UP News: RLD का राज्य पार्टी का दर्जा छिनने के पीछे क्या हुई है बड़ी साजिश?, जानिए कौन कर रहा ये दावा

राष्ट्रीय लोकदल पर उसके चुनाव चिन्ह हैंडपम्प के समाप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर वह मैदान में उतर गई है। इस बीच रालोद ने बड़ा आरोप लगाते हुए आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है।

अखिलेश

Rashtriya Lok Dal: उत्तर प्रदेश में सभी राजनीतिक दल एक तरफ जहां अपने अपने तैयारियों में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर दूसरी ओर राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अब उत्तर प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनावों में अपने प्रतीक को बचाने और बनाए रखने के लिए लड़ रही है। दरअसल, निर्वाचन आयोग ने सोमवार को रालोद का क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया था। अब रालोद के प्रदेश अध्यक्ष ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि रालोद की पार्टी का दर्जा समाप्त करना एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।

प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने लगाया बड़ा आरोप

इस बीच, रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय अपने फेसबकु पेज पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लिखा है कि, रालोद किसानों की हिम्मत और नौजवानों की उम्मीद है। चुनावा आयोग को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। आयोग के इस फैसले के पीछे कोई न कोई बड़ी ताकत लगी है जो किसान भाइयों और नौजवानों को एकजुट होने से डरती है।

सपा के साथ मिलकर रालोद ने लड़ा था चुनाव

विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन करने वाली रालोद के यूपी विधानसभा में नौ विधायक हैं। रालोद के अध्यक्ष और संसद सदस्य (सांसद) जयंत चौधरी ने राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि निकाय चुनावों में रालोद उम्मीदवारों के लिए पार्टी का चुनाव चिह्न 'हैंडपंप' आरक्षित किया जाए। लेकिन आयोग ने अभी तक अनुरोध पर फैसला नहीं किया है।

यूपी में दो चरणों में होने हैं मतदान

राज्य में निकाय चुनाव दो चरणों में चार मई और 11 मई को होंगे और मतगणना 13 मई को होगी। पहले चरण के लिए नामांकन मंगलवार को शुरू हो चुका है। जयंत ने मंगलवार को एसईसी को संबोधित एक प्रतिनिधित्व में कहा था कि रालोद के चुनाव चिन्ह 'हैंडपंप' को यूपी में होने वाले शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में सभी सीटों पर केवल रालोद उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया जाए।

चुनाव चिन्ह को लेकर पार्टी ने रखा है अपना पक्ष

रालोद प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि पार्टी ने औपचारिक रूप से मंगलवार को ही राज्य चुनाव आयोग में अपना मामला रखा था। इसमें पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी की इच्छानुसार कार्य करने का आग्रह किया गया था। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि एसईसी पार्टी की स्थिति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखेगा। विशेष रूप से जब चुनाव अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है।"

केस की मेरिट के आधार पर लिया जाएगा फैसला

राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, आयोग रालोद के प्रतिनिधित्व पर विचार करेगा और योग्यता के आधार पर निर्णय लेगा। उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे की जांच करने के बाद ही रालोद की याचिका पर फैसला करेंगे।" आयोग ने तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए इसे वापस लेते हुए आम आदमी पार्टी (आप) को एक राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया।

आयोग ने उत्तर प्रदेश में रालोद से क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा भी वापस ले लिया क्योंकि राज्य में राज्य विधानसभा चुनावों में कुल वोटों का आवश्यक 6% प्राप्त करने में विफल रहा। यूपी में 2022 के विधानसभा चुनावों में आठ सीटें जीतने के बावजूद, रालोद का वोट शेयर 3% से कम था।

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