UP MLC Election : अखिलेश के गढ़ में बीजेपी करेगी सेंधमारी, जानिए क्यों चला ये बड़ा दांव
लखनऊ, 21 मार्च: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने सपा विधायक रमाकांत यादव के बेटे और बीजेपी से विधायक रहे अरूणकांत यादव को एमएलसी के चुनाव में उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी की पवई सीट से विधायक रह चुके अरूणकांत यादव एक बार सपा से भी विधायक रह चुके हैं। कुछ दिनों पहले ही सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने आजमगढ़ की सभी दस सीटों पर कब्जा जमाया था ऐसे में बीजेपी के पास अरुणकांत को टिकट देने के अलावा कोई चारा नहीं था। एक तरह से बीजेपी की यह कोशिश अखिलेश के गढ़ में सेंध लगाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

अरुण कांत के बहाने आजमगढ़ में सेंध लगाने की कोशिश
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अखिलेश के गढ़ आजमगढ़ में फूलपुर पवई सीट पर अपना कब्जा जमाया था। इस सीट पर बीजेपी ने अरुणकांत यादव को टिकट दिया था और वह जीतने में कामयाब रहे। इसके बाद इस विधानसभा चुनाव में इस सीट से अखिलेश ने रमाकांत यादव को मैदान में उतार दिया जिसकी वजह से अरुणकांत यादव ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। मजबूरन बीजेपी को किसी दूसरे को टिकट देना पड़ा। यह एक सीट भी बीजेपी के हाथ से चली गई और सपा ने यहां दस विधानसभा सीटों पर जीत हासिल कर ली। नतीजे आने के बाद बीजेपी ने बदली हुई रणनीति के तहत रमाकांत यादव के बेटे अरुण को एमएलसी का उम्मीदवार बना दिया। अब अरुण के बहाने वह यादव वोट बैंक में सेंधमारी करने के प्रयास में हैं।
2009 में सांसद चुने गए थे रमाकांत यादव
बीजेपी से विधायक रहे अरुणकांत यादव के पिता रमाकांत यादव 2009 में बीजेपी से सांसद चुने गए थे। उनके बीजेपी में जाने से नाराज सपा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में उनके बेटे अरुणकांत यादव की जगह श्याम बहादुर यादव को टिकट दे दिया था और वह चुनाव जीत गए। अगले चुनाव में अरुण कांत यादव को बीजेपी ने टिकट दे दिया और वह पवई सीट से जीतने में कामयाब रहे। लेकिन इसी बीच समीकरण फिर बदला और रमाकांत यादव 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा में चले गए जबकि अरुणकांत बीजेपी में ही बने रहे।
अरुण के बहाने आजमगढ-मऊ सीट पर समीकरण साधने की कोशिश
विधानसभा चुनाव में मऊ और आजमगढ़ दोनों जिलों में बीजेपी के लिए बुरी खबर आई। आजमगढ़ में जहां बीजेपी का खाता नहीं खुला वहीं मऊ जिले से केवल एक मधुबन सीट बीजेपी जीतने में सफल रही। मऊ और आजमगढ़ में एमएलसी की सीट निकालने के लिए बीजेपी के पास कोई उम्मीदवार नहीं था। बीजेपी को लगा कि अरुण के सहारे ये सीट निकल सकती है। बीजेपी को लगता है कि अरुण को बीजेपी के साथ ही सपा के वोटरों का भी साथ मिल सकता है और पिता रमाकांत यादव भी अंदरखाने बेटे को जिताने के लिए पूरा जोर लगाएंगे। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने अरुण को मैदान में उतारकर अखिलेश की टेंशन बढ़ा दी है।












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