हिंदुत्व का एजेंडा, क्या गाड़ेगा झंडा? राजनीतिक विश्लेषक के नजरिए से समझिए उपचुनाव की सियासत
UP by- election news In Hindi: उत्तर प्रदेश उपचुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। नामांकन की तारीख भी खत्म हो चुकी है। प्रत्याशी अपना जोर लगाने में कोई कमी नहीं कर रहे। बीजेपी, सपा, बसपा सहित सभी पार्टियों के अपने एजेंडे हैं। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर में राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर महेंद्र कुमार सिंह से उत्तर प्रदेश उपचुनाव सियासत पर विस्तार से चर्चा की।
आक्रामक हिंदुत्व के एजेंडे पर चुनाव लड़ेगी बीजेपी
डॉक्टर महेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश उपचुनाव का विश्लेषण करते हुए कहते हैं कि वर्तमान समय में देखा जाए तो बीजेपी दो राजनीतिक समीकरण पर काम कर रही है। पहला हिंदुत्व के एजेंडे पर वापस जा रही है, जो बिल्कुल साफ है। सीएम योगी के ' बटोगे तो कटोगे ' के एजेंडे को संघ के दोनों बड़े नेताओं ने स्वीकृति दे दी है।

लोकसभा चुनाव से सीख ले रही बीजेपी
प्रोफेसर महेंद्र सिंह ने कहा कि इसके साथ ही बीजेपी लोकसभा चुनाव से भी सीख ले रही है। जो गलतियां उसने टिकट बंटवारे के समय की थी उसे अब नहीं करेगी। वर्तमान समय में बीजेपी पिछड़े वर्ग को महत्व दे रही है।
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निषाद पार्टी और राजभर के पास कोई विकल्प नहीं
प्रोफेसर सिंह ने कहा कि देखा जाय तो बीजेपी के साथ जाने के अलावा निषाद पार्टी और ओम प्रकाश राजभर के पास कोई विकल्प नहीं है। इन नेताओं की अपनी ही जाति में पहचान कम होती दिखी है। संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर के बेटों को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।

प्रोफेसर महेंद्र सिंह कांग्रेस को लेकर कहते है कि इस बार किसी सीट पर चुनाव न लड़ने के बाद भी कांग्रेस सपा के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। कांग्रेस इंडिया गठबंधन को इस चुनाव में और मजबूत दिखाने का हर संभव प्रयास करेगी। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव यह ठीक से समझते हैं कि एक बहुत बड़ा वर्ग जो आज मेरे साथ है वह कांग्रेस की देन है। इसके साथ ही कांग्रेस भी यह जानती है कि जो जनाधार सपा का है, जो जमीनी कार्यकर्ता सपा के हैं वो उसके पास नहीं है।
योगी और विपक्ष दोनों की परीक्षा
प्रोफेसर सिंह कहते है कि यह चुनाव पूरे देश को बड़ा संदेश देगा। जहां एक तरफ सीएम योगी की हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे के रूप में परीक्षा है तो वहीं हरियाणा के हार के बाद विपक्ष कहा खड़ा है इसकी भी परीक्षा होगी।
बसपा इन दिनों अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है
मायावती पहले उपचुनाव नहीं लड़ती थी। 2024 से पहले मायावती ने आजमगढ़ और रामपुर से उपचुनाव लड़ा था, जिसमे हार का सामना करना पड़ा। बसपा इन दिनों अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।












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