अजय मिश्रा ने लखीमपुर घटना में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों को 50 लाख रुपये दिए जाने की मांग की
राज्य मंत्री अजय मिश्रा बोले- प्रर्शनकारियों में सपा रुद्रपुर इकाई के जिलाध्यक्ष भी शामिल थे,FIR दर्ज की जाए और जांच कराई जाए
लखीमपुर, 4 अक्टूबर। लखीमपुर में रविवार को हुई किसानों की मौत के मामले में योगी सरकारी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। कथित तौर पर राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के द्वारा गाड़ी से कुचले जाने के बाद आठ आंदोलनकारी किसानों की मौत हो गई है और कुछ लोग जख्मी हुए हैं।

इस घटना के बाद प्रदेश में मचे बवाल के बीच गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने एक और बयान दिया है। अजय मिश्रा ने कहा कि जिस शख्स की कल मौत हुई वह बहराइच के नानपारा का रहने वाला था। एक प्रदर्शनकारी समाजवादी पार्टी की रुद्रपुर इकाई के जिलाध्यक्ष हैं। ऐसे कई लोग शामिल थे। प्राथमिकी दर्ज की जाए और जांच कराई जाए।
इसके साथ ही अजय मिश्रा ने ने लखीमपुर खिरी में सोमवार को कहा मैं मांग करता हूं कि कल मारे गए प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता के परिवारों को 50 लाख रुपये दिए जाएं। मामले की या तो सीबीआई, एसआईटी या किसी मौजूदा/सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
बता दें रविवार को लखीमपुर खीरी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के वहां के किसानों ने मोदी सरकार द्वारा लागू किए तीन कृषि कानूनों का विरोध किया और काले झंडे दिखाए। इसी दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि राज्य मंत्री अजया मिश्रा के बेटे आशीष मिश्राा की गाड़ी ने आंदोलनकारियों पर रौद दिया जिसके चलते कई किसानों की मौत हो गई। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्राा टेनी और उनके बेटे आशीष मिश्राा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
बता दें इस घटना के बाद से जमकर बवाल मचा हुआ है। किसानों की मौत का मुद्दा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के चंद महीने पहले विपक्षी पाटिर्यों के लिए संजीवन बूटी साबित हो रहा है। इस मामले में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और शिवपाल यादव की राजनीतिक पार्टी के अलावा बंगाल में सक्रिय टीएमसी भी अपनी राजनीतिक रोटिंया सेंकना शुरू कर दिया है।
किसानों की मौत के बाद अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी समेत अन्य नेता जो सोमवार को लखीमपुर जाकर वहां विरोध करने की बात कही थी उन्हें पुलिस ने सुबह ही हाउस अरेस्ट कर लिया था। जिस पर जमकर बवाल हुआ। वहीं इस घटना से प्रदेश के किसान आक्रोशित हैं और पुलिस-प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रही है।












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