Mauni Amavasya Tragedy: जब PM को देखने के लिए मची भगदड़, 500 की हुई थी मौत, जानें कब-कब कुंभ हादसों का शिकार?
Mahakumbh 2025 Mauni Amavasya Tragedy: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 के दौरान मौनी अमावस्या पर 'दूसरे अमृत स्नान' के दिन भारी भीड़ के चलते भगदड़ मच गई। इस हादसे में अब तक 14 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक पुष्टी नहीं है। दर्जनों श्रद्धालु घायल हो गए हैं। भीड़ के दबाव और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किए, लेकिन घटना ने मेले की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब महाकुंभ में हाल ही में 19 जनवरी 2025 को सिलेंडर ब्लास्ट से आग लगने की घटना सामने आई थी। उस हादसे में 20-25 टेंट जल गए थे। अब, भगदड़ की इस घटना ने कुंभ मेले में सुरक्षा प्रबंधन को लेकर चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

1954: जब PM को देखने के लिए मची थी भगदड़, 500 की मौत
महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन की बात करें, तो 1954 में प्रयागराज (तब इलाहाबाद) के कुंभ मेले में हुई भगदड़ को आज भी सबसे बड़ी त्रासदी के रूप में याद किया जाता है।
3 फरवरी 1954 को मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान के लिए 40 लाख से अधिक श्रद्धालु जुटे थे। वीआईपी आगमन, जैसे कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति के कारण, सुरक्षा बलों का ध्यान आम श्रद्धालुओं से हटकर वीआईपी प्रोटोकॉल पर केंद्रित था। भीड़ के दबाव और तटबंधों की कमी के चलते भगदड़ मच गई। इस घटना में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 500 लोग मारे गए थे, लेकिन गैर-सरकारी स्रोतों ने मृतकों की संख्या 800 से भी अधिक बताई। यह त्रासदी कुंभ के इतिहास में सबसे भयानक हादसों में से एक रही।
2013: रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़
2013 के कुंभ मेले में मौनी अमावस्या स्नान के बाद प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मच गई। प्लेटफॉर्म 6 के फुट ओवरब्रिज पर भारी भीड़ के कारण रेलिंग टूट गई, जिससे 36 लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए। जांच में पाया गया कि भीड़ नियंत्रण में लापरवाही इस हादसे का मुख्य कारण थी।
2025: सिलेंडर ब्लास्ट की घटना
19 जनवरी 2025 को महाकुंभ में सेक्टर 19 में सिलेंडर ब्लास्ट के चलते आग लग गई थी। इस हादसे में 20-25 टेंट जलकर खाक हो गए थे। प्रारंभिक जांच में गैस सिलेंडर लीक होने की वजह बताई गई। प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन 10 दिन बाद ही भगदड़ की घटना ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी।
सुरक्षा इंतजाम पर सवाल
पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए कुंभ मेले में कई सुधार किए गए थे। भीड़ प्रबंधन के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग, ड्रोन कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जा रहा है। आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाया गया और अस्थायी ढांचों को सुरक्षित तरीके से तैयार किया गया।
फिर भी, मौनी अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने में प्रशासन असफल रहा। इस भगदड़ ने एक बार फिर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मौनी अमावस्या का महत्व
मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान करने से आत्मा शुद्ध होती है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। लाखों श्रद्धालु इस दिन पुण्य कमाने के लिए महाकुंभ में आते हैं।
क्या कुंभ मेले में सुरक्षा और प्रबंधन में सुधार संभव है?
प्रशासन ने अब और कड़े इंतजाम करने का भरोसा दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को सुधारने और भीड़ प्रबंधन के लिए नए उपाय लागू करने की प्रक्रिया जारी है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।












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