'तुम तो हमाए आशीवाद से हमाई छाती पे दाल दल्लए हो टीपू'

सोची तो बहुत कुछ अक्लेस हमने.. फिर बाद में सोची कि जित्ती हो गई वोई बहुत है, इससे ज्यादा क्या बेइज्जती कराएं। यही सोच के हमने चुनाव लड़ने का विचार छोड़ दिया।

नई दिल्ली। एक तरफ अखिलेश हैं कि मुलायम से बचने की कोशिश करते रहते हैं और एक तरफ मुलायम हैं कि अखिलेश को छोड़ने का नाम नहीं ले रहे। अब पार्टी पर तो मुलायम का कोई अधिकार बचा नहीं तो उन्होंने अखिलेश से अपनी पसंद के कुछ लोगों को टिकट देने की बात कही।

अपने पसंद के लोगों की एक लिस्ट भी अखिलेश को सौंप दी लेकिन अखिलेश के पिछले कुछ दिनों के तेवर देखते हुए मुलायम के मन में धुकधुकी सी हो रही थी। मुलायम को जब पता चला कि अखिलेश उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर रहे हैं तो घर के दरवाजे के बाहर आकर बैठ गए और जैसे ही अखिलेश पार्टी कार्यालय से लौटे, उन्हें लपक लिया।

तुम तो हमाए आशीवाद से हमाई छाती पे दाल दल्ले हो टीपू

नेताजी- अक्लेस... अरे अक्लेस... यहां आओ. तुमने निकाल ली अपने दिल की? अब तो तुम बन गए अध्यक्ष.. हैंए? कैसा लग रहा है, बाप का इंतजाम करके?

अखिलेश- अच्छा लग रहा है नेताजी, आपके आशीर्वाद से सब ठीक है।

नेताजी- हूं! हमाए आशीवाद से हमाई छाती पे दाल दल्लए हो टीपू... तुम तो हमाई...

अखिलेश- नेताजी, आप कैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हो। आप ही तो सर्वेसर्वा हैं। मुझे खुशी है कि आपने मुझे आशीर्वाद दिया और अलग इलेक्शन लड़ने की नहीं सोची।

नेताजी- सोची तो बहुत कुछ अक्लेस हमने.. फिर बाद में सोची कि जित्ती हो गई वोई बहुत है, इससे ज्यादा क्या बेइज्जती कराएं। हम लड़ते भी कैसे अक्लेस, तुम सभी कुछ तो ले उड़े। हम और सिप्पाल क्या जनता के बीच जाकर मदारी-जमूरे का खेल दिखाते।

अखिलेश-अब आप ये सब बातें मत करिए, इलेक्शन सिर पर है।

नेताजी- हम्म.. ये बताओ कित्ते उमीदवारों के नाम फाइनल किए?

अखिलेश- अरे यार क्या है... नेताजी, हम देख रहे हैं चुनाव, कर रहे हैं, सब ठीक-ठीक कर रहे हैं।

नेताजी- ठीक-ठीक... सबसे पहले तो तूने हमें ही ठीक किया है। अब जिसको करना हो ठीक, उसको कर ले। ये बता, कित्ते पत्याशी डिक्लेयर किए?

अखिलेश- 200 से ज्यादा कर दिए हैं।

नेताजी- हमने 200 नई पूछे.. हम जो दिए थे लिस्ट, 40-42 नाम की... उसका क्या हुआ?

अखिलेश- उनमें से भी दिए हैं टिकट, कुछ के फाइनल हो गए हैं। मैं सबका ध्यान रख रहा हूं।

नेताजी-अच्छा, तो फिर अपर्णा को टिकट क्यों नहीं दिए।

अखिलेश- मैंने शिवपाल चाचा को टिकट दिया है और भी आपकी मर्जी के हिसाब से टिकट दिए गए हैं।

नेताजी- अरे कहां दिए हो हमाई मर्जी से... शिवपाल के बेटे को नहीं दिए, अपन्ना को नहीं दिए, अतीक का काट दिए.. टिकट

अखिलेश- देखिए नेताजी, हम दागियों को टिकट ना देंगे।

नेताजी- जितनी तेरी उम्र है उससे ज्यादा साल हो गए राजनीति करते हुए। ये राजनीति और अपराधी की बातें हमें मत बता। बता किस पाटी का पोल खोलें हम?

अखिलेश- नेताजी, आप बेफिक्र रहें. हम देख रहे हैं ना चुनाव, कर लेंगे खुद से मैनेज।

नेताजी- तो हमाए 40 लोगों को टिकट ना दोगे?

अखिलेश- 40 तो मुश्किल हैं लेकिन 10-11 को दे देंगे।

नेताजी- हे भगवान! अगले जन्म मोहे बिटिया ही दी जो....

(यह एक व्यंग्य लेख है)

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