प्रियंका गांधी ने यूपी के सीएम को लिखी चिट्ठी, महामारी से निपटने के लिए दिए अहम सुझाव
नई दिल्ली, अप्रैल 27: उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी के चलते हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर उत्तर प्रदेश में टेस्टिंग और वैक्सीनेशन न होने मुद्दा उठाया है। प्रियंका ने अपने पत्र में लिखा कि, कोरोना की दूसरी लहर अपने भयानक रूप में है। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में तबाही अपने चरम पर है। कोरोना शहरों से अब गांवाों में पैर पसार रहा है। प्रदेश में जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं उसके मुकाबले टेस्टिंग दर काफी कम है। बड़ी संख्या में मामले रिपोर्ट नहीं हो रहे हैं।
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प्रियंका गांधी ने शहरी इलाको में टेस्टिंग में आ रही दिक्कतों का भी जिक्र अपनी चिट्ठी में किया है। उन्होंने कहा कि, कोरोना की यह जंग चार स्तंभों पर टिकी हुई है, जांच, उपचार, ट्रैक और टीकाकरण। यदि हम पहले खंभे को ही गिरा देंगे तो फिर हम जानलेवा वायरस से कैसे लड़ेगे। कांग्रेस महासचिव ने यूपी के अंदर अस्पताल, बेड , ऑक्सीजन, औऱ दवाईयों की भारी किल्लत का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि आयुष्मान योजना फेल हो चुकी है। उसे कोई अस्पताल नहीं मान रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि, बाजार में जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी हो रही है। आर्थिक तौर पर सक्षम लोग तो अपनों को बचाने के लिए अधिक कीमत चुका देंगे, गरीब और मध्यम वर्ग की क्या दुर्गति हो रही है, सोचिए। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मांग की कि स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाए, ग्रामीण इलाकों में जांच केंद्र खोले जाएं, जीवन रक्षक दवाओं का वितरण हो, हर जिले में आक्सीजन भंडारण के केंद्र स्थापित हो।
प्रियंका गांधी ने कोरोना से हो रही मौतों के आंकड़ों को छुपाने पर भी चिंता जाताई साथ ही श्मशान घंटों पर लोगों को अंतिम संस्कार में हो रही दिक्कतों को भी उठाया है। इसके अलावा प्रियंका गांधी ने टीकाकरण की धीमी गति का भी मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकार से निवेदन किया कि, इस लड़ाई में लोगों को कोरोना से लड़ने के लिए अकेला मत छोड़िए, आप उनके प्रति जावबदेह हैं। इस जानलेवा वायरस को काबू करने पर ध्यान केंद्रित करें।
प्रिंयका ने इसके अलावा सुझाव देते हुए कहा कि, बंद किए गए कोविड अस्पतालों और केंद्रों को सरकार फिर से शुरू करे।ऑक्सीजन युक्त बेडों का इंतजाम करे। आरटीपीसीआऱ टेस्ट की संख्या को भी बढ़ाया जाए। आंगनबाडी और आशा वर्कर्स की मदद से ग्रामीण इलाकों में दवाएं और उपकरण बंटवाएं जाएं। ताकि लोगों को शुरुआती इलाज मिल सके। इसके अलावा सरकार ऑक्सीजन भंडारण पर नीति बनाए ताकि आपात स्थिति से निपटा जा सके। वहीं महामारी के शिकार गरीब मजूदरों को सरकार आर्थिक मदद भी मुहैया करवाए।
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