UP News: 2024 से पहले Ateeq-Mukhtar गिरोह को ख़त्म कर बड़ा संदेश देंगे CM Yogi?

UP CM Yogi Adityanath क्या 2024 के चुनाव से पहले यूपी में Ateeq-Mukhtar के गिरोह का खात्मा कर पाएंगे। राज्य की सत्ता संभालने के बाद से ही माफियाओं पर कार्रवाई जारी है। यही दो गिरोह बचे हैं जो सरकार को चुनौती दे रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ

UP chief minister Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार 25 मार्च को 6 साल पूरे कर रही है। प्रयागराज में 24 फरवरी को हुए उमेश पाल हत्याकांड के बाद से ही यूपी में बवाल मचा है। इस घटना के बाद से ही सीएम योगी ने माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के खिलाफ सख्त रुख अपना रखा है। पिछले 6 सालों में जिस तरह से योगी ने माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है उससे कानून व्यवस्था पर उनकी पकड़ मजबूत हुई है लेकिन प्रयागराज की घटना के बाद कई सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो योगी के पास 2024 से पहले एक बड़ा मौका है जब वह अतीक और मुख्तार के गिरोह का खात्मा कर कानून व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संदेश दे सकते हैं।

अतीक

6 साल से अतीक-मुख्तार गैंग पर हो रही कार्रवाई

दरअसल, योगी आदित्यनाथ ने कानून- व्यवस्था पर अपनी सरकार की पकड़ के बारे में विश्वास दिखाने के लिए राज्य में संगठित अपराध के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। पिछले 6 साल में अतीक और मुख्तार गैंग की हजारों करोड़ रुपये की सम्पत्तियां कुर्क हुईं और अटैच की गईं। यूपी में अब अतीक और मुख्तार गैंग ही इस स्थिति में हैं जो सरकार के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं। लेकिन यूपी पुलिस अतीक और मुख्तार गिरोह पर कहर बनकर टूट रही है जिससे आने वाले समय में इन दोनों गिरोहों की कमर टूटना निश्चित है।

राजनीतिकि विश्लेषक राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि,

सरकार संगठित अपराध को खत्म करने में जुटी है और उसमें सबसे बड़ा रोड़ा यही दोनों गिरोह हैं। योगी सरकार के पहले कार्यकाल में कानपुर जिले के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से तूफान खड़ा हुआ था। इस कांड के बाद यूपी पुलिस ने खूंखार गैंगस्टर विकास दुबे को एक एनकाउंटर में मार गिराया लेकिन इस घटना ने माफियाओं पर लगाम लगाने के सरकार के दावों की हवा निकाल दी। इसके बाद योगी सरकार की तरफ से माफिया के खिलाफ एक अभियान छेड़ा गया था।

विकास दुबे

पिछली सरकार में छाया रहा विकास दूबे एनकाउंटर

बीजेपी की पिछली सरकार में विकास दूबे हत्याकांड के बाद यूपी सरकार को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था और मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों की अयोग्यता पर भड़क गए थे। इस कांड के बाद बड़े माफिया व संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा की गई। इसके बाद जेल में बंद विधायक मुख्तार अंसारी और उनके गुर्गों को निशाने पर लिया गया। पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी 2005 से ज्यादातर सलाखों के पीछे बंद रहा। हालांकि, जेल में रहने के बाद भी चुनाव जीतता रहा। मुख्तार 1996 से लगातार चुनाव जीतता चला गया लेकिन 2022 के चुनाव में वह चुनाव नहीं लड़ा। उसने अपने बेटे अब्बास अंसारी को चुनाव लड़ाया और वह जीत गया।

मुख्तार अंसारी

पूर्वी यूपी में अतीक-मुख्तार के गिरोह का सिंडिकेट हावी

मुख्तार अंसारी पर कई सनसनीखेज अपराधों का आरोप लगाया गया था और कहा जाता है कि वह पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े अपराध सिंडिकेट को संचालित करता है। मुख्तार के साथ उनके भाई अफजाल अंसारी, जो गाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र से संसद सदस्य हैं। 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में भी आरोपी थे। लेकिन 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने साक्ष्यों के आभाव में बरी कर दिया था।

यूपी सीएम के मुख्य मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार कहते हैं,

पहले दिन से ही योगी सरकार अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। अपराधी की पहचान उसकी जाति या धर्म से नहीं होती। हमारे मुख्यमंत्री राज्य में संगठित अपराध की रीढ़ तोड़ने के अपने संकल्प पर अडिग हैं। आगे भी सरकार की तरफ से ऐसे कदम उठाए जाएंगे और माफियाओं को नेस्तनाबूद करने का काम किया जाएगा।

मुख्तार

यूपी और बिहार में मुख्तार अंसारी गिरोह का ज्यादा प्रभाव

अधिकारियों के दावे के मुताबिक, हत्या, जबरन वसूली और जमीन हड़पने से लेकर जघन्य अपराधों के लगभग 40 मामलों के साथ, मुख्तार अंसारी सबसे खूंखार अपराधियों में से एक है। स्टेट स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी उसके अपराध सिंडिकेट के निशाने पर थी। कहा जाता है कि रेलवे और अन्य सरकारी ठेकों में उनकी गहरी दिलचस्पी रहती है। यूपी पुलिस को लगता है कि अंसारी का पूर्वी यूपी और बिहार के कुछ हिस्सों में भी बड़ा प्रभाव है।

योगी आदित्यनाथ

संगठित अपराध खत्म करने के लिए बनाया नया कानून

दरअसल, 2017 में भाजपा के सत्ता में आने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही मुख्तार और अतीक समेत कई गिरोह यूपी पुलिस के निशाने पर हैं। यूपी सरकार मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट) की तर्ज पर एक नया कानून यूपीकोका लाने की कोशिश में जुटी थी। तब यह कहा गया था कि नया कानून मुख्तार सहित यूपी में संगठित अपराध नेटवर्क को घातक झटका देगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

योगी आदित्यनाथ

अतीक-मुख्तार गिरोह पर यूपी पुलिस ने बढ़ाया दबाव

हालांकि योगी सरकार ने मुख्तार अंसारी और उनके गुर्गों पर दबाव बढ़ा दिया है। मुख्तार को लखनऊ से आगरा जेल में शिफ्ट कर दिया गया, उनके कई साथियों को भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाल दिया गया। जुलाई 2018 में, गिरोह को एक गंभीर झटका लगा जब बागपत जिला जेल के अंदर एक खूंखार गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी, जिसे मुख्तार का प्रमुख सहयोगी बताया गया, उसकी हत्या कर दी गई। बताते हैं कि इस घटना के बाद से ही मुख्तार अंसारी काफी डर गया था।

अतीक अहमद

योगी सरकार के निशाने पर बाहुबली माफियाओं का कुनबा

योगी सरकार ने यूपी में दोबारा सरकार बनने के बाद से ही पिछले कुछ महीनों में मुख्तार, उनकी पत्नी, बेटों और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ जमीन पर अवैध कब्जा, दस्तावेजों में जालसाजी और हथियार रखने के कई नए मामले दर्ज किए गए हैं। मुख्तार के बेटों पर परिवार के सदस्यों के कई शस्त्र लाइसेंस जब्त किए गए हैं और इनाम घोषित किया गया। ठीक इसी तरह अब यूपी पुलिस के निशाने पर अतीक अहमद और उसका पूरा कुनबा है। योगी पहले ही कह चुके हैं कि इस माफिया को मिट्‌टी में मिला देंगे।

वरिष्ठ पत्रकार आरपी सिंह कहते हैं कि,

मुख्तार योगी आदित्यनाथ के लिए वैसे ही हो सकते हैं जैसे मायावती और बसपा के लिए राजा भैया थे। यदि मायावती के लिए कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ कार्रवाई दलितों के लिए सामाजिक न्याय का एक बड़ा संदेश था, तो भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अतीक और मुख्तार अंसारी के खिलाफ कार्रवाई एक तरफ उनके मूल हिंदुत्व प्रशंसकों के लिए एक मजबूत संदेश है तो दूसरी ओर 2024 से पहले कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष पर वार करने का एक बड़ा हथियार तलाशने की कोशिश है।

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