लखनऊ विश्वविद्यालय में RSS के कार्यक्रम को लेकर छिड़ा विवाद, छात्र उतरे विरोध में
लखनऊ। हिंदू नव वर्ष के मौके पर 24 मार्च को आरएसएस लखनऊ विश्वविद्यालय में कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है, जिसको लेकर कई छात्र विरोध कर रहे हैं। इस कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, इसके खिलाफ आईएसा और लेफ्ट स्टूडेंट यूनियन के छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कैंपस में भगवाकरण को बढ़ावा दे रहा है। आईएसा के जिला सचिव नितिन राज ने बताया कि हमे यह नहीं भूलना चाहिए कि इसी विश्वविद्यालय प्रशासन ने यूनियन बजट पर एक कार्यक्रम को आयोजित करने से मना कर दिया था, लेकिन अब कैंपस के ऑडिटोरियम में आरएसएस के कार्यक्रम की इजाजत दी गई है।

आईपीएस ने ली थी राम मंदिर बनवाने की शपथ
आपको बता दें कि एलयू में यह पहला राइट विंग का कार्यक्रम नहीं आयोजित हो रहा है। इससे पहले 28 जनवरी को भी अखिल भारतीय समग्र विचार मंच ने यहां कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमे 1982 के बैच के आईपीएस अधिकारी सूर्य कुमार शुक्ला ने कई लोगों के साथ अयोध्या में जल्द राम मंदिर निर्माण की शपथ ली थी। इस शपथ के बाद काफी विवाद हुआ था और राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में था।
विश्वविद्यालय ने किया बचाव
नितिन राज ने कहा कि हम इस कार्यक्रम का पुरजोर विरोध करते हैं, प्रशासन को इस कार्क्रम के लिए इजाजत नहीं देनी चाहिए थी। इस तरह के कार्यक्रम विश्वविद्यालय की परंपरा को नुकसान पहुंचाते हैं, विश्वविद्यालय में पठन-पाठन को बढ़ावा देने का काम होता ना कि किसी एक विचारधारा को प्रमोट करने का। वहीं एलयू के प्रवक्ता एनके पांडेय ने कहा कि यह एलयू का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं है, कोई भी विश्वविद्यालय का हॉल बुक कर सकता है और कार्यक्रम का आयोजन कर सकता है बशर्ते संस्थान का शांतिपूर्ण माहौल नहीं खराब हो।
छात्रों ने किया विरोध
आईसा एलयू के सचिव शिवम चौधरी ने एलयू के इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय में आरएसएस के एजेंडे को बढ़ावा देने व भगवाकरण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह कार्यक्रम वीसी एसपी सिंह की रजामंदी से हो रहा है। वहीं ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन एसोसिएश की सचिव कविता कृष्णन ने बताया कि इस विश्वविद्यालय ने 2015 में हॉनर किलिंग के कार्यक्रम को आयोजित करने से मना कर दिया था। इस कार्यक्रम में 300 छात्र मेरे भाषण को सुनने के लिए इंतजार कर रहे थे, लेकिन हमारी बुकिंग को रद्द कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि संस्थान में एबीवीपी व आईएसा के को कार्यक्रम की अनुमति होनी चाहिए लेकिन आरएसएस के लिए क्यों दरवाजा खोला गया।












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