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UPRTOU News: महिलाओं के सशक्तिकरण की पहल, अब हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कर सकेगी फ्री डिप्लोमा

UPRTOU News: प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (UPRTOU) ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नई योजना की घोषणा की है। अब वे किसी भी अध्ययन केंद्र से बाल विकास और पोषण में निशुल्क डिप्लोमा कर सकेंगी। यह पहल उनके करियर और सामाजिक पहचान दोनों को मजबूती देगी।

कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि विश्वविद्यालय की मंशा प्रदेश की हर महिला तक उच्च शिक्षा पहुंचाने की है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शिक्षा का यह अवसर आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

UPRTOU News Empowering women

दीक्षांत समारोह में यह घोषणा करते हुए प्रो. सत्यकाम ने स्पष्ट किया कि शिक्षा ही महिलाओं को सशक्त बना सकती है। इस मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी मंच से महिलाओं की शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया।

शिक्षा का विस्तार ग्रामीण महिलाओं तक

विश्वविद्यालय ने हाल ही में माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के साथ समझौता किया है। इसके तहत इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्राओं का डाटा साझा किया जाएगा। इससे उन महिलाओं तक भी शिक्षा का संदेश पहुंचेगा जो उच्च अध्ययन के अवसर से दूर हैं।

इसके अलावा प्रशासन लगातार पंचायतों और इंटर कॉलेजों से जुड़कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इस कार्यक्रम से जोड़ रहा है। लक्ष्य है कि कोई भी महिला केवल जिम्मेदारियों में उलझकर शिक्षा से वंचित न रह जाए।

पूरी तरह निशुल्क है यह कार्यक्रम

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए तैयार किया गया यह कार्यक्रम पूरी तरह निशुल्क है। बाल विकास और पोषण पर आधारित यह डिप्लोमा उन्हें व्यावहारिक ज्ञान देगा और भविष्य में रोजगार और पदोन्नति की संभावनाएं भी बढ़ाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि महिला कर्मचारियों को विशेष प्रोत्साहन देने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। उम्मीद है कि बड़ी संख्या में महिलाएं इस अवसर का लाभ उठाएंगी।

बेटियां पढ़ेंगी, तभी वे सशक्त बनेंगी

कार्यक्रम में बोलते हुए कुलपति ने कहा कि जब बेटियां पढ़ेंगी, तभी वे सशक्त बन पाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में कई बुराइयां इसलिए कायम हैं क्योंकि महिलाओं को पर्याप्त शिक्षा नहीं मिल पाती।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बेटियों को केवल विवाह तक सीमित सोचकर न देखें। उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ही असली कर्तव्य है। पढ़ी-लिखी बेटियां हर चुनौती का सामना करने में सक्षम होती हैं।

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