लखीमपुर खीरी कांड के बाद क्या अलग-थलग पड़ते जा रहे अजय मिश्र: न तो संगठन भाव दे रहा, न ही सरकार पूछ रही
लखनऊ, 09 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में पिछले रविवार को हुए लखीमपुर खीरी कांड में आठ लोगों की मौत हो गई थी। मौत के बाद केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनके बेटे के उपर आरोप लग रहे हैं। बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ नामजद एफआईआर भी कई गई है। पूछताछ के लिए पुलिस दो बार समन भेज चुकी है लेकिन वह अभी पुलिस के समाने पेश नहीं हुए हैं। आशीष के पिता लगातार इस बात की सफाई दे रहे हैं कि उनका बेट घटना स्थल पर मौजूद नहीं था। घटना के बाद उन्होंने अमित शाह से मुलाकात कर अपनी बात रखी थी। शुक्रवार को वह लखनऊ आए थे लेकिन न तो संगठन ने उनको भाव दिया न ही सरकार की आधिकारिक बैठक में उनको बुलाया गया। यानी इस मामले के बाद वो संगठन-सरकार में अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। उपर से सुप्रीम कोर्ट के रुख से आने वाले दिनों में अजय मिश्र के लिए और भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

बीजेपी कार्यालय पहुंचे अजय मिश्रा हुए उपेक्षा का शिकार
शुक्रवार को अजय मिश्रा टेनी शुक्रवार को लखनऊ स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे थे। बताया जा रहा था कि वो अवध क्षेत्र के सांसदों एवं विधायकों की बैठक में शामिल होने आए हैं लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि अजय मिश्रा अवध क्षेत्र की बैठक में मौजूद नहीं थे। बीजेपी के सूत्रों का दावा है कि अमूमन जब कोई केंद्रीय मंत्री कार्यालय आता है तो काफी चहल पहल रहती है और उस मंत्री की मुलाकात प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री से जरूर होती है। औपचारिक तौर पर मुख्यमंत्री से भी मुलाकात होती है। लेकिन अजय मिश्रा के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

स्वतंत्रदेव सिंह और सुनील बंसल ने बनाई दूरी
लखीमपुर खीरी कांड के बाद पहली बार लखनऊ आए अजय मिश्रा बीजेपी कार्यालय तो पहुंचे लेकिन उनकी मुलाकात प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और संगठन मंत्री सुनील बंसल से भी नहीं हो पाई। वह लगभग आधे घंटे तक कार्यालय में रहे और फिर वहां से वीवीआईपी गेस्ट हाउस चले गए। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री दोनों शहर में ही थे लेकिन उनसे मुलाकात न होने के मायने आप खुद ही समझ सकते हैं। दो गाड़ियों के काफिले के साथ कार्यालय पहुंचे अजय मिश्रा उल्टे पांव गेस्ट हाउस चले गए।

अवध क्षेत्र की बैठक में भी अजय मिश्रा को नहीं बुलाया गया
संगठन से उपेक्षा होने के बाद अजय मिश्रा को आस थी कि सीएम आवास पर अवध क्षेत्र की बैठक में उन्हें जरूर बुलाया जाएगा लेकिन उनकी यह मंशा भी पूरी नहीं हुई। अजय मिश्रा पांच कॉलीदास मार्ग पर होने वाली बैठक में नहीं बुलाए गए। यहां सभी सांसदों, विधायकों को बुलाया गया था जिसमें खुद सीएम योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और संगठन मंत्री सुनील बंसल भी मौजूद थे। सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक लखीमपुर कांड के बाद से ही सीएम काफी नाराज चल रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि चुनावी साल में जब अपने नेता और मंत्री ही इस तरह की लापरवाही बरतेंगे तो फिर विपक्ष तो वैसे भी भूखे भेड़िए की तरह मुंह बाए खड़ा है। इसलिए उन्होंने अजय मिश्रा से मुलाकात करने से मना कर दिया।

सांसद विधायकों की बैठक में लखीमपुर कांड पर चर्चा
नफा नुकसान का आंकलन करने के लिए आंकलन करने के लिए ही शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवध क्षेत्र के सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाई थी जिसमें इस कांड के बाद होने वाले संभावित नुकसान पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक सीएम योगी आदित्यनाथ ने नाम न लिए बगैर सभी सांसदों और विधायकों को सख्त हिदायत दी कि मंत्री, सांसद या विधायक किसी तरह के विवाद में न पड़ें और परिवार के लोगों को लेकर राजनीति बिल्कुल न करें। चुनाव सामने है इसलिए सभी लोग अपने काम पर फोकस करें तो बेहतर होगा।

योगी ने कहा- परिजनों को नेतागिरी करने से रोकें
अवध क्षेत्र के सांसदों, विधायकों की बैठक में सीएम योगी के अलावा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और संगठन मंत्री सुनील बंसल भी मौजूद थे। बैठक में योगी ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का नाम लिए बगैर सबको सतर्क रहने की नसीहत दी। सीएम ने कहा कि सांसद- विधायक आप हैं आपके परिवार वाले नहीं हैं। इसीलिए परिवार के लोग किसी तरह की राजनीति न करें तो बेहतर होगा। चुनाव में जाना है तो आपका हर एक कदम काफी महत्वपूण है। सरकार के 100 दिन के 100 काम अभियान को घर-घर पहुंचाने और बूथ विजय अभियान को लेकर पार्टी के कार्यक्रमों को पूरी गंभीरता से लें।

तराई बेल्ट में नफे नुकसान का किया आंकलन
बैठक में मौजूद रहने वाले एक विधायक ने बताया कि कि बैठक में लखीमपुर खीरी कांड के बाद जो माहौल बना है। उसपर चर्चा की गई। बैठक में कई विधायकों और सांसदों ने अपनी राय रखी थी। सबका यही कहना था कि इस कांड के बाद तराई बेल्ट में स्थितियां बिगड़ रही हैं। समय रहते इसको नहीं संभाला गया और यह आग यदि चुनाव तक सुलगती रही तो पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए सभी सांसदों और विधायकों को अपने अपने क्षेत्रों में अलर्ट रहने को कहा गया है। खासतौर से सिख बाहुल्य इलाकों में संगठन की तरफ से कई कार्यक्रम लगाए जाएंगे ताकि उनके गुस्से को किसी तरह शांत किया जा सके।

सप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई योगी सरकार की परेशानी
दरअसल, शुक्रवार को लखीमपुर खीरी कांड में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार की ओर से अब तक की गई जांच पर भी असंतोष जताया। इसके बाद इसने यूपी सरकार को एक वैकल्पिक एजेंसी के शीर्ष अदालत को अवगत कराने का आदेश दिया जो जांच कर सकती है। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह अपने राज्य के पुलिस प्रमुख को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दे कि जब तक कोई अन्य एजेंसी अपने हाथ में न ले ले, तब तक मामले में सबूत सुरक्षित रहे।












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