UP BJP: Bhupendra Chaudhary को नहीं मिली टीम चुनने की पूरी आजादी? धर्मपाल नहीं दिखा पाए सुनील बंसल वाला तेवर

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी की नई टीम की प्रतिक्षा की जा रही थी। आठ महीने बाद जब भूपेंद्र चौधरी ने नई टीम का ऐलान किया तो उसमें कुछ खास नहीं दिखा।

योगी आदित्यनाथ

BJP New Team in UP: भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) की यूपी ईकाई ने लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपनी नई संगठनात्मक टीम की घोषणा शनिवार को कर दी। बीजेपी के नेताओं का दावा है कि यह टीम 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की चुनावी संभावनाओं को आगे बढ़ाएगी। यूपी के बीजेपी चीफ भूपेंद्र चौधरी को यूपी बीजेपी की कमान सौंपे जाने और धर्मपाल सिंह को संगठन मंत्री बनाए जाने के बाद नई टीम का ऐलान हुआ है। हालांकि पूरी टीम पर यदि नजर डालें तो नई टीम के चयन में भूपेंद्र सिंह की ज्यादा नहीं चली जबकि सुनील बंसल के रसूख के तरह धर्मपाल सिंह अपने चहेतों को संगठन में शामिल नहीं करा पाए। कुल मिलाकर टीम में क्षेत्रीय अध्यक्षों के बदलाव को छोड़ दिया जाए तो कुछ भी नया नहीं है।

भूपेंद्र सिंह

भूपेंद्र की नहीं मिली अपनी टीम चुनने की आजादी

नई टीम में 18 प्रदेश उपाध्यक्ष, सात महासचिव और 16 राज्य सचिव बनाए गए हैं। पहले की तरह इस बार भी यूपी के प्रमुख नेताओं को उपाध्यक्ष के रूप में बरकरार रखा गया है, नोएडा के विधायक पंकज सिंह, एमएलसी विजय बहादुर पाठक और सलिल बिश्नोई हैं। महासचिवों में सबसे स्पष्ट बदलाव कन्नौज के सांसद सुब्रत पाठक को हटाया गया जबकि अश्वनी त्यागी भी अपनी जगह नहीं बचा पाए। हालांकि भूपेंद्र चौधरी पश्चिम पश्चिम में अपने कुछ लोगों को समायोजित कराने में कामयाब हुए हैं।

दयाशंकर सिंह

सरकार में बने मंत्रियों की संगठन से हुई छुट्‌टी

सुभाष यदुवंश को महासचिव के रूप में पदोन्नत किया। पहले प्रदेश सचिव रहे यदुवंश यूपी में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। युवा चेहरों को प्रमुख पदों पर बिठाने की भाजपा की रणनीति का उनका उत्थान समर्थन करता है। राज्य सचिव त्रयंबक त्रिपाठी और संजय राय को भी महासचिव पद पर पदोन्नत किया गया है। पिछले साल भाजपा के सत्ता में लौटने के बाद राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किए गए भाजपा नेताओं को हटाया गया है। इनमें मंत्री एके शर्मा, जेपीएस राठौड़, दयाशंकर सिंह और बेबी रानी मौर्य शामिल हैं। पिछड़ी जाति के मंत्री नरेंद्र कश्यप शामिल हैं।

भूपेंद्र चौधरी

क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलकर साधा जातीय संतुलन

एक और उल्लेखनीय बदलाव क्षेत्रीय नेतृत्व के स्तर पर हुआ है। सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदल दिया गया है। इसमें भी जातीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। पार्टी ने छह संगठनात्मक क्षेत्रों (गोरखपुर, काशी, ब्रज, पश्चिम यूपी, कानपुर और अवध) में एक ब्राह्मण, एक ठाकुर, एक भूमिहार और तीन ओबीसी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सबसे अहम बदलाव योगी के गोरखपुर क्षेत्र, कानुपर-बुंदेलखंड और पश्चिमी क्षेत्र में हुआ है। इन तीनों क्षेत्रों के अध्यक्षों- धर्मेंद्र सिंह (गोरखपुर), मोहित बेनीवाल (पश्चिम यूपी) और मानवेंद्र सिंह (कानपुर) को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। धर्मेंद्र को पहले एमएलसी मनोनीत किया गया था।

योगी

पूर्वांचल में भूमिहार-ठाकुर-ओबीसी को साधने का प्रयास

धर्मेंद्र की जगह सहजानंद राय (एक भूमिहार) को लिया गया है। यह आरएसएस से जुड़े रहे हैं और इसके छात्रसंघ एबीवीपी में काम कर चुके हैं। बेनीवाल की जगह सत्येंद्र सिसोदिया (एक ठाकुर) को लाया गया है, जो पहले पश्चिम यूपी क्षेत्र के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष थे। मानवेंद्र सिंह की जगह प्रकाश पाल (ओबीसी) को कानपुर क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। पाल इससे पहले पार्टी के उपाध्यक्ष थे और गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के लिए काम करने वाले संगठनात्मक पदाधिकारियों में से एक रहे हैं।

भूपेंद्र

2024 को ध्यान में रखकर संगठनात्मक बदलाव

इसके अतिरिक्त भाजपा ने वाराणसी और ब्रज क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश श्रीवास्तव और रजनीकांत माहेश्वरी को भी हटा दिया है। महेश की जगह दिलीप पटेल (ओबीसी) और रजनीकांत माहेश्वरी की जगह धुव विजय सिंह शाक्य (ओबीसी) पर भरोसा जताया गया है। ध्रुव विजय सिंह ब्रज क्षेत्र के उपाध्यक्ष थे। इसी तरह, भाजपा ने कमलेश मिश्रा को अवध क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया जहां उन्होंने इसके उपाध्यक्ष के रूप में काम किया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगले साल आम चुनाव से पहले पार्टी के कामकाज को तेज करने के लिए रणनीतिक रूप से संगठनात्मक बदलाव किया गया है।

भूपेंद्र चौधरी

बंसल की तरह तेवर नहीं दिखाए पाए नए संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह

बीजेपी में इससे पहले संगठन मंत्री सुनील बंसल की टीम के चयन में काफी अहम भूमिका होती थी लेकिन उनके जाने के बाद नए संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह की कुछ भी नहीं चली। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को जहां टीम चुनने में आजादी नहीं दी गई वहीं धर्मपाल सिंह भी नई टीम में किसी को जगह नहीं दिला पाए। चूंकि संगठन मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी दोनों पश्चिम से ही हैं इसलिए पश्चिम में इस बार इनकी जिम्मेदारियां ज्यादा हैं। भूपेंद्र सिंह पश्चिम में कुछ चहेतों को नई टीम में जगह दिलाने में जरूर कामयाब हुए हैं।

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