Success Story: गांव के प्राथमिक विद्यालय से विश्व के शीर्ष वैज्ञानिक बनने तक कुछ ऐसा रहा सफर
Success Story Ravi Kant Upadhyay DDU University Gorakhpur: गांव मिट्टी से निकलकर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाना शायद इतना आसान नहीं होता। पर कोशिश करने वालों के लिए यह असंभव भी नही होता। ऐसा ही कुछ किया है उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के एक छोटे से गांव नगलावरी के रहने वाले प्रोफेसर रवि कांत उपाध्याय ने। आप वर्तमान समय में दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के प्राणि विज्ञान विभाग में बतौर विभागाध्यक्ष कार्यरत हैं और हाल ही में इन्हे विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने आप से खास बातचीत की।
6 भाई और 2 बहनें आगरा जिले के एत्मादपुर तहसील के नगलावरी गांव के रहने वाले प्रभुदायल उपाध्याय और गायत्री देवी की कुल आठ संताने हुई। इनमे ही दूसरे नंबर के हैं रवि कांत।
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गांव के प्राथमिक विद्यालय से हुआ शिक्षा का आरंभ रवि कांत उपाध्याय की शिक्षा का प्रारंभ गांव के प्राथमिक से हुआ। पढ़ाई में कम समय में ही रुचि आ गई। माता पिता का मार्गदर्शन भी मिलता गया। कक्षा पांच तक की पढ़ाई पूरी करने बाद महात्मा गांधी जूनियर हाईस्कूल आरन, आगरा से 8 वीं तक की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद कक्षा 9 से 12वीं तक राष्ट्रीय इंटर कॉलेज बरहन,आगरा से शिक्षा ली।

यहां से ली स्नातक और परास्नातक की शिक्षा इंटर कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद रवि कांत उपाध्याय ने आगरा कॉलेज से स्नातक और राजा बलवंत सिंह कॉलेज से परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद आगरा विश्वविद्यालय से एमफिल पूरा किया।
दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू से पूरा किया शोध कार्य
रवि कांत उपाध्याय ने दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से शोध कार्य पूरा किया।
शुरू किया शिक्षण कार्य
प्रोफेसर रवि कांत उपाध्याय ने बताया कि शिक्षा पूरी करने के बाद मैं आगरा आ गया और यहीं विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य करने लगा। इसके बाद राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान दिल्ली आकर अपनी सेवा देने लगा। यहां कार्य करने के बाद अप्रैल, 2001 में दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर आ गया और वर्तमान समय में यहीं पर कार्यरत हूं।
पिता को मानते हैं आदर्श
प्रोफेसर रवि कांत उपाध्याय अपने पिता प्रभुदयाल उपाध्याय को अपने जीवन का आदर्श बताते हैं। वह कहते हैं कि आज मैं जो कुछ भी हूं अपने पिता की बदौलत हूं। पिता जी ने हमे पढ़ाने के लिए बहुत संघर्ष किया। वह कई किलोमीटर साइकिल चलाकर आते जाते थे। निराशा में भी हम सभी भाई बहनों का हिम्मत बढ़ाते थे। ईमानदारी और अनुशासन की हमेशा सीख देते है। कहते थे हमेशा ईमानदारी के साथ अपना प्रयास करिए।
युवाओं से की अपील
प्रोफेसर रवि कांत युवाओं से अपील करते हुए कहते हैं कि जीवन में कभी निराश नहीं होना चाहिए। असफलता के बाद भी प्रयास करना नही छोड़ना चाहिए। निरंतर प्रयास से सफलता अवश्य मिलती है।
विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों में शामिल प्रोफेसर रवि कांत उपाध्याय स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका द्वारा जारी विश्व के दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हुए हैं। अब तक आपने 227 शोध प्रकाशित किए हैं जिसे थाईलैंड, मलेशिया, चीन, यूरोप सहित कई देशों में पढ़ा गया है ।












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