UP के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत! बकाया होने पर अचानक अंधेरे में नहीं डूबेगा घर, क्या है नया नियम?
UP Electricity New Rules: उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं (Electricity consumers) के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। पिछले लंबे समय से मामूली बकाया होने पर भी बिना सूचना के बिजली कट जाने (डिस्कनेक्शन) की समस्या से जूझ रहे उपभोक्ताओं को अब बड़ी राहत मिलने जा रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने मीटर से जुड़े दो दशक पुराने नियमों में ऐतिहासिक संशोधन कर दिया है।
नई अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश में अब स्मार्ट मीटर तो लगाए जाएंगे, लेकिन उन्हें उपभोक्ता की लिखित सहमति के बिना 'प्रीपेड मोड' पर नहीं डाला जा सकेगा। केंद्र सरकार ने पुराने रेगुलेशन में बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि प्रीपेड विकल्प चुनना पूरी तरह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा।

अनिवार्यता खत्म
पहले स्मार्ट मीटरों को अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में ही चलाने करने का प्रावधान था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।CEA की नई अधिसूचना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई है। जिन क्षेत्रों में संचार नेटवर्क (Communication Network) उपलब्ध है, वहां भारतीय मानक के स्मार्ट मीटर लगेंगे, पर मोड उपभोक्ता तय करेगा।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद लंबे समय से इसका विरोध कर रहा था। संसद में भी यह मुद्दा उठा, जिसके बाद केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट किया कि प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं हैं।
UP में कितने स्मार्ट मीटर लगे हैं?
प्रदेश में वर्तमान में करीब 78 लाख स्मार्ट मीटर लगे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में मीटर पहले ही प्रीपेड मोड पर काम कर रहे हैं। अब इन मीटरों को पुनः सामान्य स्मार्ट मीटर (पोस्टपेड) मोड में बदलने की मांग भी तेज हो गई है।
आम जनता को बड़ी राहत
अब तक की व्यवस्था में, सिस्टम मामूली बकाया होने पर भी स्वतः ही बिजली काट देता था, जिससे नियमित भुगतान करने वाले उन उपभोक्ताओं को भी परेशानी होती थी जिन्हें भुगतान में किसी कारणवश चंद दिनों की देरी हो जाती थी। नए नियमों के बाद, अब उपभोक्ता की बिना लिखित अनुमति के कोई भी मीटर प्रीपेड नहीं किया जा सकेगा, जिससे 'अचानक अंधेरे' की समस्या खत्म होगी।












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