2024 लोकसभा चुनाव तक जातीय जनगणना के मुद्दे को जिंदा रखेगी Samajwadi Party, जानिए गेम प्लान
सपा ने जातीय जनगणना के मामले को लेकर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। इसका जिम्मा पार्टी के ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप को दिया है। सूत्रों की माने तो सपा सम्मेलनों को 2024 के लोकसभा चुनाव तक जिंदा रखेगी।

Samajwadi Party UP: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जातिगत जनगणना की अपनी मांग को जिंदा रखने की कवायद में जुटी हुई है। सपा के सूत्रों की माने तो सपा ने इस मुद्दे को व्यवस्थित तरीके से एक-एक कदम उठाने की रणनीति बनाई है। 24 फरवरी से वाराणसी से शुरू हुआ यह अभियान यूपी के सभी 822 ब्लॉकों में आयोजित किया जाएगा। इन गोष्ठियों के आयोजन का जिम्मा पार्टी के ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप को सौंपा गया है। सूत्रों की माने तो सपा की रणनीति इन सम्मेलनों को 2024 के लोकसभा चुनाव तक हर ब्लॉक में जारी रखने की है।

ये है सपा की त्रीस्तरीय रणनीति
जातीय जनगणना के मुद्दे को उजागर करने के लिए पार्टी त्रीस्तरीय रणनीति तैयार की है। पहले चरण में इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक अभियान चलाया जाएगा। दूसरे चरण में जमीनी स्तर पर सामान्य जागरूकता पैदा करने के लिए जन संपर्क कार्यक्रयों के आयोजन किए जाएंगे। तीसरे और अंतिम चरण में जाति जनगणना की मांग को लेकर इस तरह से राजनीतिक प्रदर्शन किए जाएंगे जिससे पूरे प्रदेश में एक माहौल बने कि सपा जातीय जनगणना को लेकर वाकई गंभीर है।

सपा के सदस्यों ने सदन में किया था जातीय जनगणना को लेकर हंगामा
सपा नेतृत्व गुरुवार को सदन में इस मुद्दे को रखने में कामयाब रहा, जब सपा विधायकों ने जातिगत जनगणना की मांग को लेकर हंगामा किया। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अपने संबोधन में एक कदम आगे बढ़े और इस मुद्दे पर भाजपा सहयोगी अपना दल और निषाद पार्टी तक पहुंचे। दोनों क्रमशः कुर्मी और निषाद समुदायों पर ध्यान देने योग्य प्रभाव रखते हैं। उन्होंने सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर से भी मुलाकात की।
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सभी दलों को घेरने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रही सपा
विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश द्वारा भाजपा के सहयोगियों और अन्य जाति-आधारित पार्टियों को इस मुद्दे पर सोचने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य के साथ ही भाजपा को अलग-थलग करना था। बीजेपी ने पहले ही यह कहते हुए गेंद को केंद्र के पाले में धकेल दिया था कि केवल केंद्र सरकार ही इस मुद्दे पर फैसला कर सकती है। एक विश्लेषक कुमार पंकज ने कहा, 'सपा को भरोसा है कि बीजेपी के सहयोगी इसका विरोध नहीं करेंगे।'

धार्मिक मुद्दों पर बात नहीं करेगी सपा
उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम आमतौर पर अचानक से नहीं उठाए जाते बल्कि रणनीति के एक हिस्से के रूप में अंजाम दिए जाते हैं। जातिगत जनगणना पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए पार्टी के दृढ़ संकल्प का अंदाजा बलिया में शिवपाल यादव के हालिया बयान से लगाया जा सकता है, जहां उन्होंने रामचरितमानस के मुद्दे पर बोलने से इनकार कर दिया था। शिवपाल ने कहा था कि "हम उस जाल में नहीं फंसेंगे। हम धार्मिक मुद्दों पर बात नहीं करेंगे। हम केवल जन कल्याण से सीधे जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

सपा ने किया वादा- सरकार बनी तो कराएंगे जातीय जनगणना
2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान, सपा नेताओं ने घोषणा की कि अगर वे सत्ता में आए तो वे तीन महीने के भीतर जातिगत जनगणना करवाएंगे। सूत्रों ने कहा कि इस मुद्दे को जातिगत रेखाओं से परे पिछड़े वर्गों के बीच एक मजबूत प्रतिक्रिया मिली थी। इसके बाद पार्टी ने इस मुद्दे पर तब तक ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया जब तक कि यह किसी तार्किक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच गया। अखिलेश यादव ने भी नोएडा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि बीजेपी भले ही इससे पीछे हट जाए लेकिन यूपी में सपा की सरकार बनते ही जातीय जनगणना कराई जाएगी।












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