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'हमारी बात सुनते तो ये नहीं होता', महाकुंभ भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत, प्रेमानंद पुरी ने रोते हुए कही बड़ी बात

Maha Kumbh Stampede 2025: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में मंगलवार आधी रात मची भगदड़ (Maha Kumbh Stampede) में 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। हादसा संगम नोज पर हुआ, जहां हजारों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए जमा हुए थे।

प्रशासन के मुताबिक, घायलों को तुरंत कुंभ क्षेत्र के सेक्टर-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद महाकुंभ में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस हादसे के बाद पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी भावुक हो गए और रो पड़े। उन्होंने कहा कि अगर इस आयोजन की सुरक्षा वयवस्था सेना के हाथों में होती तो यह हादसा नहीं होता।

Maha Kumbh 2025

महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी हुए भावुक

महाकुंभ में हुए इस हादसे के बाद मीडिया से बात करने के दौरान पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी भावुक हो गए और रो पड़े। उन्होंने कहा, "हमने पहले ही कहा था कि कुंभ की सुरक्षा को आर्मी के हवाले किया जाए, लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। इतनी विशाल भीड़ को पुलिस के बूते संभालना मुश्किल था। अब इसका नतीजा यह हुआ कि कई निर्दोष श्रद्धालुओं की जान चली गई।"
ये भी पढ़ें: Maha Kumbh Stampede: महाकुंभ में मौनी अमावस्या से पहले कैसे मची भगदड़? प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई आंखों देखी

उन्होंने आगे कहा, "अगर कुंभ की सुरक्षा सेना को दी जाती, तो शायद यह हादसा नहीं होता। मेरा मन बहुत व्यथित है। हमने अपने अखाड़े में भी कहा है कि ज्यादा हड़बड़ी न हो और लोग धीरे-धीरे अपने कैंपों में लौटें। अगर भीड़ अचानक घबरा जाएगी, तो और भगदड़ मच सकती है।"

कैसे हुआ हादसा?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात के समय अचानक भीड़ बढ़ने लगी। लोग संगम में स्नान करने के बाद बाहर निकलने लगे, लेकिन अव्यवस्थित भीड़ और रास्तों की संकीर्णता की वजह से लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। इसी दौरान भगदड़ मच गई और कई लोग जमीन पर गिर पड़े। अफरातफरी इतनी बढ़ गई कि कुछ श्रद्धालु भीड़ में दब गए और उनकी मौत हो गई।

जारी रहेगा अमृत स्नान

इस हादसे के चलते प्रशासन ने बुधवार को होने वाले अमृत स्नान को रद्द कर दिया हालांकि स्थिति नियंत्रित होने के बाद अमृत स्नान शुरू किया गया। अमृत स्नान महाकुंभ का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र स्नान माना जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती भीड़ को देखते हुए अमृत स्नान को रद्द करने का फैसला लिया गया था। हादसे के कुछ घंटे बाद हालत काबू में आने के बाद अमृत स्नान शुरू कर दिया गया। आम लोगों के बाद एक-एक कर 13 अखाड़ों ने मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान किया।

भीड़ का रिकॉर्ड टूटा, 5 करोड़ से ज्यादा लोग पहुंचे

मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान का विशेष महत्व है। इस साल इस पावन अवसर पर 10 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई गई थी।

  • मंगलवार शाम 6 बजे तक 4.64 करोड़ श्रद्धालु गंगा स्नान कर चुके थे।
  • जिले की स्थायी 70 लाख की आबादी को जोड़ दिया जाए, तो प्रयागराज में कुल 5.34 करोड़ लोग मौजूद थे।
  • इतनी बड़ी भीड़ ने प्रयागराज को दुनिया के सबसे बड़े अस्थायी शहर में बदल दिया।

हादसे के बाद सवालों के घेरे में प्रशासन

इस हादसे के बाद प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। श्रद्धालु और साधु-संतों का कहना है कि भीड़ प्रबंधन की सही योजना नहीं बनाई गई थी। प्रशासन ने पहले ही अनुमान लगाया था कि मौनी अमावस्या पर करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आएंगे, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। भगदड़ से बचने के लिए वैकल्पिक मार्ग और निकासी योजना तैयार नहीं थी, जिससे हादसा हुआ।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रवेश और निकास मार्गों पर उचित संकेतक (साइन बोर्ड) भी नहीं थे, जिससे श्रद्धालु भ्रमित हो गए और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। महाकुंभ में पहुंचे श्रद्धालुओं और प्रशासन ने लोगों से धैर्य बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।
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