UP की शाही शादी में दूल्हा बना करोड़पति, काजी की भी खुल गई किस्मत, जब दुल्हन बोली- कूबूल-कूबूल-कूबूल
Meerut Royal Wedding: 'भारत का खेल शहर' माना जाने वाला उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला इन दिनों एक शाही शादी को लेकर सुर्खियों में छाया है। यहां भव्य निकाह समारोह में दूल्हा करोड़पति बन गया। जब दुल्हन ने काजी के सामने 'कबूल-कबूल-कबूल' कहा। दुल्हन पक्ष ने दूल्हे को 2.5 करोड़ रुपए दिए। वहीं, काजी की भी किस्मत अचानक खुल गई। निकाह पढ़ाने के बदले काजी को 11 लाख रुपए मिले। एक शादी में आये मेहमान ने चुपके से मामले का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
कथित तौर पर एनएच-58 पर एक रिसॉर्ट में रिकॉर्ड किए गए निकाह के वीडियो में दूल्हा और दुल्हन के परिवारों के बीच काफी मात्रा में धन और पैसे का लेन-देन होता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में सूटकेस से 500-500 की गड्डियां निकलती देखी जा सकती हैं। आइए जानते हैं शाही शादी में किसको क्या मिला?

दुल्हन के परिवार ने दूल्हे पक्ष को 2.5 करोड़ रुपये नकद दिए, जबकि दूल्हे के परिवार ने जूता चुराई रस्म के तहत 11 लाख रुपये दिए । जूता चुराई एक आम शादी की प्रथा है, जिसमें दुल्हन की बहनें दूल्हे के जूते चुरा लेती हैं और बदले में पैसे मांगती हैं। वीडियो में आगे बताया गया है कि निकाह समारोह संपन्न कराने वाले काजी को 11 लाख रुपये का अतिरिक्त उपहार दिया जाता है।
लग्जरी कार के लिए ₹ 75 लाख
खास बात यह है कि इस शाही शादी समारोह को फिल्माने पर सख्त मनाही रही। लेकिन, किसी मेहमान ने चुपके से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले मेहमान को भी जब रिकॉर्डिंग करते हुए पकड़ा गया तो उसे फिल्म बनाना बंद करने के लिए कहा गया।
क्लिप में एक व्यक्ति दूल्हे और उसके परिवार को दिए जा रहे उपहारों की घोषणा करता हुआ दिखाई दे रहा है। वह जोर से कहता है कि कार खरीदने के लिए 75 लाख रुपए नकद दिए जा रहे हैं। दुल्हन का परिवार कथित रूप से नकदी से भरे सूटकेस आगे बढ़ाता है।
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मस्जिद को 8 लाख रुपए का दान
दुल्हन पक्ष ने गाजियाबाद स्थित एक मस्जिद को 8 लाख रुपए का दान भी दिया , जहां उसका परिवार रहता है। एक्स यूजर आरज़ू ने वीडियो को ऑनलाइन शेयर करते हुए लिखा कि एक रिसॉर्ट में शाही शादी हुई, जिसमें दूल्हे को 2.56 करोड़ रुपये दिए गए, 11 लाख रुपये जूते चुराए गए, 11 लाख रुपये निकाह पढ़ने के लिए दिए गए, 8 लाख रुपये मस्जिद को दिए गए। दुर्भाग्य से, इन रीति-रिवाजों के कारण गरीब बेटियां अविवाहित रह जाती हैं।"
दहेज प्रथा समाज के लिए अभिशाप
दहेज प्रथा हमारे समाज के लिए एक अभिशाप से कम नहीं है। दहेज प्रथा को रोकने के लिए दहेज निषेध अधिनियम, 1961 लागू किया गया था। इस कानून के तहत, दहेज लेने, देने या देने-लेने के लिए उकसाने पर कम से कम पांच साल की जेल और 15,000 रुपये से ज़्यादा जुर्माना या प्राप्त दहेज का मूल्य, जो भी ज़्यादा हो, हो सकती है।
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