UP Politics: चंद्रशेखर आजाद ने मायावती के ‘बरसाती मेंढक’ बयान पर किया करारा पलटवार, गरमाई राजनीति
UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में दलित वोटरों को लेकर सियासी पारा गर्म होता जा रहा है। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा अपने ऊपर लगाए गए आरोपों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने हाल ही में चंद्रशेखर को 'बरसाती मेंढक' कहकर निशाना बनाया था।
चंद्रशेखर ने कहा कि वे मायावती का सम्मान करते हैं, लेकिन जब गैरजिम्मेदाराना बातें सामने आती हैं, तो गुस्सा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि मायावती ने यह सब किस मजबूरी में कहा यह समझना होगा। यह राजनीतिक बयानबाजी की एक जटिल परत है जो दलित राजनीति में नए सियासी समीकरण बनाती दिख रही है।

सांसद ने रविवार को लखनऊ में आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने बसपा के आकाश आनंद के साथ हुए व्यवहार पर भी बात की थी। इसके बाद मायावती ने बिना नाम लिए चंद्रशेखर पर तंज कसा था, जो अब विवाद का केंद्र बना हुआ है।
सम्मान के साथ कड़वी आलोचना भी जरूरी
चंद्रशेखर ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि मायावती उनकी नेता हैं और उनका सम्मान हमेशा बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि 'बहन जी ने संघर्ष किया है, इसलिए उनका सम्मान करता हूं। लेकिन जो बातें उन्होंने कहीं, वे सोचनीय हैं। किस मजबूरी में यह सब कहा गया यह समझना जरूरी है।'
उन्होंने बताया कि आकाश आनंद बसपा में पहले भी थे और अब भी हैं, लेकिन पार्टी की प्रगति पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने कहा कि आकाश को लेकर बहन जी ने जो बातें कहीं, वे सही नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विवादों के बीच भी परिवार की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
चंद्रशेखर ने कहा कि आकाश आनंद को लेकर जो आरोप लगे, वे केवल राजनीतिक हथकंडे हैं। उन्होंने कहा कि अपने परिवार की मानता हूं, लेकिन राजनीतिक घमासान में ऐसी बातों का इस्तेमाल ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि यह घर का मामला है, इसलिए ज्यादा खुलकर इसमें नहीं जाना चाहते।
साथ ही चंद्रशेखर ने कहा कि उनकी पार्टी को अब दलित समाज का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि 2022 और 2024 में हमारी पार्टी ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीती, दूसरे स्थान पर लगभग 80 हजार वोट हासिल किए। इससे साफ है कि आजाद समाज पार्टी मजबूती हासिल कर रही है।
दलितों की असल समस्या और राजनीतिक सत्ता की मांग
चंद्रशेखर ने कहा कि पिछले 15 सालों में दलित, पिछड़ा, मुस्लिम, सिख, जैन और बौद्ध वर्गों को उनकी भागीदारी का वास्तविक अधिकार नहीं मिला है। उन्होनें यह भी कहा कि ऐसी सत्ता नहीं आई जो इनके कल्याण के लिए काम करे। इसलिए इनके साथ सामाजिक अन्याय जारी है।'
उन्होंने अलीगढ़ की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कई इलाकों में दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के साथ अत्याचार हो रहे हैं। उनकी बहनों और बेटियों का अपमान हो रहा है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अब बसपा से ज्यादा दलित समाज की बात होनी चाहिए।
चंद्रशेखर ने प्रबुद्ध सम्मेलन की भी बात की, जिसमें उन्होंने बताया कि अब तक राजनीति में कुछ खास जातियों को ही 'प्रबुद्ध' माना गया। "यह मनुवादी सोच है जो जाति आधारित भेदभाव को बढ़ावा देती है।" उन्होंने कहा कि उनका सम्मेलन उन सभी शोषित जातियों को एक साथ लाने की कोशिश है।
सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के पढ़े-लिखे लोग, कर्मचारी, अधिकारी, युवा, वकील, व्यापारी और रिटायर कर्मी शामिल हुए। उन्होंने दलितों के उत्थान और समानता के लिए कई सुझाव दिए। चंद्रशेखर ने कहा कि उनकी पार्टी संविधान के सिद्धांतों के अनुसार समानता और स्वाभिमान के साथ समाज बनाना चाहती है।












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