फूलपुर उपचुनाव से राहुल गांधी ने किया किनारा, जानिए कांग्रेस की रणनीति
इलाहाबाद। फूलपुर लोकसभा चुनाव के मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के समीकरण भी बिगड़ रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण कांग्रेस के बदले सियासी सुर को देखकर लगाया जा सकता है। फूलपुर लोकसभा चुनाव के लिए सबसे पहले अपने प्रत्याशी की घोषणा करने वाली कांग्रेस अब बदले समीकरण के बाद बैकफुट पर दिखाई देने लगी है। फूलपुर लोकसभा से अपनी ताकत दिखाने के मूड में रहे राहुल गांधी ने अब इस चुनाव से किनारा कर लिया है । वह अब फूलपुर में उपचुनाव के लिए कोई जनसभा करने नहीं आएंगे।

बदले समीकरणों ने राहुल को रोका
राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला ऐसा मौका होता है जब राहुल गांधी इलाहाबाद आते, लेकिन आखिरी समय में अब जब मतदान की तिथि नजदीक आ रही है, राहुल गांधी का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। माना यह जा रहा है कि मौजूदा बदले समीकरणों ने राहुल गांधी को यहां ना आने पर मजबूर कर दिया है । दरअसल ब्राह्मण वोट बैंक के सहारे कांग्रेस फूलपुर लोकसभा में लौटना चाह रही थी लेकिन मुस्लिम व बैकवर्ड वोटों पर जिस तरह से दूसरे दलों ने समीकरण तय किया है उससे कांग्रेस की हालत पतली नजर आ रही है । यह तो जगजाहिर है कि राहुल गांधी में भीड़ बटोरने की क्षमता है और इसका नमूना हमेशा दिखता भी है, लेकिन भीड़ को एकाएक वोट में बदल पाना राहुल गांधी के लिए मुश्किल होगा ।

एक रणनीति पर काम कर रहे राहुल
बीते कुछ दशक से कांग्रेस की हालत फूलपुर लोकसभा में ठीक नहीं रही है ऐसे में जल्दीबाजी दिखाकर राहुल गांधी बुलाना, उनसे जनसभा करवाना कहीं कांग्रेस की लोकसभा वाली तैयारी को प्रभावित न कर दे। इसलिये कांग्रेस ने राहुल को इस उपचुनाव से दूर ही रखा है। बता दें कि पिछली बार राहुल गांधी विधानसभा चुनाव के दौरान जब फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में आए थे तो सोरांव का रामलीला मैदान इस तरह भर गया था कि लोगों के लिए खड़े होने की जगह नहीं थी। लोग राहुल गांधी की झलक देखने के लिए पेड़ों से लेकर छतों पर चढ़ कर बैठे थे, परन्तु कांग्रेस प्रत्याशी रहे अजय पासी को भीड़ की अपेक्षा वोट नहीं मिले । अब अपनी उसी लोकप्रियता को एक रणनीति के तहत राहुल गांधी भुनाने के लिए फिलहाल आने वाले लोकसभा चुनाव का इंतजार करेंगे और कोशिश करेंगे कि उनकी जनसभा में जुटने वाली भीड़ वोट में तब्दील हो सके।

जातीय समीकरण राजनीति पर भारी
गौरतलब है कि कुर्मी बाहुल्य फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा और सपा ने दो पटेल उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है जिससे कुर्मी बिरादरी के वोट इन दोनों दलों में ही बंट जाने की उम्मीद है। इसके अलावा इस इलाके में मुस्लिम बाहुल्य मतदाता भी हैं लेकिन अतीक अहमद के चुनावी गोट सेट करने के बाद उन वोटों के भी अब कांग्रेस में ना जाने की उम्मीद है। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा इलाके में प्रचार प्रसार करा कर कांग्रेस राहुल की छवि को धूमिल नहीं करना चाहती। दरअसल एक साल बाद ही लोकसभा का चुनाव होना है, ऐसे में राहुल गांधी को बतौर स्टार लोकसभा चुनाव में पेश किया जाएगा। हाल फिलहाल अगर फूलपुर राहुल गांधी आते और राजनीतिक समीकरणों के अनुसार कांग्रेस पीछे रह जाती तो राहुल गांधी की छवि को गहरा धक्का लगेगा। मौजूदा समय में राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन चुके हैं और गुजरात चुनाव के बाद उन्होंने जो अपनी छवि को बदलने का प्रयास शुरू किया है उससे यहां उन्हें नुकसान हो जाता। फिलहाल कांग्रेस की ओर से उपचुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है जिसमें कई दिग्गज नेता शामिल है ।

गांधी परिवार के खासमखास हैं मनीष मिश्रा
फूलपुर लोकसभा के उपचुनाव में कांग्रेस ने मनीष मिश्रा को टिकट दिया है और मनीष मिश्रा गांधी परिवार के खासमखास हैं। मनीष मिश्रा के पिता जेएन मिश्रा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी सचिव थे और उनका कद कांग्रेस में बहुत बड़ा था। ऐसे में यह पूरी उम्मीद थी और लगभग कार्यक्रम भी तय था कि राहुल गांधी खुद मनीष मिश्रा के लिए प्रचार करने आएंगे और उनके लिए वोट मांगेंगे लेकिन सियासी समीकरणों की घेराबंदी में मौजूदा हालात ऐसे बन चुके हैं कि चमत्कारिक रूप से ही कांग्रेस का यहां जीतना संभव है। जाति समीकरण में जकड़ा फूलपुर लोकसभा क्षेत्र विगत तीन दशक से जातिगत गणित पर ही हार जीत का सफर तय करता है। ऐसे में कांग्रेस की जीत का रास्ता तभी प्रशस्त हो सकता है जब उसके ब्राम्हण मतदाता एकजुट होकर वोट कर दें। मौजूदा स्थिति में कांग्रेस की राह आसान तो नहीं है हो, लेकिन उम्मीद की किरण अब भी ब्राम्हण मतदाताओं पर ही टिकी है।

कौन-कौन आएगा प्रचार में
फूलपुर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मनीष मिश्रा के लिए वोट मांगने कई दिग्गज नेता आएंगे। जिसमें फिल्म स्टार रहे व मौजूदा यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर, फिल्म अभिनेत्री नगमा , दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी, पूर्व मंत्री प्रकाश जायसवाल, पी एल पुनिया, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, अनिल शास्त्री, नदीम जावेद, राजेश मिश्रा, आचार्य प्रमोद कृष्णन, अजय कुमार लल्लू, आरपीएन, ज्योतिरादित्य सिंधिया, निर्मल खत्री और अनिल शास्त्री जैसे बड़े नाम शामिल हैं।












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