Exclusive Interview: DDU University की बड़ी उपलब्धि पर बोलीं कुलपति, कहा- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुधरी छवि

Exclusive Interview VC DDU University Gorakhpur Professor Poonam Tandon: दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर ने क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग एशिया में शानदार प्रदर्शन किया है। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन से क्यूएस रैंकिंग सहित कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर खास बातचीत की।

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    गोरखपुर विश्वविद्याल की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन से खास बातचीत

    शानदार प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त की

    कुलपति ने क्यूएस रैंकिंग में दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के शानदार प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने पहले भी कई पैमानों पर शानदार प्रदर्शन किया है। स्टेट यूनिवर्सिटी में पूरे देश में टॉप पर है विश्वविद्यालय और सारे संस्थान मिलाए तो चौथे नंबर है।

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    विश्व की सबसे प्रतिष्ठित रैंकिंग होती है क्यूएस रैंकिंग

    हमने कई प्रतिष्ठित रैंकिंग में अपनी जगह बनाई है। लेकिन विश्व की सबसे प्रतिष्ठित रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि है। क्यूएस रैंकिंग ब्रिटिश संस्था द्वारा जारी की जाती है जो विश्व की सबसे प्रतिष्ठित रैंकिंग हैं।

    हर संस्थान का सपना होता है इसमें रैंकिंग का

    कुलपति ने कहा कि हर संस्थान का सपना होता है कि वह क्यूएस रैंकिंग में शामिल हो। आजकल के छात्र एडमिशन से पहले विश्वविद्यालयों की क्यूएस रैंकिंग देखते हैं। तो क्यूएस रैंकिंग का अपने आप में बहुत महत्व है।

    क्यूएस वर्ल्ड एशिया रैंकिंग में मिली जगह

    कुलपति प्रोफेसर टंडन ने बताया कि क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग की कई कैटेगरी होती है जिसमें हमने जगह पाई है वो क्यूएस वर्ल्ड एशिया रैंकिंग कैटेगरी है। दक्षिण एशिया में हम लोगों की रैंकिंग 240 की है। इस बार हमें दक्षिण एशिया में 18 पायदान और पूरे एशिया में 50 पायदान की जंप मिली है।

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    इन पैमानों पर खरा उतरा डीडीयू
    कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग पैमानों की चर्चा करते हुए कहा कि ये परिणाम विश्वविद्यालय द्वारा अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान और नवाचार में किए गए प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। क्यूएस रैंकिंग्स में कई कठोर मापदंडों पर एचईआई को रैंक किया जाता है, जिनमें पीएचडी स्टाफ, छात्र-अध्यापक अनुपात, अकादमिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, प्रति पेपर उद्धरण, इनबाउंड एक्सचेंज छात्रों, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात, आउटबाउंड एक्सचेंज छात्रों और प्रति अध्यापक पेपर शामिल हैं। डीडीयूजीयू ने पीएचडी स्टाफ, अकादमिक और नियोक्ता प्रतिष्ठा, प्रति पेपर उद्धरण, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात और प्रति अध्यापक पेपर जैसे कई प्रमुख संकेतकों में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई है, जिससे पिछले वर्ष की तुलना में इन सभी मापदंडों पर लगभग दोगुनी अंक वृद्धि हुई है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुधरी विश्वविद्यालय की छवि

    प्रो. टंडन ने कहा कि सभी मापदंडों में दो गुनी वृद्धि यह दर्शाती है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुधरी है।

    अगले साल और बेहतर करेंगे परफॉर्मेंस

    कुलपति ने कहा कि जिन मापदंडों में हमने कमी की है उसमें सुधार किया जायेगा। इसके लिए कार्ययोजना भी तैयार हो चुकी है।

    छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को दिया क्रेडिट

    प्रोफेसर टंडन ने इस उपलब्धि का श्रेय शिक्षकों, कर्मचारियों व छात्रों को दिया। इसके लिए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं भी दी।

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    एल्युमिनाई का भी बड़ा योगदान

    कुलपति ने कहा कि इस प्रतिष्ठा में एल्युमिनाई का भी बड़ा योगदान है। विश्वविद्यालय की छवि इस बात से भी बनती है कि यहां के छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद क्या कर रहे हैं? यहां के छात्र आज राजनीति, खेल, शिक्षा , डॉक्टर
    सहित हर क्षेत्र में कार्यरत है। मैं एल्युमिनाई को भी बधाई देवी हैं।

    गोरखपुर की सांस्कृतिक परंपरा समृद्ध

    कुलपति ने कहा कि गोरखपुर की सांस्कृतिक परंपरा काफी समृद्ध है। पास में ही गौतम बुद्ध, कबीर जैसे लोगों से जुड़े स्थान हैं।
    यह खुद गुरु गोरखनाथ की नगरी है। इसके साथ ही आस पास के जिलों का अपना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। जो विदेशी लोगों को अपनी तरफ खूब आकर्षित कर रहा है।

    एजुकेशन हब बन चुका है गोरखपुर

    कुलपति ने कहा कि आज गोरखपुर एजुकेशन हब के रूप में अपनी शानदार पहचान बना चुका है। आज यहां प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, एम्स, गोरखनाथ विश्वविद्यालय सहित कई शिक्षण संस्थान हैं। हर क्षेत्र में चाहे वो कृषि का हो कला का हो , विज्ञान का हो या तकनीकी का हो छात्रों को सुविधा मिल रही है। विदेशी छात्रों के लिए भी यहां बहुत कुछ है।

    कुलपति ने बताया विश्वविद्यालय का मतलब

    प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय का मतलब ' विश्व और विद्यालय ' होता है। इसका मतलब यह है कि हमें स्थानीय स्तर पर न सोच व्यापक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोचना होगा। ग्लोबल रूप में सभी को जोड़ना होगा। ताकि विश्व के लोग हमे और हम उन्हें जान सकें। सीख सकें ।

    विश्वविद्यालय का केंद्र बिंदु छात्र होते हैं

    कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का केंद्र बिंदु छात्र होते है। छात्रों के लिए बहुत प्रयास होते हैं। जॉब ओरिएंटेड कोर्स चलाए जा रहे हैं। दो चीजें एक दूसरे के समानांतर चलती हैं एक स्टूडेंट्स और एकेडमी। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यालय में बहुत परिवर्तन हो रहा है। कई एडवांस कोर्स भी चलाए जा रहे है। ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्स भी शुरू हो चुके हैं। छात्र हित में कई अंतरराष्ट्रीय सेमिनार भी समय समय पर किए जा रहे हैं।

    पीएम ऊषा के तहत मेरु विश्वविद्यालयों की सूची में डीडीयू भी

    कुलपति ने बताया कि वर्तमान समय में डीडीयू विश्विद्यालय पीएम ऊषा के तहत मेरु विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल है। मेरु विश्वविद्यालय में देश के 16 विश्वविद्यालय शामिल हैं जिसमें से एक डीडीयू भी है। इसमें डीडीयू को सौ करोड़ की ग्रांट मिली है। जिससे विश्वविद्यालय के पुराने भावनों का जीर्णोद्धार हो सकेगा और नए भवनों का निर्माण भी। जिससे विश्वविद्यालय को और भव्यता मिलेगी। इससे छात्र हित में बहुत कार्य हो सकेंगे।

    छात्रों ने की अपील
    कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि अच्छा करिए, मेहनत करिए और अपने कैरियर को आगे ले जाइए। जितना छात्र मेहनत करेंगे उतना ही आगे जायेंगे। सभी को मेरी ढेरों शुभकामनाएं हैं।

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