यूपी विधान परिषद में सपा से छिना विपक्ष के नेता का पद तो बौखलाई पार्टी, क्या बोली जानिए
लखनऊ, 8 जुलाई: उत्तर प्रदेश के ऊपरी सदन में समाजवादी पार्टी मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा भी नहीं बचा पाई है। सदन में उसके नेता लाल बिहारी यादव से सभापति ने विपक्ष के नेता पद की मान्यता छीन ली है। यह वैसी ही स्थिति है, जैसा पिछले दो कार्यकालों से लोकसभा में कांग्रेस के साथ हो रहा है। लेकिन, सपा को सभापति के इस फैसले पर भरोसा नहीं है और उसने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी 'लोकतंत्र की हत्या' करने में लगी हुई है। उसने इस मसले को अदालत में ले जाने की भी धमकी दी है।

यूपी विधान परिषद में मुख्य विपक्षी पार्टी नहीं रही सपा
यूपी विधान परिषद में समाजवादी पार्टी से विपक्ष के नेता का पद छीन लिया गया है। दरअसल, 100 सदस्यीय ऊपरी सदन में अब सपा के सिर्फ 9 विधान पार्षद रह गए हैं। जबकि विपक्ष के नेता का पद पाने के लिए पार्टी को कम से कम कुल सदस्यों का 10 प्रतिशत विधान पार्षद होना चाहिए। प्रिंसिपल सचिव राजेश सिंह की ओर से दिए गए एक बयान के मुताबिक 27 मई को विधान परिषद में सपा के 11 सदस्य थे और वह सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी थी। इसी आधार पर पार्टी के एमएलसी लाल बिहारी यादव को विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता दी गई थी।

लाल बिहारी यादव से विपक्ष के नेता का दर्जा छिना
बयान के मुताबिक '7 जुलाई को परिषद में समाजवादी पार्टी के सदस्यों की संख्या घटकर 9 रह गई, जो कि ऊपरी सदन के नियम 234 के तहत मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा पाने के लिए जरूरी 10 नेताओं की आवश्यक संख्या से कम है।' गुरुवार को जारी बयान में आगे कहा गया है, 'इसी वजह से लाल बिहारी यादव के विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता सभापति की ओर से तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है। वह परिषद में समाजवादी पार्टी के नेता बने रहेंगे।'

'लोकतंत्र की हत्या' कर रही है भाजपा- सपा नेता
लेकिन, सदन के प्रावधानों के तहत हुई यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी को पसंद नहीं आई है। सपा की ओर से विधान परिषद में लाल बिहारी यादव से पहले विपक्ष के नेता रह चुके संजय लाठर ने कहा है कि सदन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता को यह पद मिलता है। उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'क्योंकि समाजवादी पार्टी विधान परिषद में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, इसके नेता को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिलनी ही चाहिए। हम इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे।' उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि सत्ताधारी इस तरह के कार्यों से 'लोकतंत्र की हत्या कर रही है।'

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य फिर चुने गए हैं
बुधवार को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 12 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो गया था। इनमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह भी शामिल हैं। लेकिन, दोनों हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद चुनावों में फिर से जीतकर सदन में दाखिल हो चुके हैं। इनके अलावा सपा के 6, बहुजन समाज पार्टी के 3 और कांग्रेस के एकमात्र सदस्य का भी कार्यकाल खत्म हो गया था। इस समय यूपी विधान परिषद में बीजेपी के सदस्यों की संख्या 73 हो चुकी है, जबकि सपा की रह गई है सिर्फ 9. वहीं कांग्रेस का एक भी सदस्य ऊपरी सदन में नहीं बच गया है। बीएसपी के एक सदस्य, अन्य-9 और 8 सीटें अभी खाली हैं।

यूपी के दोनों सदनों में भाजपा के पास भारी बहुमत
यूपी विधान परिषद में स्थानीय निकाय के क्षेत्रों के अलावा 8 सदस्य शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, 8 ग्रैजुएट सीट, 38 एमएलए के जरिए चुने जाते हैं, जबकि 10 का नामांकन राज्य सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल करते हैं। आज की तारीख में उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के पास पर्याप्त बहुमत है। इसलिए, उसके लिए किसी भी कानून को दोनों सदनों से आसानी से पास करवाया जा सकता है। (चौथी तस्वीर को छोड़कर बाकी फाइल)












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