दलितों के लिए दिलों में जहर रखने वाले भीमराव अंबेडकर के नाम पर राजनीति कर रहे: मायावती

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की आदित्यानाथ सरकार के राजकीय अभिलेखों में भीमराव अंबेडकर के नाम के साथ राम जी जोड़ने और उन्हें डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जगह डॉक्टर भीमराव रामजी आंबेडकर लिखने के आदेश पर मायावती ने भाजपा पर निशाना साधा है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने इस पर कहा है कि भाजपा दलितों और पिछड़ों के वोटों के लिए ये सब राजनीति कर रही है और जिसका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर जैसी शख्सियत हमारे दिलों में बसते है, भाजपा उन्हें पसंद नहीं करती बस दलितों की वोट की खातिर दिल पर पत्थर रखकर अंबेडकर का नाम लेती है।

बाबा साहेब से चिढ़ते हैं संघ के लोग

बाबा साहेब से चिढ़ते हैं संघ के लोग

मायावती ने कहा कि भाजपा भीमराव अंबेडकर को सम्मान जैसी बातें ना कहे, वो तो हमारे लिए परमपूज्य हैं। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अंबेडकर का नाम बदलने वाली आरएसएस और भाजपा ये भी बताए कि अबेंडकर के अनुयायियों के प्रति उनके दिलों में जहर क्यों भरा है। उन्होंने कहा कि दरअसल भाजपा डॉ अंबेडकर को मिलने वाले सम्मान मिलने से दुखी है और ये उसे बुरा लगता है, यहां तक कि भाजपा के लोग तो मुझे बहन जी कहे जाने से भी चिढ़ते हैं।

अंबेडकर नाम में नहीं लिखते थे राम जी

अंबेडकर नाम में नहीं लिखते थे राम जी

मायावती ने कहा कि भीमवराव अंबेडकर खुद को बीआर अंबेडकर ही लिखते थे। उन्होंने जब कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, तो भी बीआर अंबेडकर ही लिखा। मायावती ने कहा कि महात्मा गांधी को क्या मोहनदास करमचंद गांधी लिखते हैं या फिर मोदी को नरेंद्र दामोदरदास मोदी लिखते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो फिर अबेंडकर के नाम को पूरा लिखने की ये राजनीति क्यों हो रही है। मायावती ने कहा कि आरएसएस और भाजपा के पास भीमराव अंबेडकर जैसा कोई नाम नहीं और ना ही कोई आईकॉन है तो इसलिए ये लोग उनके नाम के साथ राजनीति करते हैं।

यूपी सरकार ने दिया है ये आदेश

यूपी सरकार ने दिया है ये आदेश

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने फैसला लिया है कि वह तमाम राजकीय अभिलेखों में संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के नाम के साथ राम जी जोड़ेगी। योगी सरकार ने बुधवार को सभी विभागों को और इलाहाबाद की सभी कोर्ट की बेंचों को आदेश दिया है कि वह अपने अभिलेखों में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जगह डॉक्टर भीमराव रामजी आंबेडकर का इस्तेमाल करें। योगी सरकार के इस फैसले की वजह संविधान के पन्ने में बाबा साहब के डॉक्टर भीमराव रामजी अंबेडकर के नाम से हस्ताक्षर होना बताया गया है।

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