यूपी 2022 चुनाव के जनादेश में पार्टियों की राजनीति में आया बड़ा बदलाव, भाजपा-सपा के बीच बसपा-कांग्रेस हाशिए पर
लखनऊ, 10 मार्च। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की मतगणना चल रही है और ताजा रुझानों में भाजपा की योगी सरकार दोबारा बनती नजर आ रही है। वहीं समाजवादी पार्टी पिछले चुनाव की अपेक्षा बेहतर स्थिति में है और वह सबसे बड़े विपक्षी दल के तौर पर दिख रही है। लेकिन कांग्रेस और बसपा का अस्तित्व यूपी की राजनीति में संकट में पड़ गया है। शाम पांच बजे तक के रुझानों में भाजपा 260 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। सपा करीब 130 से ज्यादा सीटों पर आगे है जबकि बसपा एक सीट और कांग्रेस दो सीट पर लीड कर रही है। इस बार यूपी चुनाव के परिणाम ने अब तक चल रही प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। इसमें मतदान करने वाली प्रदेश की जनता किस पार्टी की तरफ क्यों रुख कर रही है, इस बारे में भी चुनाव परिणाम बहुत कुछ बता रहा है। फिलहाल जो सबसे बड़ा बदलाव यूपी की राजनीति में आता दिख रहा है, वो यह है कि प्रदेश में सिर्फ दो पार्टियां बच गई हैं जिसके पास विधानसभा की ज्यादातर सीटें होंगी। भाजपा और सपा के बीच द्विध्रुवीय राजनीति ने प्रदेश में बसपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों को हाशिए पर धकेल दिया है जो कभी सत्ता में रही थी।

यूपी में अब बच गई है दो पार्टियों की राजनीति!
1991 के चुनाव में कमंडल राजनीति और राम लहर पर सवार होकर बहुमत पाने वाली भाजपा ने सरकार बना ली थी लेकिन बाद के चुनावों में दलित और मंडल की राजनीति की ताकत के सामने कमजोर पड़ गई थी। 1993 से लेकर 2002 तक के चुनावों यूपी में मुलायम की समाजवादी पार्टी, कांशीराम की बहुजन समाज पार्टी और अटल-आडवाणी की भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले में किसी पार्टी को कभी बहुमत का आंकड़ा नहीं मिल सका। इसका नतीजा यह हुआ कि प्रदेश में साल 1993-2002 तक तीन चुनाव हुए और इस बीच 8 बार मुख्यमंत्री बदले गए। यूपी चुनाव के जनादेश में बहुमत का आंकड़ा 2007 में बहुजन समाज पार्टी ने पार किया और मायावती मुख्यमंत्री बनीं। बहुत समय बाद किसी पार्टी की सरकार पांच साल तक चली। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को बहुमत मिला और अखिलेश सरकार ने भी अपने पांच साल पूरे किए। 2017 में यूपी में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत पाकर 300 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस तरह के कयास लगाए जा रहे थे कि पिछले तीन चुनावों में सत्ता परिवर्तन कर रही जनता इस बार भी भाजपा सरकार को बदल देगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। रुझानों में भाजपा फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है। लेकिन उसकी सीटें कम हुई हैं। अखिलेश की सपा पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा सीटों पर लीड लेकर भाजपा के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इन दोनों पार्टियों के मुकाबले कांग्रेस और बसपा कहीं नहीं है। तो यह कहा जा सकता है कि यूपी चुनाव 2022 के जनादेश ने यूपी की राजनीति को बहुध्रुवीय से हटाकर द्विध्रुवीय पर शिफ्ट कर दिया है।

भाजपा और सपा, दोनों का बढ़ा वोट प्रतिशत
2017 के चुनाव में भाजपा को करीब 40 प्रतिशत वोट मिले थे। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2022 के चुनाव में भाजपा को करीब 42 प्रतिशत मत मिले हैं जो पिछले चुनाव के मुकाबले दो प्रतिशत ज्यादा हैं लेकिन सीटें इस बार कम होने के आसार हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी को 2017 के चुनाव में करीब 22 प्रतिशत मत मिले थे जो 2022 के चुनाव में बढ़कर करीब 32 प्रतिशत हो गया है। सपा के वोट प्रतिशत में 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 2017 में बहुजन समाज पार्टी का वोट प्रतिशत सपा से थोड़ा सा ज्यादा था लेकिन 2022 चुनाव में बसपा का करीब 10 प्रतिशत वोट कम हो गया है। करीब 13 प्रतिशत वोट बसपा को मिले हैं लेकिन इससे सीटों का लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस को 2.4 प्रतिशत, रालोद को 3.2 प्रतिशत और अन्य दलों को करीब छह प्रतिशत वोट मिले हैं। तो कुल मिलाकर भाजपा और सपा का वोट प्रतिशत सबसे ज्यादा है और दोनों के सामने अन्य पार्टियां कहीं ठहर नहीं रही हैं। वैसे राजनीति में एक चुनाव परिणाम देखकर यह नहीं कहा जा सकता है कि बसपा और कांग्रेस का अस्तित्व यूपी में खत्म हो गया है लेकिन चुनाव के नतीजे यह जरूर इशारा कर रहे हैं कि दोनों पार्टियों के नेतृत्व को जनता ने नकार दिया है।

क्यों बना यूपी चुनाव दो पार्टियों को बीच का मुकाबला?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा से नाराज मतदाता विकल्प की तलाश में सपा की ओर गए। चुनाव में एक तरफ योगी सरकार कानून व्यवस्था, माफियाओं पर बुलडोजर चलाने, राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने समेत अपने किए कामों को गिना रही थी और सपा को परिवारवादी, माफियावादी बताकर अखिलेश पर हमला बोल रही थी। तो दूसरी तरफ बेरोजगारी, महंगाई, छुट्टा पशु, किसानों की समस्या अहम मुद्दे थे जिसको लेकर यह कहा जा रहा था कि भाजपा के खिलाफ भी मतदाता विकल्प के तौर पर सपा को वोट दे सकते हैं। भाजपा के हिंदुत्व वोटों के ध्रुवीकरण के मुकाबले मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण इस बार सपा की ओर होने की बात कही गई। सपा को हराने के लिए यूपी में भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रियों को भी चुनाव प्रचार में उतार दिया और डबल इंजन सरकार बनाने की अपील जनता से की। कांग्रेस को यूपी में आगे बढ़ाने के लिए प्रियंका गांधी ने लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा देते हुए चालीस प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया लेकिन यह दांव भी खाली गया। दूसरी तरफ, चुनाव के दौरान शांत रही मायावती की पार्टी बसपा को अपने वोट बैंक पर भरोसा था लेकिन वह भी खिसक गया। यूपी का चुनाव 2022 भाजपा बनाम सपा हो गया। इससे राजनीति के जानकार यह भी निष्कर्ष निकालते नजर आ रहे हैं कि अब जनता सत्ता और मजबूत विपक्ष का चुनाव कर रही है। यूपी की जनता त्रिशंकु विधानसभा नहीं चाहती और न ही अस्थिर सरकार चाहती है।












Click it and Unblock the Notifications