यूपी में फर्जी डिग्री बनाने वाले गैंग का भंडाफोड़, 7 राज्यों में फैला था नेटवर्क
मेरठ। मेरठ पुलिस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षा माफियाओं के गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक कांग्रेसी नेता सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को इनके पास से डेढ़ सौ से भी अधिक फर्ज़ी डिग्री, मार्कशीट और अन्य चीजें बरामद हुई हैं। पकड़े गए लोगों ने अब तक करीब 10 हजार से भी अधिक लोगों को फ़र्ज़ी डिग्री बेची है, फ़िलहाल गैंग का एक सदस्य फरार है। इन लोगों ने तीन बोर्ड सहित 7 राज्यों के विश्वविद्यालयों में अपना नेटवर्क फैला रखा था।

पिछले दिनों महिला भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर की डिग्री की जांच के बाद डिग्री फ़र्ज़ी पाई गई थी, इसके बाद पुलिस भी हरकत में आई गई थी। मेरठ पुलिस ने एक ऐसे गैंग का खुलासा किया है जो एक नहीं बल्कि सात राज्यों से जुड़े शिक्षण संस्थानों की मार्कशीट,डिग्री,सार्टिफिकेट,डिप्लोमा,और प्रमाण पत्र फ़र्ज़ी बनाने का गोरखधंधा चला रहा था। पुलिस ने इस गैंग के पांच सदस्यों को पकड़ा है जबकि इस गैंग का सरगना अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस ने इस गैंग के पास से भारी मात्रा में फर्जी मार्कशीट,डिग्री,ओर प्रमाण पत्र बरामद किया है।
यह गिरोह यूपी के साथ झारखंड ,दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान,हिमचाल प्रदेश और पंजाब के अलग अलग शिक्षण संस्थाओं की फर्जी मार्कशीट बनाता था। पुलिस ने बताया कि ये गैंग बीस हज़ार से लेकर तीन लाख रूपये तक में डिग्री बनाने का गोरखधंधा धंधा करता था। पुलिस की पकड़ में आए उमाशंकर, कांग्रेस का नेता है। वे मेरठ की चौधरी चरण सिंह विश्विधालय से पीएचडी होल्डर भी हैं। पुलिस का कहना है कि इनके पास से हाई स्कूल और इण्टर की उत्तर प्रदेश का गजट भी मिला है और सुभारती यूनिवर्सिटी की 4 परीक्षा कॉपियां भी बरामद की हैं।
फिलहाल पुलिस इनके नेटवर्क को खंगाल रही है, इनका नेटवर्क काफी बड़ा है और इस गैंग में और बड़े लोग शामिल हो सकते हैं। इनके पास यूपी बोर्ड का वो गैजेट भी है, जो बिना विभाग की सहमति या अधिकारी की मिली भगत नहीं निकल सकता ये साफ ज़ाहिर है सभी यूनिवर्सिटी और बोर्ड में इनके लोग घुसे हुए हैं, जो इनके एक इशारों पर इनको डाटा मुहैया करा दिया करते थे। पुलिस कांग्रेसी नेता की डिग्री की भी जांच कर रही है।
मेरठ में इससे पहले भी कॉपी बदलने वाले गैंग का एसटीएफ ने खुलासा किया था जो एमबीबीएस की कॉपी विवि में बदल कर मोटी रकम वसूल करते थे। जिन्होंने भी सैकड़ो डॉक्टर बनकर फ़र्ज़ी खड़े कर दिए थे। उस खुलासे के बाद ये और एक और बड़ा खुलासा हुआ है।












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