UP Budget (2022-2023): नए बजट की तैयारियों में जुटी योगी सरकार की बढ़ी टेंशन, जानिए कैसे

UP Budget (2022-2023): उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार 2023-24 के बजअ की तैयारियों में जुटी हुई है। हालांकि सूत्रों का दावा है कि कई ऐसे विभाग हैं जहां आवंटित धनराशि का 50 फीसदी भी खर्च नहीं हुआ है।

योगी आदित्यनाथ

UP Budget (2022-2023): उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ जहां यूपी के बजट का आकार बढ़ाने का प्रयास कर रही है वहीं दूसरी ओर विभागों की कछुआ चाल सरकर की उम्मीदों पर पानी फेर रही है। सरकार यूपी में ग्लोबल इनवेस्टर समिट के बाद विधानसभा में बजट पेश करेगी। सूत्रों का दावा है कि इस बार का बजट यूपी के इतिहास में सबसे बड़ा बजट हो सकता है। लेकिन इस बीच सरकार में बैठे आला अफसरों की माने तो यूपी में बहुत सारे ऐसे विभाग हैं जिन्होंने अपनी धनराशि खर्च नहीं की है। अब इन विभागों को शासन स्तर से फरमान जारी किया गया है।

आवंटित बजट से कम खर्च को लेकर टेंशन

आवंटित बजट से कम खर्च को लेकर टेंशन

शासन में बैठे एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के बजट (2022-2023) में निर्धारित धन के कम उपयोग को लेकर चिंतित है और उसने अपने कई विभागों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि इन आवंटनों का उपयोग 20 मार्च, 2023 तक कर लिया जाए। 31 दिसंबर, 2022 तक, कई विभाग बजटीय प्रावधानों का केवल आधा उपयोग कर पाए हैं। हमने उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि 2022-2023 के लिए राज्य के बजट में आवंटित धन का उपयोग 20 मार्च, 2023 तक किया जाए।

फंड के उपयोग पर सरकार की नजर

फंड के उपयोग पर सरकार की नजर

हालांकि यूपी सरकार ने फंड के उपयोग पर लगातार नजर रखी है, लेकिन कम खर्च कई विभागों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। आवंटित धन, यदि किसी दिए गए वित्तीय वर्ष (जब बजट पारित किया जाता है) के भीतर उपयोग नहीं किया जाता है, तो उसे अगले वित्तीय वर्ष में नहीं ले जाया जाता है। समीक्षा प्रक्रिया से जुड़े एक पदाधिकारी ने कहा, "लगभग हर महीने राज्य सरकार के विभिन्न स्तरों पर स्थिति की निगरानी की जाती है और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाते हैं कि वर्ष के अंत से पहले अधिकतम धन का उपयोग किया जाए।"

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    कई विभाग 50 फीसदी धन नहीं खर्च कर पाए

    कई विभाग 50 फीसदी धन नहीं खर्च कर पाए

    बजटीय प्रावधानों और आवंटन की बारीकी से जांच से संकेत मिलता है कि विभिन्न विभागों द्वारा व्यय पहली तीन तिमाहियों (31 दिसंबर, 2022 तक) में निर्धारित धनराशि का लगभग 50% या 50% से भी कम था। जनवरी 2023 में हुई समीक्षा में यह बातें सामने निकलकर आई हैं। जो विभाग संतोषजनक स्तर तक धन का उपयोग नहीं कर पाए हैं, उनमें पीडब्ल्यूडी, चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, समाज कल्याण, महिला कल्याण, पर्यटन, पर्यावरण और नागरिक उड्डयन शामिल हैं।

    इन विभागों ने इतना बजट खर्च किया

    इन विभागों ने इतना बजट खर्च किया

    जानकारी के अनुसार, व्यावसायिक शिक्षा विभाग ने 1222.98 करोड़ के बजट प्रावधान और 781.76 करोड़ के आवंटन के विरुद्ध 608.70 करोड़ का उपयोग किया जबकि समाज कल्याण विभाग ने 12158.09 करोड़ के बजट और 9820.93 करोड़ के आवंटन के विरुद्ध 5647.29 करोड़ का उपयोग किया। महिला कल्याण विभाग ने 4643.86 करोड़ (4227.77 करोड़ का आवंटन) के बजट प्रावधान के विरुद्ध 2341.95 करोड़ का उपयोग कर पाया।

    पर्यटन विभाग भी नहीं खर्च कर पाया पैसा

    पर्यटन विभाग भी नहीं खर्च कर पाया पैसा

    इसी तरह पर्यटन विभाग द्वारा 1104.20 करोड़ के बजटीय प्रावधान एवं 594.73 करोड़ के आवंटन के विरुद्ध 528.22 करोड़ की राशि का उपयोग किया गया है। पर्यावरण और नागरिक उड्डयन विभागों ने क्रमशः 18.20 करोड़ (11.90 करोड़) और 2315.68 करोड़ (622.08 करोड़) के बजटीय प्रावधान के विरुद्ध क्रमशः 5.78 करोड़ और 577.71 करोड़ का उपयोग किया।

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