मथुरा विधानसभा : बीजेपी की मजबूत घेरेबंदी कर रहा विपक्ष, जानिए ऊर्जा मंत्री के सामने क्या हैं चुनौतियां

लखनऊ, 27 जनवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तिथियों के एलान के साथ ही प्रत्याशियों ने अपनी चुनावी तैयारियों को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। इस बीच पहले चरण के प्रत्याशी अपने अपने कील कांटे दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं। कृष्ण की नगरी मथुरा में भी पहले चरण के तहत मतदान होना है। यहां से बीजेपी की तरफ से हैवीवेट उम्मीदवार और योगी सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा शामिल हैं। लेकिन इस बार विपक्ष की तरफ से शर्मा की मजबूत घेरेबंदी की जा रही है।

बीजेपी

दरअसल , कांग्रेस की लगातार तीन जीत के बाद बीजेपी ने मथुरा विधानसभा पर कब्जा कर लिया था। इसे बरकरार रखने के लिए बीजेपी ने फिर से ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा पर ही दाव लगाया है। जिले की पांच में दो सीटों पर अपने पुराने छिन को बदलने वाली बीजेपी के मथुरा में यह ब्राह्मण कार्ड ही है। इस कार्ड को फेल करने के लिए कांग्रेस ही नहीं सपा और बीएसपी ने तगड़ी घेरेबंदी की है।

यहां बीएसपी ने बीजेपी से मांट में टिकट न्नमिलने पर विद्रोह करने वाले ब्राह्मण नेता एस के शर्मा को अपन उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने यहां से चार बार विधायक रहे प्रदीप माथुर पर दाव लगाया है। इस बीच सपा आरएलडी गठबंधन ने बहुसंख्यक वैश्य की मौजूदगी को देखते हुए देवेंद्र अग्रवाल पर अपना उम्मीदवार बनाया है।

ब्राह्मण वैश्य बहुल है मथुरा विधानसभा

धर्म नगरी मथुरा वृंदावन शहरी ललक मथुरा विधानसभा का हिस्सा है। पहले इसे मथुरा वृंदावन विधानसभा कहा जाता था लेकिन अब यह केवल मथुरा के नाम से दर्ज है। यहां करीब 70 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। 60 हजार वैश्य और 50 हजार मुस्लिम मतदाता हैं जो समीकरण को प्रभावित करने का माद्दा रखते हैं। हालाकि पिछले चुनाव में भी बीजेपी ने श्रीकांत शर्मा को ही मैदान में उतारा थाबार कांग्रेस सपा गठबंधन से प्रदीप माथुर चुनाव लड़े थे। मोदी की लहर वाले इस चुनाव में शर्मा ने माथुर को हराकर यह सीट छीन ली।

श्रीकांत को बीजेपी उम्मीदवार के रूप में 143361मत मिले थे जबकि प्रदीप माथुर को केवल 42000 मतों से ही संतोष करना पड़ा था। इस तरह एक लाख से अधिक मतों से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। अपने इलाके में विकास का दावा करने वाले श्रीकांत शर्मा कहते हैं कि, मथुरा का विकास इतना पहले कभी नहीं हुआ जितना पांच वर्षों में हुआ है। यमुना में करीब 80 फीसदी नालों का गिरना बंद हो गया है। 24 घंटे बिजली मिल रही है और विकास की अनेक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

श्रीकांत के इस दावे को लेकर उनके विरोधी प्रदीप माथुर कहते हैं कि मथुरा विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। पांच सालों में कोई काम नहीं हुआ है। एनसीआर का वादा और मेट्रो चलाने का वादा पूरा नहीं हुआ है। बिजली महंगी हो गई है। मथुरा की जनता को इन पांच सालों में कुछ भी नही मिला है।

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