तो क्या योगी फैक्टर ने शिवराज को कराया BJP संसदीय बोर्ड से बाहर, जानिए इसकी वजहें

लखनऊ, 17 अगस्त: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बुधवार को संसदीय बोर्ड की लिस्ट जारी की। इसमें सबसे चौकाने वाला फैसला मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर रहा। बीजेपी के सबसे ताकतवर बोर्ड में शामिल नहीं किए जाने के पीछे राजनीतिक विश्लेषक कई वजहें मान रहे हैं। हालांकि बीजेपी के सूत्र इस बात का दावा कर रहे हैं कि एक तरफ जहां इस बोर्ड में चुनावी राज्यों के चेहरों को शामिल कर जातीय संतुलन साधने की कोशिश की गई वहीं दूसरी ओर सीएम योगी आदित्यनाथ फैक्टर की वजह से मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी संसदीय बोर्ड से बाहर होना पड़ा।

योगी को संसदीय बोर्ड में लाने का पक्षधर था संघ का एक धड़ा

योगी को संसदीय बोर्ड में लाने का पक्षधर था संघ का एक धड़ा

बीजेपी के सूत्रों की माने तो संघ का एक धड़ा योगी को संसदीय बोर्ड में शामिल करने का पक्षधर था। वह लगातार योगी को शामिल करने का दबाव बना रहा था। लेकिन बीजेपी आलाकमान ने योगी को संसदीय बोर्ड में शामिल करने की हरी झंडी नहीं मिल पाई। सूत्रों की माने तो ऐसा माना जा रहा था कि यूपी जैसे सबसे बड़े राज्य का सीएम होने के बावजूद संसदीय बोर्ड में शामिल न होना अपने आप में हैरान कर देने वाला है। योगी पिछले 6 साल में एक ताकतवर मुख्यमंत्री और हिन्दूवादी छवि के नेता के रूप में उभरने में कामयाब रहे हैं। बीजेपी आलाकमान के उपर इस बात का दबाव था कि योगी को बोर्ड में शामिल किया जाए लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

योगी फैक्टर ने शिवराज को कराया संसदीय बोर्ड से बाहर

योगी फैक्टर ने शिवराज को कराया संसदीय बोर्ड से बाहर

बीजेपी के सूत्रों की माने तो योगी को संसदीय बोर्ड में शामिल होने की मंजूरी नहीं मिल पाई तब शिवराज सिंह को भी बोर्ड से हटाने का निर्णय लिया गया ताकि ये संदेश जाए कि संसदीय बोर्ड में किसी सीएम को जगह नहीं दी गई है। यदि किसी बीजेपी शासित राज्य के सीएम को बोर्ड में जगह दी जाती और योगी शामिल नहीं होते तो यह पार्टी के अंदर और बाहर गलत मैसेज जाता और ये यूपी में बीजेपी के लिए नुकसानदायक साबित होता। बीजेपी ने जिस संसदीय बोर्ड की घोषणा हुई है उसमें से शिवराज को हटा दिया गया।

यूपी में योगी के चेहरे पर बीजेपी को मिली थी जीत

यूपी में योगी के चेहरे पर बीजेपी को मिली थी जीत

दरअसल यूपी में चार महीने पहले सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शानदार सफलता मिली थी। योगी अपने दम पर सरकार में आने में सफल रहे। यूपी के इतिहास में 37 साल के बाद ऐसा मौका आया था जब लगातार दूसरी बार किसी पार्टी की सरकार बनी थी। इससे योगी की सफलता से जोड़कर देखा जा रहा था। इसलिए चुनाव के बाद से ही ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार योगी को देश के सबसे बड़े सूबे का मुख्यमंत्री होने के नाते संसदीय बोर्ड में जगह जरूर मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्हें इसमें शामिल होने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

नितिन गडकरी और शिवराज का हटना चर्चा का विषय

नितिन गडकरी और शिवराज का हटना चर्चा का विषय

दरअसल , केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को भाजपा के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले संसदीय बोर्ड से हटा दिया गया वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिन्होंने राज्य में दूसरी बार बीजेपी की सरकार बनवाने में अहम भूमिका अदा की उनको इसमें शामिल नहीं किया गया। योगी के इस बोर्ड में न शामिल होने से उनके समर्थकों के बीच निराशा का माहौल है।

संसदीय बोर्ड में 6 नए चेहरे शामिल किए गए

संसदीय बोर्ड में 6 नए चेहरे शामिल किए गए

पार्टी के पुनर्गठित संसदीय बोर्ड, जिसमें छह नए चेहरे हैं उनमें बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव और सत्यनारायण जटियाशमाल हैं। इसके अलावा पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इसमें जगह पाने में कामयाब हुए हैं। यह संसदीय बोर्ड भाजपा में शीर्ष निकाय है और मुख्यमंत्रियों, राज्य प्रमुखों और अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं पर निर्णय लेता है। महत्वपूर्ण समिति से नितिन गडकरी का गायब होना सबसे बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

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