PICs: बाढ़ की चपेट में ढह गया स्कूल, ऐसे संवारे जा रहे हैं बच्चों के भविष्य
इस मुश्किल घड़ी में न तो कटान पीड़ितों के पास खाने को दाना है, न रहने को ठिकाना और तो और लाड़ले के भविष्य संवारने को जेब में फूटी कौड़ी तक नहीं है।
बहराइच। बहराइच में घाघरा की कटान में अस्तित्व खो चुके प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों का पेड़ों के नीचे भविष्य संवारा जा रहा है। यहां पर बच्चों को बारिश से बचने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। मौसम की मार झेल रहे बच्चे अपने भविष्य को संवारने में जुटे हैं। ऐसे में बच्चों के लिए शुद्ध पानी और शौचालय तो दूर की कौड़ी है। मिड-डे भोजन कहां बने, ये सवाल लोगों के जेहन में कौंध रहा है। शिक्षक भी किसी तरह अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।


महसी तहसील क्षेत्र में प्रवेश करते ही घाघरा की विभीषका का सहज ही अहसास हो जाता है। घाघरा में गांव व घर ही नहीं समाएं बल्कि विद्यालय भवन को भी क्रूर लहरें अपने साथ समेट ले गई। मगरवल व सुकईपुर गांव राजस्व अभिलेखों में दर्ज है लेकिन धरातल पर ये घाघरा की बीच धारा में है। ऐसे में इन गांवों के लोग तटबंधों पर बसेरा जमाए हुए हैं। बच्चे कायमपुर स्कूल के अधकटे भवन में पढ़ रहे थे। कायमपुर का ये स्कूल भवन भी पिछले दिनों बाढ़ में कट गया। ऐसे में बच्चों की शिक्षा पर संकट मंडरा रहा है। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में न तो कटान पीड़ितों के पास खाने को दाना है, न रहने को ठिकाना और तो और लाड़ले के भविष्य संवारने को जेब में फूटी कौड़ी तक नहीं है। बेघर, बेसुध पीड़ित अपने भाग्य को कोस रहे हैं तो बच्चों के भविष्य की चिंता उन्हें खाए जा रही है। सरकारी अफसरान भी इन बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं हैं। तभी तो पेड़ की छांव के नीचे प्रभावितों के बच्चे अपना भविष्य संवारने की जद्दोजहद कर रहे हैं।


प्राथमिक विद्यालय कायमपुर में 103 छात्र-छात्रएं पंजीकृत हैं। प्रधान अध्यापक प्रमोद कुमार ने बताया कि नियमित बच्चों की काफी उपस्थिति रहती है। प्राथमिक विद्यालय सुकईपुर में 86 छात्र-छात्रएं पंजीकृत हैं। प्रधान शिक्षक विनोद कुमार बच्चों को खुले में उनके भविष्य को संवारने का प्रयास कर रहे हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय मंगरवल में 81 छात्र छात्रएं पंजीकृत हैं। प्रधान शिक्षक आनंद प्रकाश मिश्र किसी तरह अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।












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