चुनाव आयोग में 'साइकिल' पर दावा खोने की स्थिति में ये हो सकता है मुलायम सिंह यादव का अगला दांव

लोकदल के वर्तमान अध्यक्ष सुनील सिंह ने मुलायम सिंह यादव को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद सौंपने का प्रस्ताव दिया है। मुलायम सिंह यादव ने 37 साल पहले लोकदल छोड़ी थी।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में दो-फाड़ के बाद अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हुई हैं। चुनाव आयोग आज फैसला करेगा कि साइकिल चुनाव चिन्ह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दिया जाए या फिर उनके पिता मुलायम सिंह यादव को। फिलहाल चुनाव आयोग का फैसला चाहे जो भी हो इस बीच मुलायम सिंह यादव अगले प्लान में जुट गए हैं। एक दिन पहले ही मुलायम सिंह यादव ने लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह से मुलाकात की है। माना यही जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव कि नजर साइकिल चुनाव चिन्ह पर टिकी हुई है लेकिन अगर किसी वजह से चुनाव आयोग का फैसला उनके खिलाफ गया या फिर साइकिल चुनाव चिन्ह को फ्रीज किया गया तो ऐसी सूरत में वो लोकदल के चुनाव चिन्ह पर विधानसभा चुनाव में उतर सकते हैं।

mulayam 'साइकिल' की जंग अगर हार गए मुलायम तो ये होगा उनका अगला दांव

क्या लोकदल से प्रत्याशी उतारेंगे मुलायम सिंह यादव?

मुलायम सिंह यादव ने 37 साल पहले लोकदल छोड़ी थी। लोकदल का गठन चौधरी चरण सिंह ने किया था, उनके समय में ही मुलायम सिंह यादव को लोकदल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। लोकदल वर्तमान में गैर मान्यता प्राप्त पार्टी है। लोकदल को 1977 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था, उस समय मुलायम सिंह यादव इटावा के जसवंतनगर विधानसभा सीट से पार्टी के चुनाव चिन्ह पर विधायक चुने गए थे। लोकदल के वर्तमान अध्यक्ष सुनील सिंह ने मुलायम सिंह यादव को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद सौंपने का प्रस्ताव दिया है। माना यही जा रहा है कि साइकिल चुनाव चिन्ह फ्रीज होने के बाद मुलायम सिंह यादव लोकदल के चुनाव चिन्ह से अपने प्रत्याशियों को चुनाव में उतार सकते हैं। लोकदल का चुनाव चिन्ह खेत जोतता किसान है।

सुनील सिंह ने बताया कि उन्होंने मुलायम सिंह यादव और उनके भाई शिवपाल यादव से मुलाकात की है। इस दौरान हमने इस मुद्दे पर बात की है कि लोकदल के चुनाव चिन्ह पर वो उम्मीदवार उतार सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव लोकदल के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं। अगर वो खुद लोकदल को संभालेंगे तो पार्टी की ताकत बढ़ेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि मैंने लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष की पोस्ट भी उन्हें देने की बात कही है। अगर वो लोकदल में आते हैं तो इससे पार्टी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ, राजस्थान, बिहार और दूसरे राज्यों में भी मजबूत होगी। लोकदल की वेबसाइट पर गौर करें तो इसका गठन पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने किया था। इसमें हेमवती नंदन बहुगुणा, देवी लाल, मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार कर्पूरी ठाकुर, शरद पवार, राम विलास पासवान समेत कई वरिष्ठ नेता रहे हैं। लोकदल ने 2012 में 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था हालांकि सभी सीटों पर उनके उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
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