अखिलेश यादव ने UP विधानसभा की सदस्यता से दिया इस्तीफा, कौन बनेगा यूपी में नेता प्रतिपक्ष?
Akhilesh Yadav resigned , लोकसभा चुनावों में कन्नौज सीट से सांसद चुने गए सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने करहल विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। वह अब केंद्र की राजनीति करेंगे। अभी तक वह करहल से विधायक और यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर थे।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने बताया कि, अखिलेश यादव की ओर से इस्तीफा भेजा गया था। जिसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। इससे पहले सपा के विधायक लालजी वर्मा भी इस्तीफा दे चुके हैं। लालजी वर्मा भी लोकसभा सदस्य चुने गए हैं।

यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा 37 सीटें जीत कर लोकसभा में तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। जिसके बाद समाजवादी पार्ट के कई विधायकों ने इस्तीफा दिया है। जो लोकसभा के लिए चुने गए हैं। यूपी में करीब ऐसी नौ विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।
अखिलेश यादव की जगह यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद कौन संभालेगा इस पर मंथन शुरू हो गया है। इस रेस में सबसे आगे चाचा शिवपाल सिंह यादव का नाम चल रहा है। शिवपाल यादव के अलावा सपा महासचिव राम अचल राजभर और इंद्रजीत सरोज का नाम भी इस रेस में चल रहा है। हालांकि अंतिम फैसला अखिलेश यादव ही लेंगे।
ऐसी भी खबरें आ रही है कि, अखिलेश पीडीए का शानदार सफलता को देखते हुए किसी अन्य को भी यह महत्वपूर्ण पद दे सकते हैं। खबरों की माने तो कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव ऐसे शख्श को नेता प्रतिपक्ष बनाना चाह रहे हैं, जिससे पीडीए का साफ संदेश जनता तक पहुंच सके। हाल ही में अखिलेश यादव ने कहा कि इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी पार्टी किसी ऐसे व्यक्ति को देगी जो पार्टी को मजबूती देने के साथ-साथ विपक्ष की आवाज को सदन में बुलंद कर सके।
शिवपाल सिंह यादव
अखिलेश यादव के चाचा और जसवंतनगर विधानसभा से 6 बार विधायक चुने गए शिवपाल सिंह यादव को नेता प्रतिपक्ष का कमान सौंपी जा सकती है। उनके पास इसका अनुभव भी है और पार्टी संगठन में जबरदस्त पकड़ भी है। यही नहीं 2009 में शिवपाल सिंह यादव नेता प्रतिपक्ष का पद संभाल भी चुके हैं। जो उन्हें इस रेस में सबसे आगे रखता है। उनके पास सरकार और संगठन दोनों का लंबा अनुभव है।
अखिलेश यादव शिवपाल को नेता प्रतिपक्ष बनाकर एक तीर से कई निशाने साधने की भी कोशिश में हैं। शिवपाल को लेकर बार-बार नाराज होने की खबर चलती है जिसे लेकर सीएम योगी और बीजेपी लगातार तंज कसते रहते हैं। ऐसे में वह शिवपाल यादव को यह पद देकर ये संदेश देने चाहेंगे कि, चाचा-भतीजे के बीच को मतभेद नहीं हैं। इसके अलावा सदन में योगी आदित्यनाथ जैसे नेता के सामने एक मझा हुआ राजनीतिज्ञ चाहिए, जिसके लिए शिवपाल एक दम फिट हैं।
इंद्रजीत सरोज
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सरोज मंझनपुर विधानसभा से अब तक चार बार विधायक रहे। 2018 में बहुजन समाज पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए इंद्रजीत सरोज की दलित समाज में अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में पार्टी इन्हें भी नेता प्रतिपक्ष बना सकती है। जिससे अखिलेश का पीडीए वाला संदेश पूरे राज्य में पहुंचाने में सफलता मिलेगी। इंद्रजीत सिंह सरोज भी सपा अध्यक्ष के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हैं। इंदरजीत के पास भी सरकार में रहने का लंबा अनुभव है। वह मायावती सरकार में परिवहन और कल्याण मंत्री रह चुके हैं।
रामअचल राजभर
अति-पिछड़ा जाति से आने वाले रामअचल राजभर भी इस रेस में शामिल हैं। अकबरपुर सीट से विधायक हैं। राजभर भी छह बार के विधायक रह चुके हैं। मायावती सरकार में वो परिवहन मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी अति पिछड़ी जातियों में अच्छी पकड़ मानी जाती है। यही नहीं रामअचल राजभर वर्तमान में विधान सभा में सदन में विपक्ष के उपनेता भी हैं और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं। ऐसे में उनको भी नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की प्रबल संभावनाएं हैं।
कमाल अख्तर
मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे कमाल अख्तर सपा के पुराने नेताओं में से एक हैं। राज्यसभा सांसद रहे कमाल 2012 में पहली बार अमरोहा की हसनपुर सीट से चुनाव जीतकर यूपी सरकार में मंत्री बने थे। 2022 में सपा ने मुरादाबाद की कांठ सीट से विधानसभा का टिकट दिया और वह चुनकर विधानसभा पहुंचे। पार्टी पीडीए की रणनीति के तहत उन्हें भी नेता प्रतिपक्ष बना सकती हैं।












Click it and Unblock the Notifications