Sambhal violence: संभल के हालात पर बोले सांसद चंद्रशेखर आजाद, कहा-'वहां जाने के बाद ही मिलेगी हालात जानकारी'
Sambhal violence: उत्तर प्रदेश संभल में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद स्थिति का जायजा लेने जा रहे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को हापुड़ पुलिस ने रोक दिया। उन्हें एनएच-9 हाईवे पर छिजारसी टोल प्लाजा पर रोका गया और बाद में एक स्कूल परिसर में भेज दिया गया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था के कारणों का हवाला देते हुए उनकी आगे की यात्रा पर रोक लगाई गई है।
चंद्रशेखर आजाद जो रावण के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। उन्होंने इस कदम पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा हिंसा के दौरान सीधे गोली चलाने की नीति अपनाई गई। जबकि पैरों पर गोली मारकर भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने गोलियां सिर और सीने पर चलाई। जो कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

संभल जाने के बाद ही मिलेगी हालात जानकारी
सांसद चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि वहां लोगों की स्थिति क्या है। कितने घायल हुए या मरे। कितने निर्दोष हैं या दोषी हैं। इस पर टिप्पणी करना ठीक नहीं है। वहां जाने की अनुमति मिलने तक पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है। हम वहां के हालात के बारे में आपको दौरे के बाद ही बता सकते हैं। हम बार-बार मांग कर रहे हैं कि हमें संभल जाकर हालात देखने की इजाजत दी जाए और फिर बात की जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि वहां इंटरनेट काम नहीं कर रहा है। इसलिए हम लोगों से जुड़ नहीं पा रहे हैं। प्राथमिकता वहां शांति बहाल करने की होनी चाहिए। कार्रवाई के लिए FIR बहुत ज़रूरी है। जब तक पूर्व योजना नहीं बनाई जाती। इस घटना की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच होनी चाहिए। इसके बाद हम यूपी उपचुनाव में वोटों की लूट पर भी चर्चा करना चाहते हैं।
संभल हिंसा और आज़ाद की मांग
संभल में हुई हिंसा के बाद तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। इस हिंसा में जामा मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर विवाद हुआ था। जिसमें चार लोगों की मौत और दर्जनों घायल हुए थे। आजाद ने \संविधान के अनुच्छेद 1991 का हवाला देते हुए धार्मिक स्थलों की स्थिति को यथावत बनाए रखने की मांग की। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच और मजिस्ट्रेट द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की। आजाद ने कहा कि वह पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने के लिए आए थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोका।
बसपा सुप्रीमो मायावती पर टिप्पणी
मायावती द्वारा उनके प्रयासों पर सवाल उठाए जाने पर आजाद ने शांतिपूर्वक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बहनजी हमारी नेता हैं। बड़े लोग जब कुछ कहते हैं तो सावधान रहने की नसीहत देते हैं। लेकिन उन्हें जो बातें लिखकर दी जाती हैं। वे अक्सर बाहरी प्रभाव का नतीजा होती हैं।
सांप्रदायिक सद्भाव पर गहराते सवाल
संभल हिंसा पर टिप्पणी करते हुए धार्मिक नेता यासूब अब्बास ने इस घटना को खूनी होली करार दिया। उन्होंने धार्मिक आधार पर हो रही हिंसा की कड़ी आलोचना की।
पुलिस और प्रशासन के कदम
हिंसा के बाद पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। संदिग्धों की धरपकड़ करते हुए अब तक दर्जनों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और ड्रोन की मदद से हिंसा में शामिल उपद्रवियों की पहचान कर रही है। प्रशासन ने सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए समुदाय स्तर पर बैठकें आयोजित की हैं।
संभल हिंसा ने उत्तर प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक माहौल को फिर से झकझोर दिया है। चंद्रशेखर आजाद की इस घटना पर आलोचना और उनकी मांगों ने प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पुलिस और प्रशासन शांति बहाली के प्रयासों में जुटे हैं। राज्य में सांप्रदायिक तनाव और संविधान के पालन पर गहराते सवाल भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों के समक्ष एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं।












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