मिल रही हैं। खासतौर पर महामारी के दौरान तो शिकायतों की संख्या ज्यादा बढ़ गई थी। उनके खिलाफ भी कड़ा कदम उठाया जाएगा।''
हारी हुई सीटों पर बाजी पलटने का योगी का प्लान
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने हाल ही में अपने साढ़े चार साल का कार्यकाल पूरा किया है। कोरोना महामारी के बीच इन साढे़ चार वषों में सरकार की उन मुख्य योजनाओं का डॉटा तैयार कर रही है जिनको लेकर बीजेपी जनता के बीच जाएगी। योगी सरकार के साथ ही मोदी सरकार के काम को भी गिनाया जाएगा। साथ ही योगी ने एंटी इकंबेंसी से निपटने के लिए नया फार्मूला तैयार किया है। योगी ने कहा है कि उनके कार्यक्रम उन विधानसभाओं में लगाएं जाएं जहां बीजेपी कभी नहीं जीती। दरअसल इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि एंटी इकंबेंसी से होने वाले नुकसान से बचने के लिए उन सीटों पर जोर लगाया जाए जहां बीजेपी कभी नहीं जीती क्योंकि उन सीटों पर भी वर्तमान विधायकों के खिलाफ इसी तरह की एंटी इकंबेंसी का खतरा रहता है। यूपी में इस तरह की 60 सीटें हैं जहां पर बीजेपी आज तक चुनाव नहीं जीती है।

60 सीटों में 35 फीसदी सफल हुए तो सरकार को मिलेगा लाभ
भाजपा के रणनीतिकारों का माना है कि जिन 60 सीटों पर बीजेपी कभी नहीं जीती वहां पर संगठन ओर सरकार पूरी ताकत लगाएंगे और जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया जाएगा। इन हारी हुई सीटों में से यदि भाजपा को 20 से 25 सीटें भी मिल गईं तो उस नुकसान की भरपाई कुछ हद तक हो जाएगी जो एंटी इंकंबेंसी से होगी। योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम उन विधानसभा क्षेत्रों में लगाने की शुरुआत पार्टी की तरफ से कर दी गई है।
जहां होगी एंटी इंकंबेंसी वहां मोदी-योगी फैक्टर चलने का भरोसा
इसके साथ ही बीजेपी के पदाधिकारियों को यह भी लगता है कि विधायक और मंत्री के खिलाफ भले ही एंटी इंकंबेंसी उनके इलाके में हो लेकिन चुनाव के समय मतदाता मोदी-योगी के नाम पर ही मुहर लगाता है। इसलिए संगठन इस बात की प्लानिंग करने में जुटा है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में एंटी इंकंबेंसी हैं वहां मंत्रियों और विधायकों के बजाए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार की योजनाओं पर फोकस किया जाएगा और संगठन से जुड़े हर विंग को वहां घर घर प्रचार करने के लिए उतारा जाएगा।
काशी विद्यापीठ के राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर अनुराग शर्मा कहते हैं कि,
'' देखिए चुनाव चाहे लोकसभा को या विधानसभा का हो एंटी इंकंबेंसी तो होती ही है। इसका असर भी पड़ता है। जो सत्ता सरकार में रहती है उसके खिलाफ कुछ न कुछ मुद्दों को लेकर असंतोष रहता ही है। इस सरकार में भी वैसा ही है। सत्ता विरोधी लहर को काउंटर करने के लिए सरकार यदि 100 विधायकों के टिकट काट दे तो भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए। सच यही है कि बहुत सारे विधायक और मंत्री ऐसे हैं जिनको लेकर लोगों में नाराजगी है। अब सरकार कैसे निपटेगी ये देखना दिलचस्प होगा।''












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