UP :छात्राओं को नग्न कर मासिकधर्म जांचने के मामले में 9 स्कूल स्टाफ दोषी
मुजफ्फरनगर के कस्तूरबा गांधी विधालय में 25 मार्च 2017 को वार्डन सुलेखा द्वारा स्कूल की छात्रों के कपडे उतरवाने के मामले में मजिस्ट्रेट जांच पूरे स्टाफ को दोषी पाया गया है।
मुजफ्फरनगर के खतौली तहसील के तिगई गाँव के कस्तूरबा गांधी विधालय में 25 मार्च 2017 को वार्डन सुलेखा द्वारा स्कूल की छात्रों के कपडे उतरवाने के मामले में जिला प्रशासन द्वारा करवाई जा रही मजिस्ट्रेट जांच में पूरे स्टाफ को दोषी पाया गया है। जिसके तहत 9 लोगो के स्कूल स्टाफ की सविधा खत्म कर दी गई है जिसमें स्कूल के टीचर के साथ एकाउंटेंट, चौकीदार और रसोईया भी शामिल है।

क्या था पूरा मामला
मार्च 2017 में मुजफ्फरनगर के तिगरी गांव स्तिथ सरकारी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में महिला वार्डन सुरेखा तौमर द्वारा छात्राओं के उत्पीड़न का घिनौना मामला सामने आया था। वार्डन पर आरोप थ कि उन्होंने 70 छात्राओ को संयुक्त रूप से कक्षा में ले जाकर नग्न अवस्था में खड़ा किया। वार्डन की इस घिनौनी करतूत के पीछे वजह बस इतनी थी की विद्यालय के टॉयलेट में खून के धब्बे मिले थे जिसे देख विद्यालय की वार्डन आग बबूला हो गई। जिसके बाद उसने सभी 70 छात्राओ को क्लास रूम में ले जाकर पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया और एक एक कर छात्राओ के मासिक धर्म होने की जांच करने लगी। छात्राएं रोती बिलखती रही लेकिन हिटलर बनी होस्टल की वार्डन न तो शर्मिंदा हुई और न ही छात्राओं की हालात पर उन्हें तरस आया। हालांकि जब ये मामला मिडिया में आया तो बेसिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकेश यादव ने आनन फानन में सात सदस्यो की टीम बना कर इस पुरे मामले की जाँच कर वार्डन सुरेखा पर आरोप सिद्ध होने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

टीचन ने गलत जांच का लगाया आरोप
इस मामले में स्कूल की टीचर रजनी त्यागी और हिना परवीन की माने तो ये मजिस्ट्रेट जांच गलत हुई है क्योंकि जांच के दौरान उनसे एक भी बार बयान नहीं लिए गए है। और अगर कार्यवाही की भी गई है। इन टीचरों का ये भी आरोप है की जब ये घटना हुई थी तब अधिकतर बच्चे स्कूल छोड़कर चले गए थे और इस तीन महीनो में इस ही स्कूल के स्टाफ ने मेहनत कर उन सभी बच्चो की स्कूल में वापसी करवायी थी जिसका सिला जिला प्रशासन के उनकी सविधा खत्म कर के दिया है। बहराल इस पुरे मामले में बैसिक शिक्षा अधिकारी चन्द्रकेश यादव ने जानकारी देते हुए बताया की इस विद्यालय के सारे स्टाफ की सविधा ख़त्म कर दी गई है। इन सभी लोगों को मजिस्ट्रेट जांच में दोषी पाया गया है।

तीन महीने तक चली जांच
बता दें की उस समय ये मामला बहुत चर्चाओं में रहा था और छात्रों के परिजन अपने बच्चो को अपने साथ स्कूल छुड़वाकर अपने घर भी ले गए थे। उस समय स्कूल की वार्डन पर जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए तभी उनकी सविधा समाप्त कर दी गई थी। साथ ही सम्बंधित थाने में मुकदमा भी कायम कराया गया था। घटना के लगभग तीन महीने बाद अब मजिस्ट्रेट जांच में जहां स्कूल के स्टाफ को दोषी पाया गया वहीं स्कूल के अन्य स्टाफ के सभी लोगों की सविधा भी समाप्त कर दी गई है।












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