कल्याण की अंतिम यात्रा से मुलायम परिवार की दूरी, अखिलेश की बड़ी राजनीतिक भूल या वोट बैंक में भूले नैतिकता?

लखनऊ, 22 अगस्त: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह नही रहे। आज लखनऊ में उनके आवास पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का ताता लगा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्टीय अध्यक्ष मायावती समेत कई नेता पहुंचे लेकिन समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव कल्याण के आवास पर श्रद्धांजलि देने नही पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के परिवार ने दूरी क्यों बनाई ये चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो एक वर्ग विशेष को साधने के फेर में अखिलेश यादव से बड़ी राजनीतिक भूल हुई है। कम से कम एक राजनीतिक व्यक्ति को राजनीति और नैतिकता में फर्क तो समझ में आना ही चाहिए।

मायावती ने दी श्रद्धांजलि

मायावती ने दी श्रद्धांजलि

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राम मंदिर आंदोलन के नायक रहे कल्याण सिंह का निधन शनिवार रात किन्ही हो गया था। वो लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। रविवार सुबह सबसे पहले मायावती ने कल्याण के घर पहुंचकर सबको चौका दिया। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और कल्याण सिंह हमेशा ही एक दूसरे के धुर विरोधी रहे। कल्याण और मायावती ने कई मंचों पर एक दूसरे की कड़ी आलोचना भी की। लेकिन कल्याण के निधन के बाद मायावती न केवल उनके आवास गईं बल्कि कल्याण के पुत्र राजबीर सिंह और उनके परिजनों को सांत्वना भी दी।

मायावती ने कल्याण के परिजनों से भी की बात

मायावती ने कल्याण के परिजनों से भी की बात

मायावती ने कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा कि भगवान कल्याण सिंह के परिवार एवं उनके अनुयायियों को यह दुख सहने की सकती प्रदान करें। मायावती इस दौरान करीब 10 मिनट तक कल्याण के आवास पर रही और फिर निकल गई। हालाकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है की यूपी में अगले साल विधान सभा चुनाव है और उसे देखते हुए मायावती का यह कदम बहुत मायने रखता है। कल्याण सिंह ओबीसी के एक बड़े नेता थे और मायावती उनके घर पहुंचकर यह संदेश देना चाहती थीं कि चुनाव के पहले बीएसपी अपनी सोशल इंजीनियरिंग बिकी रह पर ही आगे बढ़ेगी। इसके लिए उन्होंने एक खास वर्ग को भी नाराज करने का खतरा मोल ले लिया।

अखिलेश यादव ने क्यों बनाई कल्याण सिंह से दूरी

अखिलेश यादव ने क्यों बनाई कल्याण सिंह से दूरी

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के बाद यदि लखनऊ के सियासी गलियारे में इसी बात की चर्चा है की आखिर अखिलेश यादव कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि देने उनके आवास पी क्यों नहीं गए। सपा के सूत्रों ने बताया कि अखिलेश यादव लखनऊ से बाहर थे लिहाजा वो जा नही पाए। बताया जा रहा है कि अखिलेश सैफई में थे। रक्षा बंधन पर्व किवाजः से सैफई गए थे। लेकिन सियासी गलियारों में इसके भी तरह तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। लोगों के बीच यह चर्चा है की क्या अखिलेश यादव ने चुनाव में अपना नफा नुकसान का आकलन करके यह कदम उठाया या कुछ और ही मजबूरियां थीं।

वोट बैंक के लालच में भूले नैतिकता

वोट बैंक के लालच में भूले नैतिकता

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अवनीश त्यागी ने कहा कि अखिलेश वोट के वोट बैंक के लालच में मानवता और नैतिकता भी भूल गए। उन्हें कल्याण सिंह के घर जाने से परहेज नहीं करना चाहिए था। सीएम योगी भी मुलायम सिंह का हाल पूछने अक्सर जाते रहते हैं। एक राजनीतिक व्यक्ति को राजनीति और नैतिकता में फर्क तो दिखना ही चाहिए।

कल्याण और मुलायम हमेशा रहे धुर विरोधी

कल्याण और मुलायम हमेशा रहे धुर विरोधी

उत्तर प्रदेश की सियासत में कल्याण सिंह और मुलायम परिवार के बीच चोली दामन का साथ रहा है। राम मंदिर आंदोलन के बाद जब 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी ढांचा गिराए गया तब कल्याण सिंह ही सीएम थे। इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा भी दे दिया था। बाद में यूपी की सियासत में एक दौर ऐसा भी आया जब कल्याण सिंह ने मुलायम से हाथ मिलाकर समाजवादी पार्टी भी ज्वाइन कर ली थी लेकिन यह अलग बात है की वो ज्यादा दिन तक सपा में नहीं रह पाए। सपा से अलग होकर उन्होंने नई पार्टी बना ली थी।

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