OM Prakash Rajbhar के खिलाफ गैर-जमानती वारंट, सपा MLA अतुल प्रधान ने क्यों कहा ‘धोखेबाज-बिन पेंदी का लोटा’?
OM Prakash Rajbhar News Hindi: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ मऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है। यह वारंट 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक विवादित बयान से जुड़ा है, जिसमें राजभर पर भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं को जूते मारने की धमकी देने का आरोप है।
ठीक उसी दिन, यानी गुरुवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर चर्चा के दौरान राजभर और समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान के बीच तीखी बहस हो गई। अतुल प्रधान ने राजभर को खुलकर 'धोखेबाज' और 'बिन पेंदी का लोटा' कह दिया।

सदन का माहौल गरम हो गया। यह घटना इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि राजभर अक्सर अपने तीखे बयानों के लिए सुर्खियां बटोरते रहते हैं, लेकिन पहली बार किसी विपक्षी नेता ने उन्हें उनकी ही भाषा में जवाब दिया। आइए घटना को विस्तार से समझते हैं, वारंट क्यों जारी हुआ, सदन में क्या-क्या कहा गया, राजभर का राजनीतिक इतिहास, उनकी विवादास्पद बयानबाजी और निजी जीवन...
OM Prakash Rajbhar Non-Bailable Warrant: गैर-जमानती वारंट का पूरा केस, 2019 का पुराना बयान अब सिर पर
मऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने बुधवार (30 अप्रैल 2026) को यह सख्त आदेश दिया। कोर्ट ने राजभर को लगातार समन भेजने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया। अब पुलिस को निर्देश है कि राजभर को गिरफ्तार कर सीधे कोर्ट में पेश किया जाए।
दरअसल, 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान रतनपुरा बाजार (मऊ) में सुभासपा की जनसभा हुई थी। आरोप है कि राजभर ने मंच से कहा था कि अगर भाजपा वाले वोट मांगने आएं तो उन्हें दस-दस जूते मारें। यह बयान आचार संहिता का उल्लंघन माना गया। हलधरपुर थाने में FIR दर्ज हुई। पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी, लेकिन राजभर बार-बार पेशी पर नहीं पहुंचे। कोर्ट ने इसे अदालत की अवमानना मानते हुए NBW जारी किया। अगली सुनवाई 16 मई 2026 को तय हुई है।
गैर-जमानती वारंट क्यों गंभीर है?
सामान्य वारंट में आरोपी को नोटिस मिलता है और वह जमानत पर छूट सकता है। लेकिन NBW में पुलिस सीधे गिरफ्तारी कर सकती है। जमानत कोर्ट की मर्जी पर निर्भर करती है। राजभर कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद इस मामले में कोई छूट नहीं मिली, जो साफ संकेत है कि कोर्ट अब सख्ती बरत रहा है।
विधानसभा में गरमाया माहौल: Atul Pradhan का पलटवार
30 अप्रैल को उत्तर प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र महिला आरक्षण पर रखा गया था। राजभर ने अपने भाषण में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव ओबीसी और मुसलमानों को धोखा दे रहे हैं। गाजीपुर की बेटी की मौत पर राजनीति कर रहे हैं। यादव समाज के लोग बहन-बेटियों पर अत्याचार करते हैं, तो अखिलेश उन परिवारों से मिलने क्यों नहीं जाते? यह सुनते ही सपा के विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया।
सपा विधायक अतुल प्रधान खड़े हो गए और राजभर पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सुबह भाजपा, शाम सपा, ये सबसे बड़े धोखेबाज हैं। इनका कोई दीन-धर्म नहीं। बिन पेंदी का लोटा हैं, जिधर हवा चलती है, उधर लोट जाते हैं। अतुल प्रधान ने आगे राजभर के पुराने बयानों का भी जिक्र किया। जिसमें, पीएम मोदी और सीएम योगी पर की गई टिप्पणियों, हनुमान जी को राजभर जाति बताने, छात्रों के खिलाफ बयान और भाजपा नेताओं के DNA वाले बयान तक शामिल थे। सदन में अपशब्दों को रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया गया, लेकिन बहस काफी देर तक चली।
OM Prakash Rajbhar Bin Pendi Ka Lota: 'बिन पेंदी का लोटा' का मतलब
यह मुहावरा उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है, जो बिना किसी सिद्धांत के बार-बार पार्टियां बदलते हैं। अतुल प्रधान का इशारा राजभर के बार-बार गठबंधन बदलने की ओर था।
OM Prakash Rajbhar की विवादित बयानबाजी: लंबी फेहरिस्त
ओम प्रकाश राजभर अपने बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। कुछ प्रमुख विवाद:
- 2019: भाजपा कार्यकर्ताओं को जूता मारने की धमकी (वर्तमान NBW का आधार)।
- भगवान हनुमान पर: उन्हें राजभर जाति का बताया।
- 2025: छात्रों को लेकर विवादित बयान-छात्रों ने पुतले जलाए।
- DNA वाला बयान: भाजपा नेताओं की बेटियों-बहनों की शादी मुस्लिम परिवारों में होने का दावा।
- सुभासपा की चेतावनी: 'बुरी नजर रखने वाले को पीलिया हो जाएगा।'
राजभर जब सपा गठबंधन में थे तो, भाजपा पर हमला करते थे। अब भाजपा सरकार में हैं तो सपा-अखिलेश पर। यही वजह है कि विपक्ष उन्हें 'धोखेबाज' कहता है।
OM Prakash Rajbhar Political Career:ओम प्रकाश राजभर का राजनीतिक सफर, उतार-चढ़ाव भरा
- राजभर की राजनीति 1981 से शुरू हुई, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक कांशीराम के साथ।
- 2001: मायावती से विवाद, भदोही का नाम 'संत रविदास नगर' रखने पर नाराजगी।
- 2017: पहली बार विधायक बने, गाजीपुर की जहूराबाद सीट से।
- 2019: भाजपा से नाराज, सुभासपा बनाई।
- 2022: अखिलेश यादव के साथ गठबंधन, लेकिन बाद में टूट गया।
- 2023: लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में वापसी।
- 2022 से: योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री (पंचायती राज)।
- घोसी लोकसभा: बेटा अरविंद राजभर चुनाव लड़ चुके हैं।
राजभर पिछड़े वर्ग (OBC) और राजभर समुदाय के बड़े चेहरे माने जाते हैं। उनकी पार्टी सुभासपा मुख्य रूप से पूर्वांचल में प्रभावी है।
OM Prakash Rajbhar Wife-Family: राजभर की पत्नी कौन है? फैमिली ट्री
- ओम प्रकाश राजभर का जन्म 1947 के आसपास हुआ।
- पत्नी: तारामणि राजभर। शादी 25-26 अप्रैल 1979 को हुई।
- बच्चे: कुल 4-दो बेटे (अरुण राजभर राजनीति में सक्रिय, अरविंद राजभर) और दो बेटियां। परिवार राजनीतिक रूप से सक्रिय है, लेकिन राजभर खुद हमेशा सुर्खियों में रहते हैं।
गैर-जमानती वारंट, 16 मई को पेशी
गैर-जमानती वारंट के बाद राजभर को 16 मई को कोर्ट में पेश होना होगा। अगर नहीं पहुंचे तो गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। विधानसभा की बहस ने साफ कर दिया कि विपक्ष अब राजभर की 'बयानबाजी' को बर्दाश्त नहीं करने वाला। यह घटना उत्तर प्रदेश की सियासी गलियारों में दो बातें साफ करती है। एक, पुराने बयान भले ही पुराने हों, लेकिन कानूनी प्रक्रिया रुकती नहीं। दूसरा, राजभर जैसे नेता जो बार-बार गठबंधन बदलते हैं, उन्हें विपक्ष अब 'बिन पेंदी का लोटा' कहकर निशाने पर ले रहा है।













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