चमन की मौत ने मिटाया हिंदू-मुस्लिम का भेद, अर्थी भी उठी, दफ्न भी हुआ
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मुरादाबाद। मानसिक रुप से कमजोर चमन उर्फ रिजवान की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर दो वर्गों में कलह के बाद अर्थी भी उठी और दफीना भी हुआ। उससे पहले दस सराय चौकी पर पहुंचकर दोनों आमने-सामने आ गए। बता दें कि दोनों समुदाय परिवार युवक को अपना बेटा बताकर उसके शव पर हक जताने लगे।

ये था मामला
पुलिस और प्रशासन के समझौत के बाद दोनों मजहब के लोग शव यात्रा लेकर शमशान तक गए, जहां कब्र खोदकर दफीना किया। दोनों संप्रदाय की इस पहल ने फिर दोनों परिवारों के रिश्तों को नया रुप दे दिया। बता दें कि 13 जनवरी 2009 को मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र के रामकिशन सैनी का बेटा चमन लापता हो गया था। चमन उर्फ रिजवान मानसिक रुप से कमजोर था। 28 फरवरी 2014 को ईदगाह पर घूम रहे रिजवान पुत्र अफजाल को रामकिशन की पत्नी चंद्रप्रभा ने अपना बेटा चमन बताया। बता दें कि रिजवान और चमन की फोटो एक दुसरे से मिलती थी।

दोनों पक्षों में हुआ समझौता
मामला थाने पहुंचे और पुलिस ने दोनों पक्षों का समझौता कर दिया। समझौते में तय हुआ कि दोनों परिवार चमन उर्फ रिजवान की देखरेख कर सकते है। कुछ दिनो पहले चमन की तबीयत खराब हो गई। बुधवार को चमन ने दम तोड़ दिया। चमन की मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए विवाद शुरू हो गया। राकिशन का परिवार अंतिम संस्कार के लिए अडा था, तो अफजाल का परिवार दफन करने के लिए। मामला थाने गया, जिसके बाद अर्थी भी उठी और दफीना भी हुआ।

अर्थी भी उठी, दफ्न भी हुआ
चमन उर्फ रिजवान की शव यात्रा निकली तो दोनों समुदाय के लोगों में होड़ लग गयी। सभी ने अपने धर्म के अनुसार अंतिम क्रिया को अंजाम दिया। बता दें कि चमन की अर्थी को कंधा देने वालों में किसी ने टीका लगा रखा था तो किसी ने टोपी पहन रखी थी। इतनी ही नहीं अल्लाह हो अकबर और राम नाम सत्य की आवाजें भी सुनाई दे रही थी।












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