UP MLC By Election 2023: दलित-ओबीसी एजेंडे को धार देने के लिए अखिलेश ने उठाया ये कदम?
UP MLC By Election 2023 के लिए सपा ने अपने दो उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। राजनीतिक पंडित इस बात को लेकर हैरान हैं कि यह जानते हुए कि सपा के पास एक भी सीट जिताने का बहुमत नहीं है फिर भी ये कदम क्यों उठाया है।

SP named Ram Karan Nirmal and Ram Ratan Rajbhar: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव में शानदार सफलता मिलने के बाद बीजेपी ने एमएलसी चुनाव में दो उम्मीदवारों को उतारा है। हालांकि बीजेपी ये दोनों सीटें आसानी से जीत लेगी लेकिन फिर भी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने इन दो सीटों पर ओबीसी और दलित दांव खेलकर संदेश देने की कोशिश की है कि वह हमेशा ही इन समुदाय के लिए खड़ी रही है।
दलित-ओबीसी के प्रति प्रतिबद्धता दिखाने की कोशिश
हालांकि सपा का यह कदम दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी ने गुरुवार को यूपी में दो एमएलसी सीटों के लिए राम करण निर्मल और राम रतन राजभर को उम्मीदवार बनाया। चुनाव 29 मई को होगा। उन्होंने पार्टी के उम्मीदवारों के रूप में नामित होने के घंटों बाद नामांकन दाखिल किया था।
राम किरण निर्मल दलित तो राम रतन राजभर हैं पूर्व एमएलसी
कौशांबी के मूल निवासी रामकरण निर्मल दलित हैं और सपा के फ्रंटल संगठन लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष हैं जबकि ओबीसी चेहरा राम रतन राजभर पूर्व एमएलसी हैं और मऊ के रहने वाले हैं। राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि सपा ने अपने इस कदम के माध्यम से संदेश देने की कोशिश की है अगले आम चुनाव में वह ओबीसी और दलित एजेंडे पर फोकस करेगी।
बीजेपी ने ओबीसी-ठाकुर को दिया है टिकट
सपा का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भाजपा ने एमएलसी चुनाव के लिए पदमसेन चौधरी (ओबीसी) और मानवेंद्र सिंह (ठाकुर) को अपना उम्मीदवार बनाया है। दरअसल बनवारी लाल दोहरे के निधन और लक्ष्मण अचार्य के राज्यपाल बनने की वजह से ये सीटें खाली हुईं थीं। ये दोनों नेता दलित और ओबीसी से ही जुड़े थे।
बीजेपी के पास है दोनों सीटें जीतने का बहुमत
राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत होने और उसके उम्मीदवारों के आसानी से जीतने की उम्मीद होने के बावजूद उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के सपा के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं। राजनीतिक जानकार इसे एक संदेश के तौर पर देख रहे हैं जिसे सपा लोगों तक पहुंचाना चाहती है। इससे पहले अखिलेश यादव दलितों को साधने के कई जतन कर चुके हैं।
लंबे समय से दलितों को साधने में जुटे हैं अखिलेश
अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश के महू जाकर बाबा साहब अम्बेडकर को श्रद्धांजलि देकर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की थी। इससे पहले वो यूपी में भी दलित आइकन से जुड़े कई कार्यक्रमों में शरीक हुए थे। महू में अखिलेश के साथ उनके सहयोगी जयंत चौधरी और आजद पार्टी के चंद्रशेखर भी शामिल थे। राजनीतिक विशेषज्ञ राजीव रंजन कहते हैं कि अखिलेश यादव भाजपा उम्मीदवारों को निर्विरोध जीतने नहीं देना चाहते हैं और उन्हें अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का अधिकार है, जो सपा ने किया है। इससे अब यह तो तय है कि तीस को चुनाव होगा।
ऐसे खाली हुई थी दोनों सीटें
लक्ष्मण आचार्य की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति और भाजपा एमएलसी बनवारी लाल दोहरे के निधन के बाद एमएलसी की दो सीटें खाली हो गईं। आचार्य का कार्यकाल जहां जनवरी 2027 तक था, वहीं डोरे का कार्यकाल 6 जुलाई 2028 को समाप्त होना था।












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