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ओम प्रकाश राजभर की ''Savdhaan Yatra' बागियों के लिए संदेश या अखिलेश के लिए खतरे की घंटी ?

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लखनऊ, 30 सितंबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभ चुनाव के बाद यूपी के राजनीतिक समीकरणों में काफी बदलाव आया है। बदले हुए सियासी समीकरणों के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) यूपी से लेकर बिहार तक सावधान यात्रा (Savdhaan Yatra) पर निकले हैं। राजभर की इस सियासी यात्रा के पीछे दो मकसद हैं। पहला यात्रा के बहाने अपने कार्यकताओं को सक्रिय करना और दूसरा विरोधियों और पार्टी से अलग हुए बागी नेताओं को अपनी ताकत का एहसास कराना है। खासतौर से इस यात्रा ने पूर्वांचल में सपा चीफ अखिलेश यादव (Samajwadi Party Chief Akhilesh Yadav) के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

UP के 19 जिलों से होकर गुजरेगी ये यात्रा

UP के 19 जिलों से होकर गुजरेगी ये यात्रा

राजभर ने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा विद्रोह और त्याग का जवाब सावधान यात्रा के जरिये देने की कोशिश की है। 26 सितंबर को लखनऊ से शुरू होने वाली सावधान यात्रा का मकसद अपने कैडर को एकजुट करने की है। यात्रा लखनऊ, अंबेडकर नगर, वाराणसी, आजमगढ़, बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, कुशीनगर, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, जौनपुर, गोरखपुर, महाराजगंज, चंदौली, मऊ और गाजीपर-बलिया सहित पूर्वी यूपी के 19 जिलों से होकर गुजरेगी। यात्रा बिहार में प्रवेश करेगी जहां 27 अक्टूबर को एसबीएसपी के स्थापना दिवस के अवसर पर पटना में सावधान रैली का समापन होगा।

सावधान यात्रा के जरिए बागियों को जवाब देने की कोशिश

सावधान यात्रा के जरिए बागियों को जवाब देने की कोशिश

एसबीएसपी को एक बड़ा झटका देते हुए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र राजभर ने 5 सितंबर को पार्टी के 35 अन्य पदाधिकारियों के साथ पार्टी छोड़ दी थी। ओम प्रकाश राजभर के लिए कोई राहत नहीं है क्योंकि जिले के पार्टी पदाधिकारियों को पार्टी का गढ़ माना जाता है। मऊ, गाजीपुर, जौनपुर आजमगढ़ और अंबेडकर नगर के पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था। एसबीएसपी मऊ जिला अध्यक्ष, रामजीत राजभर ने आरोप लगाया कि पार्टी प्रमुख ने परिवार के सदस्यों को बढ़ावा देने के लिए कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया था।

राजभर पर विरोधियों ने लगाया टिकट बेचने का आरोप

राजभर पर विरोधियों ने लगाया टिकट बेचने का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि एसबीएसपी प्रमुख ने 2022 के विधानसभा चुनाव के साथ-साथ पहले हुए पंचायत चुनावों में भी टिकट बेचे थे। उन्होंने कहा कि माफियासी मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को टिकट देने के लिए प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं के दावों की अनदेखी की गई। बागियों के आरोपों का खंडन करते हुए ओम प्रकाश राजभर कहा कि संगठन में वफादार और मिशनरी पार्टी के कार्यकर्ताओं को पदोन्नत किया गया था। विद्रोह को प्रतिद्वंद्वी दलों द्वारा रची गई साजिश बताते हुए कहा कि हाल ही में कुछ विद्रोही नेताओं ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि विद्रोहियों का कोई आधार नहीं था और वे पार्टी की विचारधारा के खिलाफ काम कर रहे थे।

साजिश रचने वालों को करारा जवाब देगी सावधान यात्रा

साजिश रचने वालों को करारा जवाब देगी सावधान यात्रा

पार्टी के पदाधिकारियों का दावा है कि 26 सितंबर से शुरू हुई सावधान यात्रा विद्रोहियों के साथ-साथ साजिश रचने वाले दलों को भी करारा जवाब होगा। यात्रा से पहले ही एसबीएसपी द्वारा आयोजित रैलियों को पूर्वी यूपी के साथ-साथ पड़ोसी बिहार में समर्थकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही थी। एसबीएसपी के प्रवक्ता अरूण राजभर ने कहा कि, ''समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़ने के बाद एसबीएसपी बिहार में अपना जनाधार बढ़ाने का काम कर रही है। पार्टी अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) और अत्यंत पिछड़ी जातियों (ईबीसीसी) को एसबीएसपी में शामिल होने के लिए लामबंद करने का प्रयास कर रही है। पटना में पार्टी की राज्य इकाई खोली गई है।''

पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी के लिए खतरे की घंटी ?

पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी के लिए खतरे की घंटी ?

ओम प्रकाश राजभर की सावधान यात्रा सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी को प्रभावित करने का काम करेगी। यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान राजभर ने अखिलेश के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन अब दोनों की राहें अलग-अलग हो चुकी हैं। राजभर ने बीजेपी से नजदीकीयां बढ़ा ली हैं जिससे अखिलेश ने उन्हें गठबंधन से स्वतंत्र कर दिया। विधानसभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि चुनाव के दौरान पूर्वांचल के एक दर्जन जिलों में राजभर समुदाय का समर्थन सपा को मिला था जिससे उनकी ताकत में इजाफा हुआ था। लेकिन 2024 के चुनाव में जाने से पहले राजभर का सपा से अलग होना अखिलेश के लिए एक बड़ा झटका था जिसकी भरपाई कैसे होगी ये बड़ा सवाल है।

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English summary
Om Prakash Rajbhar's 'Savdhaan Yatra' is a message for the rebels or an alarm bell for Akhilesh?
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