उज्जैन ब्लास्ट के आरोपियों के निशाने पर था लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा

उज्जैन ब्लास्ट के आरोपियों के निशाने पर था लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा, बाराबंकी की दरगाह और मुस्लिम धर्मगुरु

लखनऊ। मध्य प्रदेश पुलिस ने भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में ब्लास्ट के आरोप में जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था उसमें से एक आरोपी ने बड़ा खुलासा किया है। आरोपी में एनआईए की पूछताछ में बताया है कि उनका गुट उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर ब्लास्ट करने की योजना बना रहा था जिसमें बाराबंकी की दरगाह और लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा और शिया धर्मगुरु शामिल थे।

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सुरक्षा व्यवस्था के चलते रद्द की योजना
एनआईए के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो सैयद मीर हसन जोकि तीन में से एक आरोपी है, उसे होसंगाबाद के पिपरिया से गिरफ्तार किया गया था। मीर ने पूछताछ में बताया कि बाराबंकी में वारिस अली शाह दरगाह पर हमले की वह योजना बना रहा था, इसके लिए उन्होंने पूरे दिन यहां की आने-जाने वालों व सुरक्षा व्यवस्था की की रेकी की। मीर ने बताया कि जिस तरह की भारी सुरक्षा व्यवस्था थी उसे देखते हुए हमने हमले की योजना को रद्द कर दिया था।

मुस्लिम धर्मगुरु भी थे निशाने पर
इन आरोपियों की हिट लिस्ट में लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा और शिया धर्मगुरु मौलाना सलमान हुसैन नदवी भी थे। आरोपी ने एनआईए को बताया कि उन लोगों ने मौलाना के घर और उनके आने-जाने पर भी नजर रखी, इन लोगों ने उनके घर की भी तस्वीर ली, इसके अलावा यहां दो गाड़ी बोलेरो और स्कोडा की भी तस्वीर ली थी। आपको बता दें कि सैयद मीर हुसैन, मोहम्मद दानिश और आतिफ मुजफ्फर को पिपरिया से गिरफ्तार किया गया था। जबकि चौथा आरोपी सैफुल्ला लखनऊ में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। एनआईए ने सात में से तीन आरोपियों को 27 मार्च को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की जिसमें हुसैन, आतिफ और दानिश शामिल हैं।

शरिया कानून लागू कराना था लक्ष्य
हुसैन ने एआईए की पूछताछ में बताया कि वह लखनऊ में कई जगहों पर गए और उन्होंने अपना निशाना चुना, इसके पीछे का लक्ष्य था अपने विरोधियों को निशाना बनाना, शरिया कानून को लागू कराना, जिहाद कराना, ब्लास्ट कराना और चुनिंदा जगहों पर लोगों की हत्या करना, इसके बाद इन लोगों का लक्ष्य था अरब देशों में भाग जाना। एनआईए के सूत्रों की मानें तो हुसैन, दानिश, आतिफ, सैफुल्ला फरवरी के पहले हफ्ते में ही बाराबंकी पहुंचे थे और इन लोगों ने यहा के मजार की तस्वीर ली थी।

बारीकी से की मजार और इमामबाड़ा का मुआयना
आरोपियों ने बाराबंकी की चार जगहों को चुना था जहां इन लोगों ने ब्लास्ट करने की योजना बनाई थी, पहली जगह मजार के पास एक छोटा सा कमरा है जहां काफी लोग इकट्ठा होते हैं, दूसरी जगह प्रवेश और निकास द्वार जहां लगो अपने जूते उतारते हैं और कव्वाली सुनने जाते हैं। सूत्रों की मानें तो इन लोगों ने शुक्रवार को मजार में आने वाली भीड़ की तस्वीर भी ली थी। इन लोगों ने अपनी रेकी से यह निष्कर्ष निकाला कि सुबह 9 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक सबसे अधिक भीड़ होती है और यहां भारी पुलिस बल मौजूद रहता है, इसी वजह से इन लोगों ने फैसला लिया कि वह यहां बम लगा सकते हैं। फरवरी की आखिरी तीन शुक्रवार को इन लोगों ने लखनऊ के बड़ा इमामबाड़ा का भी मुआयना किया, यहां भी लोग नमाज के लिए इकट्ठा होते हैं, इस जगह की भी इन लोगों ने तस्वीर ली।

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