इसबार 34 मुसलमान जीते, सभी SP-RLD गठबंधन के उम्मीदवार, पिछली बार से इतनी बढ़ गई संख्या
लखनऊ, 11 मार्च: उत्तर प्रदेश में इसबार 34 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे हैं। यह संख्या पिछली बार की तुलना में काफी ज्यादा है। ये सारे के सारे मुस्लिम उम्मीदवार सपा और आरएलडी गठबंधन के टिकट पर चुनाव जीते हैं। वैसे कांग्रेस और बसपा ने भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। ओवैसी की पार्टी ने 100 में से अधिकतर मुस्लिमों पर ही दांव लगाया था। लेकिन, किसी को मुस्लिम वोट नहीं मिल सका और मुसलमानों ने लगता है कि सिर्फ समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन पर ही अपना भरोसा जताने का काम किया है।

उत्तर प्रदेश चुनाव में इसबार जीते 34 मुसलमान
यूपी में चुनाव में इसबार एनडीए की ओर से अपना दल (सोनेलाल) ने भी एक मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया था। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी ने स्वार विधानसभा सीट से हैदर अली खान पर दांव लगाया था। लेकिन, वह समाजवादी पार्टी के अब्दुल आजम से 61,000 से भी अधिक वोटों से गच्चा खा गए। राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र द्विवेदी का कहना है कि मुस्लिम उम्मीदवार सिर्फ अपने समुदाय के वोट के भरोसे चुनाव नहीं जीत सकते। उन मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिलती है, जिनकी पार्टी का अपना अच्छा जनाधार होता है। उन्होंने मुस्लिम-यादव गठजोड़ की बात करते हुए बताया, 'मुस्लिम उम्मीदवार सिर्फ मुसलमानों के वोट के भरोसे नहीं जीत सकते। उन्हें पार्टी के जनाधार की जरूरत पड़ती है। उदाहरण के लिए समाजवादी पार्टी का कोर वोट बैंक यादव है।'

ओवैसी की पार्टी को इस वजह से नहीं मिले वोट
उनका यह भी कहना है कि 'मुसलमानों को लगा कि सिर्फ समाजवादी पार्टी ही बीजेपी को हरा सकती है।' यही नहीं उनका कहना है कि कांग्रेस के पास अपना कोई वोट बैंक नहीं है और इसलिए उसके उम्मीदवारों को जीतने का कोई चांस ही नहीं था। जब, एक ऊर्दू अखबार के हिसाम सिद्दीकी से एआईएमआईएम के बेकार प्रदर्शन के बारे में पूछा गया तो वे बोले,'यूपी के मुसलमान अच्छी तरह से जानते हैं कि सिर्फ मुस्लिम वोट के भरोसे रहकर कोई चुनाव नहीं जीत सकता। इसीलिए वो असदुद्दीन ओवैसी से सहमत नहीं हैं और उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है।' उनके मुताबिक ओवैसी की रैलियों में मुस्लिम बड़ी तादाद में जुटे, लेकिन उन्हें वोट नहीं दिया। एआईएमआईएम को सिर्फ 0.49% वोट मिले हैं।

यूपी विधानसभा में इसबार 10 मुसलमान ज्यादा पहुंचे
सिर्फ सपा और रालोद गठबंधन के हक में वोट करके ही यूपी के मुसलमानों ने इसबार पिछली बार के 24 के मुकाबले अपने विधायकों की संख्या में 10 का इजाफा करते हुए इसे 34 के आंकड़े तक पहुंचा दिया है। सपा के टिकट पर जो मुसलमान एमएलए बने हैं, वे हैं- आजम खान-रामपुर, महबूब अली-अमरोहा, अताउरर्हमान- बहेड़ी, उमर अली खान-बेहट, जाहिद-भदोही, शहजिल इस्लाम-भोजीपुरा, मोहम्मद फहीम-बिलारी, नसीर अहमद- चमरौआ, नफीस अहमद-गोपालपुर, मोहम्मद ताहिर खान-इसौली, मोहम्मद हसन- कानपुर कैंट, कमाल अख्तर-कांठ, शाहिद मंजूर-किठौर, जियाउर रहमान- कुंदरकी, अरमान खान-लखनऊ पश्चिम, मारिया- माटेरा, रफीक अंसारी- मेरठ, सुहैब-मोहम्मदाबाद और मोहम्मद नासिर- मुरादाबाद ग्रामीण। समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले मुसलमानों की लिस्ट अभी बाकी है। जैसे तसलीम अहमद- नजीबाबाद, आलम बदी-निजामाबाद, नादिरा सुल्तान- पटियाली, फरीद महफूज किदवई-रामनगर, इकबाल मेहमूद-संभल, जियाउद्दीन रिजवी-सिकंदरपुर, हाजी इरफान सोलंकी-सिसामऊ, नवाब जान-ठाकुरद्वारा, सैयदा खातून- डुमरियागंज और आशु मलिक- सहारनपुर।

सपा के सहयोगियों के मुसलमान उम्मीदवार भी बने विधायक
इनके अलावा गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के विवादित बेटे अब्बास अंसारी ने सपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की टिकट पर मऊ से और आरएलडी के टिकट पर गुलाम मोहम्मद सिवालखास से और अशरफ अली ने थानाभवन विधानसभा क्षेत्रों से जीत दर्ज की है। इस तरह से सपा गठबंधन की सीटों में जो बड़ा इजाफा हुआ है,उसमें मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत का भी बड़ा योगदान है।












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