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'पापा मैं मरना नहीं चाहता, बचा लो'-Yuvraj Mehta कौन था? 30 फुट गहरे नाले में गिरा, 2 घंटे चिल्लाते हुए मौत

Noida Techie Yuvraj Mehta Death Case: एक ठंडी, कोहरे से घिरी रात में, एक युवा की दिल को चीरती हुई पुकार गूंजी - 'पापा, मैं मरना नहीं चाहता, मुझे बचा लो!' लेकिन वो आवाज धीरे-धीरे ठंडे पानी में जमने लगी। 27 साल का युवराज मेहता, एक मेहनती सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जिसका जीवन सपनों से भरा था, एक छोटी सी लापरवाही की भेंट चढ़ गया।

उसकी ग्रैंड विटारा कार नाले की बाउंड्री तोड़कर 20-30 फुट गहरे पानी से भरे निर्माणाधीन बेसमेंट में जा गिरी। युवराज करीब 2 घंटे तक कार की छत पर खड़े होकर 'बचाओ-बचाओ' चिल्लाता रहा, पिता को फोन कर मदद मांगी- लेकिन समय पर रेस्क्यू नहीं हो सका। सुबह 4 बजे के आसपास शव बरामद हुआ। ये कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि सिस्टम की उदासीनता की है, जो एक परिवार की खुशियां छीन लेती है। आइए जानते हैं, युवराज मेहता कौन थे, वो भयानक रात क्या हुई, और इस मौत के लिए जिम्मेदार कौन?

Yuvraj Mehta Death

Who Was Yuvraj Mehta: युवराज मेहता कौन थे?

ग्रेटर नोएडा सेक्टर 150 टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में युवराज मेहता (27 वर्ष) अपने पिता राजकुमार मेहता के साथ रहते थे। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। गुरुग्राम की एक प्रतिष्ठित कंपनी (दुनहम्बी इंडिया या समान) में कस्टमर डेटा साइंस से जुड़े काम करते थे। मृतक पिता राजकुमार मेहता रिटायर्ड SBI डायरेक्टर हैं। मां की कुछ साल पहले मौत हो चुकी थी, बड़ी बहन यूके में रहती हैं। घर से महज 500 मीटर दूर हादसा हुआ। रोजाना गुरुग्राम से नोएडा आने-जाने वाले एक आम युवा प्रोफेशनल है।

Noida Techie Yuvraj Mehta Death Reason: हादसा कैसे हुआ? स्टेप-बाय-स्टेप

दरअसल, घटना शनिवार रात करीब 12:15-12:30 बजे (घना कोहरा, दृश्यता बहुत कम) की है। सेक्टर 150, एटीएस ली ग्रैंडियोस सोसाइटी के पास टी-पॉइंट - निर्माणाधीन मॉल/कमर्शियल प्रोजेक्ट का खाली प्लॉट, जहां बेसमेंट के लिए गहरा गड्ढा खोदा गया था (पानी भरा हुआ, सीवेज और बारिश का मिश्रण)। ग्रैंड विटारा - तेज रफ्तार में मोड़ लेते समय नियंत्रण खोया और अंदर जा गिरी। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि घना कोहरा और ओवरस्पीडिंग। नाले की 6-7 फुट चौड़ी दीवार टूटी/क्षतिग्रस्त थी, कोई बैरिकेड, रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड नहीं था। कार दीवार तोड़कर गड्ढे में गिरी और पलटी। लेकिन कुछ देर तैरती रही। युवराज किसी तरह बाहर निकले, कार की छत पर चढ़े, फोन की टॉर्च जलाकर मदद मांगी

मौत से पहले की मार्मिक गुहार, पुलिस की लापरवाही ने ली जान?

युवराज ने तुरंत पिता राजकुमार मेहता को फोन किया, 'पापा, मैं फंस गया हूं... कार नाले में गिर गई... पानी बहुत ठंडा है... मुझे बचाओ... मैं मरना नहीं चाहता...!'पिता घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन घने कोहरे में कुछ दिखाई नहीं दिया, सिर्फ बेटे की आवाज सुनाई दी। प्रत्यक्षदर्शी (मोनिंदर, डिलीवरी एजेंट) ने कहा, 'करीब 1 घंटा 45 मिनट तक चिल्लाते रहे - 'कृपया मुझे बचा लो...' मैं खुद 30 मिनट पानी में तलाश करता रहा, लेकिन नहीं मिला।' उधर, मृतक के दोस्त पंकज ने बताया कि 'बचाव दल रात 2:30 बजे पहुंचा, लेकिन 3:20 बजे तक पानी में नहीं उतरा।'

Noida Techie Yuvraj Mehta Death Who Is Responsible: पुलिस की क्या सफाई? जिम्मेदार कौन?

पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF, NDRF पहुंचे। लेकिन रेस्क्यू में 4-5 घंटे लगे (शव सुबह 4-4:30 बजे निकाला गया)। आरोप है कि बचाव दल ने ठंडे पानी, लोहे की छड़ें और खतरे का हवाला देकर पानी में उतरने से इनकार किया। परिवार/प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि 'अगर तैराक होते या जल्दी एक्शन होता तो युवराज को बच सकते थे।

  • पुलिस ने कहा कि अंधेरा, कोहरा, गहराई...अप्रशिक्षित व्यक्ति उतरता तो और मौतें हो सकती थीं। हर संभव कोशिश की।' अब सवाल उठता है कि मुख्य जिम्मेदार कौन? दरअसल, परिवार और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही। सालों से नाले/गड्ढे के पास बैरिकेड, रिफ्लेक्टर, लाइट्स की मांग की जा रही थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। प्लॉट 2 साल से खोदा पड़ा था, पानी जमा था।
  • स्थानीय विरोध प्रदर्शन: निवासियों ने नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ प्रदर्शन किया।

अब क्या?

पुलिस ने केस दर्ज किया, जांच जारी - पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार। परिवार ने शिकायत दी और लापरवाही पर FIR की मांग की। पुलिस ने जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का वादा किया। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं - बल्कि सड़क सुरक्षा, निर्माण साइट मैनेजमेंट और इमरजेंसी रेस्पॉन्स में बड़ी खामी को उजागर करता है। युवराज जैसा युवा, जो परिवार का सहारा था, अब सिर्फ एक दर्दनाक याद बन गया।

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